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आत्मशुद्धि और संस्कारों के जागरण का पर्व है पंचकल्याणक: रवींद्रकीर्ति
Sat, 20 Jun 2026 10:38 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 20 Jun 2026 10:38 PM IST
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जैन मंदिर में भगवान के विग्रह का अभिषेक करते जैन श्रद्धालु
अयोध्या। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत शनिवार को जैन मंदिर परिसर में केवलज्ञान कल्याणक श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों, पूजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया। उन्होंने कहा कि पंचकल्याणक महोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और संस्कारों के जागरण का पर्व है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, अहिंसा और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
कार्यक्रम के दौरान भगवान के केवलज्ञान प्राप्ति प्रसंग का प्रतीकात्मक आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने अभिषेक, शांतिधारा, पूजन और आराधना में भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया। विभिन्न धार्मिक झांकियों और प्रवचनों के माध्यम से जैन दर्शन के सिद्धांतों का भी वर्णन किया गया। मंदिर के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी ने कहा कि केवलज्ञान कल्याणक जैन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक प्रसंगों में से एक है। यह वह दिव्य क्षण है जब तीर्थंकर समस्त कर्मावरणों का क्षय कर पूर्ण और अनंत ज्ञान प्राप्त करते हैं। केवलज्ञान के बाद आत्मा को समस्त लोक और अलोक का प्रत्यक्ष ज्ञान हो जाता है। यह मानव जीवन को आत्मकल्याण, संयम और मोक्ष मार्ग की प्रेरणा देता है। पूजन कार्यक्रम में प्रतिष्ठाचार्य विजय जैन के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में आर्यिका चंदनामती, डॉक्टर जीवन प्रकाश जैन, अमर चंद जैन, मनोज जैन, सुरेंद्र जैन, पारस जैन समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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कार्यक्रम के दौरान भगवान के केवलज्ञान प्राप्ति प्रसंग का प्रतीकात्मक आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने अभिषेक, शांतिधारा, पूजन और आराधना में भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया। विभिन्न धार्मिक झांकियों और प्रवचनों के माध्यम से जैन दर्शन के सिद्धांतों का भी वर्णन किया गया। मंदिर के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी ने कहा कि केवलज्ञान कल्याणक जैन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक प्रसंगों में से एक है। यह वह दिव्य क्षण है जब तीर्थंकर समस्त कर्मावरणों का क्षय कर पूर्ण और अनंत ज्ञान प्राप्त करते हैं। केवलज्ञान के बाद आत्मा को समस्त लोक और अलोक का प्रत्यक्ष ज्ञान हो जाता है। यह मानव जीवन को आत्मकल्याण, संयम और मोक्ष मार्ग की प्रेरणा देता है। पूजन कार्यक्रम में प्रतिष्ठाचार्य विजय जैन के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में आर्यिका चंदनामती, डॉक्टर जीवन प्रकाश जैन, अमर चंद जैन, मनोज जैन, सुरेंद्र जैन, पारस जैन समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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