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अपने चहेतों को कुर्सी पर बैठाने में फेल हो गए सांसद व विधायक

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 04 May 2021 12:58 AM IST
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बाराबंकी। प्रदेश व देश की सत्ताधारी पार्टी भाजपा को पंचायत चुनाव में जिले की जनता ने आइना दिखाया है। जनता के बीच सिर्फ बड़े-बड़े वायदे करने वाले पार्टी के विधायक व सांसद पार्टी के प्रत्याशियों को जिताने की तो छोड़िए अपने चहेतों को भी जीत नहीं दिला सके है। जनता की पार्टी के प्रति नाराजगी इस चुनाव में साफ तौर पर देखने को मिली है। ऐसे में अब इसका असर आगामी ब्लॉक प्रमुख चुनाव व जिला पंचायत अध्यक्ष से लेकर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में भी पड़ना तय माना जा रहा है।
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भारतीय जनता पार्टी ने जिले में 57 जिला पंचायत सीटों के लिए अपने अधिकृत प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा था। लेकिन अब जब पंचायत चुनाव के परिणाम आए हैं तो ज्यादातर भाजपा प्रत्याशी धराशायी हुए नजर आ रहे हैं। इस चुनाव में जहां हरख से पूर्व सांसद के पुत्र स्वराज सौरभ रावत मैदान में थे वहीं सांसद उपेंद्र सिंह रावत के निजी सचिव व दिनेशचंद्र रावत की पत्नी गीता रावत, सांसद के भतीजे सुशील रावत, विधायक रामनगर शरद अवस्थी के करीबी अमित कुमार पांडेय, विधायक सतीश शर्मा के करीबी, विधायक बैजनाथ रावत व साकेंद्र प्रताप वर्मा के कई करीबी लोग भाजपा की सीट पर इस चुनाव में मैदान में थे।

अभी तक के परिणाम पर नजर डालें तो निंदूरा क्षेत्र से भाजपा ने दो, रामनगर से एक, हैदरगढ़ से दो, बनीकोडर, त्रिवेदीगंज व अन्य इलाकों से भी नाम की ही सीटें भाजपा के खाते में आई हैं। जबकि विरोधी पार्टी सपा की बात करें तो उसकी सीटें ज्यादा होने का अनुमान होने के साथ निर्दलीयों का भी दबदबा है। भाजपा विधायक सतीश शर्मा जिस सीट से कई बार जिला पंचायत सदस्य चुने जाते थे इस बार वह सीट भी नहीं बचा सके। इसी तरह कई अन्य सीटों पर भी यही हाल भाजपा का रहा।
नेताओं की बेअंदाजी बनी हार का कारण
सत्ता पक्ष का आनंद लेने वाले भाजपा नेताओं को जनता की नाराजगी का सामना ऐसे ही नहीं करना पड़ा है। लोग बताते हैं कि भाजपा के नेताओं को जब फोन करके अपना कोई काम बताओ तो फरियाद सुनने के पहले ही उल्टे ही फटकार लगाने लगते हैं। इसके साथ ही क्षेत्र में आम जनता की न सुनकर सिर्फ अपनी मनमानी व अपने फायदे के ही काम किए जाते हैं।
थाना से लेकर तहसील स्तर और अन्य सरकारी कार्यालयों में छोटे से काम के लिए भी लोगों को कई-कई बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। इन्हीं सब बातों का नतीजा है कि इस चुनाव में भाजपा की यह स्थिति सामने आई है। कोरोना काल में सरकार चाहे जितना दावे करें लेकिन जिले के भाजपा नेता किसी भी पीड़ित का कभी हाल नहीं पूछते हैं। ऐसे में लोगों का गुस्सा फूट-फूटकर अब सामने आने लगा है।

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