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अब तक सबसे ऊंची कीमतों पर पहुंचा डीजल, पेट्रोल, सबका बिगड़ा बजट
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बाराबंकी। शहर बस स्टेशन के निकट स्थित पेट्रोल पंप पर पेट्रोल भरवाते बाइक सवार लोग।
- फोटो : BARABANKI
बाराबंकी। अब तक के इतिहास में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सबसे अधिक उछाल दर्ज किया गया है। पेट्रोल 85 रुपये तो डीजल 76 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गया है। नौ माह के भीतर करीब 13 रुपये प्रति लीटर तक कीमतें बढ़ी हैं। कोरोना काल के दौरान लोगों की आमदनी घटी और महंगाई दिनों दिन बढ़ती जा रही है।
इस पर सबकी चुप्पी के आगे गृहिणी से लेकर कारोबारी, व्यापारी और किसान मन मसोस कर किसी तरह काम चला रहे हैं। तेल की बढ़ी कीमतों पर सभी वर्गों के लोग बोले कि आय घटी और लागत बढ़ने से बजट बिगड़ गया है। ऐसी गंभीर समस्या में तेल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी ने अब कमर तोड़ दी है।
डीजल और पेट्रोल की बढ़ी कीमतों का अब जनजीवन पर असर पड़ने लगा है। जिले में करीब 140 पेट्रोल पंप हैं। यहां से लाखों लीटर तेल की प्रतिदिन बिक्री होती है। अप्रैल 2020 से लेकर कोरोना काल में करीब नौ माह के भीतर डीजल और पेट्रोल में 13 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई है।
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माल का भाड़ा हो या फिर खेती में ट्रैक्टर से लेकर पंपिंग सेट तक डीजल की खपत अधिक होती है। इस पर असर पड़ने से दैनिक वस्तुओं तेल, सब्जी से लेकर हर चीजों के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं। सरसों का तेल डेढ़ सौ रुपये प्रति किलो बिक रहा है तो किसानों को खेती में जुुताई से लेकर सिंचाई तक खर्च डेढ़ गुना बढ़ गया है।
व्यापारी कहते हैं कि लागत बढ़ी है आमदनी घट गई है। सभी वर्ग के लोग कह रहे हैं कि अब तक के इतिहास में पहली बार इतनी कीमतें डीजल और पेट्रोल की पहुंची हैं। इन पर अंकुश लगाने के लिए न सरकार ध्यान दे रही है न ही विपक्ष बोल रहा है। धीरे-धीरे यह कीमतें बढ़ती गईं और लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर लूटा जा रहा है।
रसोई चलाना मुश्किल
मोदी सरकार भले हर क्षेत्र में काम कर रही हो लेकिन ईंधन के दाम बढ़ने से घर की रसोई चलाना मुश्किल है। आज सरसों का तेल डेढ़ सौ रुपये किलो है। इस पर भी ध्यान देना चाहिए।
-रश्मि जायसवाल, गृहिणी
खेत जुताई का बढ़ा भाड़ा
खेत की जुताई के लिए ट्रैक्टर किराए पर लाते हैं। पहले डीजल के दाम कम होने से भाड़ा कम था लेकिन अब तो अधिक भाड़ा देकर जुुताई करानी पड़ रही है। पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
-शंभूलाल, किसान
डीजल के दाम बढ़े पर भाड़ा नहीं
भाड़े पर गाड़ियां भेजना अब महंगा पड़ रहा है। डीजल के दाम तो बढ़ गए पर भाड़ा नहीं बढ़ा है। चालकों का भी खर्च बढ़ा है। ऐसे में ट्रांसपोर्ट का बिजनेस चलाना मुश्किल होता जा रहा है।
-सिराज अहमद, ट्रांसपोर्टर
तय रेट पर दिया जाता पेट्रोल-डीजल
डीजल-पेट्रोल के दाम घटने-बढ़ने की सूचना मोबाइल पर रोज सुबह छह तक बजे आती है। इसके बाद ग्राहकों को उसी दर पर ईंधन दिया जाता है। इधर कुछ माह में लगातार बढ़ोतरी हुई है।
