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Barabanki News: गुलाब, गेंदा, चुकंदर, गाजर से हर्बल रंग व गुलाल बना रहे बंदी
Sat, 15 Feb 2025 10:07 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 15 Feb 2025 10:07 PM IST
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बाराबंकी। जिला जेल में बंद 50 हुनरमंद बंदी व कैदी अपनी रचनात्मकता को नई पहचान दे रहे हैं। जेल परिसर में हर्बल क्रांति के माध्यम से यह बंदी व कैदी गुलाब, गेंदा, चुकंदर, गाजर और पालक जैसी प्राकृतिक चीजों से हर्बल रंग व गुलाल तैयार कर रहे हैं। इस बार होली पर इसकी सप्लाई प्रदेश के अन्य जेलों के साथ ही खुले बाजार में भी होगी।
जेल प्रशासन ने एक संस्था के सहयोग से जिला जेल में बंद इन कैदियों व बंदियों हर्बल रंग व गुलाल बनाने की तकनीक सिखाई है। ताकि इस बार होली में रासायनिक रंगों के खतरों से मुक्त, पूरी तरह प्राकृतिक और त्वचा के लिए सुरक्षित रंग मुहैया कराया जा सके। हर्बल रंग व गुलाल का निर्माण होने के बाद इनको प्रदेश के अन्य जिलों की जेलों में भी भेजा जाएगा। बीते एक सप्ताह से बंदियों द्वारा जेल के खेतों में तैयार हुई सब्जियों व फूलों से हर्बल रंग बनाने का कार्य किया जा रहा है। जेलर संतोष तिवारी ने बताया कि फिलहाल यह रंग व गुलाल प्रदेश की अन्य जेलों के लिए तैयार हो रहा है। आपूर्ति होने के बाद ही इसे बाजार में बेचने के लिए भेजा जाएगा। (संवाद)
इस बार जेल में एक अलग नजारा देखने को मिलेगा। बंदी रासायनिक रंगों से दूरी बनाते हुए खुद के बनाए हर्बल रंगों से होली खेलेंगे। जेल अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से बंदियों के भीतर सकारात्मक बदलाव आएगा और उनके पुनर्वास का मार्ग भी खुलेगा।
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हर्बल रंग बनाने के लिए फूलों, पत्तियों, बीजों और सब्जियों का उपयोग किया जाता है। लाल रंग के लिए चुकंदर को उबालकर या सुखाकर पाउडर बना सकते हैं। गुड़हल के फूल को सुखाकर बारीक पीस लें। अनार के छिलकों को पानी में उबालकर लाल रंग प्राप्त किया जा सकता है। हल्दी, बेसन या आटे के साथ मिलाकर सूखा रंग तैयार होता है। गेंदे के फूल को सुखाकर पीसने या पानी में उबालकर घोल बनाने व पालक और मेथी की पत्तियों को पीसकर या सुखाकर पाउडर बनाया जा सकता है।
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जेल प्रशासन ने एक संस्था के सहयोग से जिला जेल में बंद इन कैदियों व बंदियों हर्बल रंग व गुलाल बनाने की तकनीक सिखाई है। ताकि इस बार होली में रासायनिक रंगों के खतरों से मुक्त, पूरी तरह प्राकृतिक और त्वचा के लिए सुरक्षित रंग मुहैया कराया जा सके। हर्बल रंग व गुलाल का निर्माण होने के बाद इनको प्रदेश के अन्य जिलों की जेलों में भी भेजा जाएगा। बीते एक सप्ताह से बंदियों द्वारा जेल के खेतों में तैयार हुई सब्जियों व फूलों से हर्बल रंग बनाने का कार्य किया जा रहा है। जेलर संतोष तिवारी ने बताया कि फिलहाल यह रंग व गुलाल प्रदेश की अन्य जेलों के लिए तैयार हो रहा है। आपूर्ति होने के बाद ही इसे बाजार में बेचने के लिए भेजा जाएगा। (संवाद)
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इस बार जेल में एक अलग नजारा देखने को मिलेगा। बंदी रासायनिक रंगों से दूरी बनाते हुए खुद के बनाए हर्बल रंगों से होली खेलेंगे। जेल अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से बंदियों के भीतर सकारात्मक बदलाव आएगा और उनके पुनर्वास का मार्ग भी खुलेगा।
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हर्बल रंग बनाने के लिए फूलों, पत्तियों, बीजों और सब्जियों का उपयोग किया जाता है। लाल रंग के लिए चुकंदर को उबालकर या सुखाकर पाउडर बना सकते हैं। गुड़हल के फूल को सुखाकर बारीक पीस लें। अनार के छिलकों को पानी में उबालकर लाल रंग प्राप्त किया जा सकता है। हल्दी, बेसन या आटे के साथ मिलाकर सूखा रंग तैयार होता है। गेंदे के फूल को सुखाकर पीसने या पानी में उबालकर घोल बनाने व पालक और मेथी की पत्तियों को पीसकर या सुखाकर पाउडर बनाया जा सकता है।