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हाईवे पर शव रखकर किया प्रदर्शन
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हैदरगढ़ (बाराबंकी)। व्यापार के लिए बैंक से लिये कर्ज में डूबे अधिवक्ता पुत्र के आत्महत्या के मामले में मृतक की जेब से मिले सुसाइड नोट के बाद बुधवार को बवाल खड़ा हो गया। पोस्टमार्टम के बाद आक्रोशित ग्रामीण व अधिवक्ता सीधे शव लेकर बैंक शाखा के सामने पहुंचे। जहां हाईवे पर शव रखकर बैंक कर्मियों पर धन उगाही का आरोप लगाकर प्रदर्शन किया।
इस दौरान करीब एक घंटे तक लखनऊ-सुल्तानपुर हाईवे जाम रहा। सूचना पर एसडीएम व पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शाखा प्रबंधक पर दर्ज मुकदमे की नकल दी तब जाकर आक्रोशित अधिवक्ता व ग्रामीण माने। उसके बाद हाईवे से जाम हटा तो लोगों ने राहत की सांस ली। वहीं बैंक कर्मी बैंक बंद कर भाग गए।
हैदरगढ़ कोतवाली क्षेत्र के रौनी गांव निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता रूप नारायण वर्मा के बेटे शैलेंद्र ने मंगलवार को गांव के बाहर बाग में रस्सी का फंदा गले में लगा जान दे दी थी। इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। युवक की जेब में एक सुसाइड नोट मिला था।
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जिसमें लिखा था कि पीएनबी के शाखा प्रबंधक ने उसका दो लाख रुपये का एक बीमा कर दिया और सीसी लोन बनाने के नाम पर 60 हजार रुपये का सुविधा शुल्क भी लिया। इसके बाद उसके व्यापार के लिए दिए लोन में भी एक लाख दूसरे के चेक के जरिए लिये थे। वहीं इस बात की जानकारी स्टांप में किसी को न देने की बात भी कही थी। इसके बाद शाखा प्रबंधक ने साढ़े तीन लाख रुपये की छूट दिलाने के नाम पर कम से कम 50 हजार रुपये और लिये।
मगर, उसे कोई राहत नहीं मिल रही थी। उलटे बैंक जाने पर शाखा प्रबंधक कर्ज वसूली की चेतावनी देते थे। इस बात को लेकर आक्रोशित अधिवक्ता व ग्रामीण दोपहर बाद शव को बैंक के सामने हाईवे पर रखकर प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान बैंक कर्मी बैंक बंद कर भाग गए। सूचना पर एसडीएम शालिनी प्रभाकर के साथ ही लोनीकटरा व हैदरगढ़ पुलिस पहुंची।
जहां पुलिस ने पिता की तहरीर पर शाखा प्रबंधक पर केस की नकल दी तब जाकर आक्रोश शांत हुआ। वहीं एसडीएम ने परिवार को आर्थिक मदद का भरोसा दिलाया। उधर, इस मामले में पीएनबी त्रिवेदीगंज शाखा के प्रबंधक विकास गुप्ता ने बताया कि जनवरी में बीमा करवाया गया था। 50 हजार रुपये का आरोप झूठा है। एएसपी दक्षिण मनोज कुमार पाण्डेय ने बताया कि मामले में केस दर्ज कर जांच की जा रही है।
पति-पत्नी का बकाया था 10 लाख का कर्ज
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई कि मृतक शैलेंद्र व पत्नी विनीता दोनों के नाम पीएनबी की त्रिवेदीगंज शाखा में 10 लाख का कर्ज बकाया था। बैंक से शैलेंद्र का व्यापार के लिए छह लाख व पत्नी विनीता को नौ लाख रुपये का कर्ज स्वीकृत हुआ था। जिसमें विनीता के खाते में अभी भी चार लाख जमा है।
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इस दौरान करीब एक घंटे तक लखनऊ-सुल्तानपुर हाईवे जाम रहा। सूचना पर एसडीएम व पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शाखा प्रबंधक पर दर्ज मुकदमे की नकल दी तब जाकर आक्रोशित अधिवक्ता व ग्रामीण माने। उसके बाद हाईवे से जाम हटा तो लोगों ने राहत की सांस ली। वहीं बैंक कर्मी बैंक बंद कर भाग गए।
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हैदरगढ़ कोतवाली क्षेत्र के रौनी गांव निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता रूप नारायण वर्मा के बेटे शैलेंद्र ने मंगलवार को गांव के बाहर बाग में रस्सी का फंदा गले में लगा जान दे दी थी। इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। युवक की जेब में एक सुसाइड नोट मिला था।
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जिसमें लिखा था कि पीएनबी के शाखा प्रबंधक ने उसका दो लाख रुपये का एक बीमा कर दिया और सीसी लोन बनाने के नाम पर 60 हजार रुपये का सुविधा शुल्क भी लिया। इसके बाद उसके व्यापार के लिए दिए लोन में भी एक लाख दूसरे के चेक के जरिए लिये थे। वहीं इस बात की जानकारी स्टांप में किसी को न देने की बात भी कही थी। इसके बाद शाखा प्रबंधक ने साढ़े तीन लाख रुपये की छूट दिलाने के नाम पर कम से कम 50 हजार रुपये और लिये।
मगर, उसे कोई राहत नहीं मिल रही थी। उलटे बैंक जाने पर शाखा प्रबंधक कर्ज वसूली की चेतावनी देते थे। इस बात को लेकर आक्रोशित अधिवक्ता व ग्रामीण दोपहर बाद शव को बैंक के सामने हाईवे पर रखकर प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान बैंक कर्मी बैंक बंद कर भाग गए। सूचना पर एसडीएम शालिनी प्रभाकर के साथ ही लोनीकटरा व हैदरगढ़ पुलिस पहुंची।
जहां पुलिस ने पिता की तहरीर पर शाखा प्रबंधक पर केस की नकल दी तब जाकर आक्रोश शांत हुआ। वहीं एसडीएम ने परिवार को आर्थिक मदद का भरोसा दिलाया। उधर, इस मामले में पीएनबी त्रिवेदीगंज शाखा के प्रबंधक विकास गुप्ता ने बताया कि जनवरी में बीमा करवाया गया था। 50 हजार रुपये का आरोप झूठा है। एएसपी दक्षिण मनोज कुमार पाण्डेय ने बताया कि मामले में केस दर्ज कर जांच की जा रही है।
पति-पत्नी का बकाया था 10 लाख का कर्ज
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई कि मृतक शैलेंद्र व पत्नी विनीता दोनों के नाम पीएनबी की त्रिवेदीगंज शाखा में 10 लाख का कर्ज बकाया था। बैंक से शैलेंद्र का व्यापार के लिए छह लाख व पत्नी विनीता को नौ लाख रुपये का कर्ज स्वीकृत हुआ था। जिसमें विनीता के खाते में अभी भी चार लाख जमा है।