-नानक सरन वर्मा, पेट्रोल पंप संचालक
हर वर्ग के लोग परेशान
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने से हर वर्ग के लोग परेशान हैं। इससे बाजार में छोटी-बड़ी हर वस्तुएं प्रभावित हुई हैं। इस पर न तो सरकार बोल रही है और न ही विपक्ष।
-करन वैश्य, ग्राहक
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इस पर सबकी चुप्पी के आगे गृहिणी से लेकर कारोबारी, व्यापारी और किसान मन मसोस कर किसी तरह काम चला रहे हैं। तेल की बढ़ी कीमतों पर सभी वर्गों के लोग बोले कि आय घटी और लागत बढ़ने से बजट बिगड़ गया है। ऐसी गंभीर समस्या में तेल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी ने अब कमर तोड़ दी है।
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डीजल और पेट्रोल की बढ़ी कीमतों का अब जनजीवन पर असर पड़ने लगा है। जिले में करीब 140 पेट्रोल पंप हैं। यहां से लाखों लीटर तेल की प्रतिदिन बिक्री होती है। अप्रैल 2020 से लेकर कोरोना काल में करीब नौ माह के भीतर डीजल और पेट्रोल में 13 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई है।
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माल का भाड़ा हो या फिर खेती में ट्रैक्टर से लेकर पंपिंग सेट तक डीजल की खपत अधिक होती है। इस पर असर पड़ने से दैनिक वस्तुओं तेल, सब्जी से लेकर हर चीजों के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं। सरसों का तेल डेढ़ सौ रुपये प्रति किलो बिक रहा है तो किसानों को खेती में जुुताई से लेकर सिंचाई तक खर्च डेढ़ गुना बढ़ गया है।
व्यापारी कहते हैं कि लागत बढ़ी है आमदनी घट गई है। सभी वर्ग के लोग कह रहे हैं कि अब तक के इतिहास में पहली बार इतनी कीमतें डीजल और पेट्रोल की पहुंची हैं। इन पर अंकुश लगाने के लिए न सरकार ध्यान दे रही है न ही विपक्ष बोल रहा है। धीरे-धीरे यह कीमतें बढ़ती गईं और लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर लूटा जा रहा है।
रसोई चलाना मुश्किल
मोदी सरकार भले हर क्षेत्र में काम कर रही हो लेकिन ईंधन के दाम बढ़ने से घर की रसोई चलाना मुश्किल है। आज सरसों का तेल डेढ़ सौ रुपये किलो है। इस पर भी ध्यान देना चाहिए।
-रश्मि जायसवाल, गृहिणी
खेत जुताई का बढ़ा भाड़ा
खेत की जुताई के लिए ट्रैक्टर किराए पर लाते हैं। पहले डीजल के दाम कम होने से भाड़ा कम था लेकिन अब तो अधिक भाड़ा देकर जुुताई करानी पड़ रही है। पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
-शंभूलाल, किसान
डीजल के दाम बढ़े पर भाड़ा नहीं
भाड़े पर गाड़ियां भेजना अब महंगा पड़ रहा है। डीजल के दाम तो बढ़ गए पर भाड़ा नहीं बढ़ा है। चालकों का भी खर्च बढ़ा है। ऐसे में ट्रांसपोर्ट का बिजनेस चलाना मुश्किल होता जा रहा है।
-सिराज अहमद, ट्रांसपोर्टर
तय रेट पर दिया जाता पेट्रोल-डीजल
डीजल-पेट्रोल के दाम घटने-बढ़ने की सूचना मोबाइल पर रोज सुबह छह तक बजे आती है। इसके बाद ग्राहकों को उसी दर पर ईंधन दिया जाता है। इधर कुछ माह में लगातार बढ़ोतरी हुई है।
-नानक सरन वर्मा, पेट्रोल पंप संचालक
हर वर्ग के लोग परेशान
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने से हर वर्ग के लोग परेशान हैं। इससे बाजार में छोटी-बड़ी हर वस्तुएं प्रभावित हुई हैं। इस पर न तो सरकार बोल रही है और न ही विपक्ष।
-करन वैश्य, ग्राहक