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डेढ़ लाख बच्चों को किताबों का इंतजार
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बाराबंकी। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने वाले डेढ़ लाख बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें अभी तक किताबें नहीं मिल सकी हैं। विभाग का कहना है कि जितने बच्चे आ रहे हैं, उन्हें किताबें दी जा रही हैं। जो बच्चे नहीं आ रहे हैं, वहीं बच्चे रह गए हैं। जब विद्यालय आएंगे तो उन्हें भी किताबें उपलब्ध करा दी जाएंगी। बच्चों की संख्या के आधार पर सभी ब्लॉकों को किताबें भेज दी गई हैं।
जिले में परिषदीय विद्यालयों की संख्या 2636 है, इनमें पंजीकृत छात्रों की संख्या करीब 3 लाख 50 हजार है। विभाग के मुताबिक अब तक करीब दो लाख बच्चों को किताबों का वितरण कराया जा चुका है। जबकि सूत्रों का कहना कि जितनी किताबें विभाग को चाहिए, उतनी मिल नहीं सकी हैं। यही कारण है कि करीब डेढ़ लाख बच्चे ऐसे हैं जिन्हें किताबें नहीं मिल सकी है।
इन बच्चों को किताबें कब तक मिल पाएंगी, यह कह पाना काफी मुश्किल है। विभाग का दावा है कि उसे बच्चों की संख्या के आधार पर किताबें मिल चुकी हैं, इन्हें ब्लॉकों पर भेज दिया गया था। जिस दिन से विद्यालय खुले हैं, उसी दिन से बच्चों में किताबों का वितरण कराया जा रहा है।
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इस संबंध में सभी बीईओ को स्पष्ट निर्देश भी दिए जा चुके हैं। बीएसए अजय कुमार सिंह ने बताया कि जिले के सभी ब्लॉकों पर पर्याप्त मात्रा में किताबें उपलब्ध हैं। जिस दिन से विद्यालय खुले हैं, उसी दिन से किताबों का वितरण बच्चों में कराया जा रहा है। उन्हीं बच्चों को किताबें नहीं मिल सकी है जो किन्हीं कारणों से स्कूल नहीं आ पा रहे हैं।
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जिले में परिषदीय विद्यालयों की संख्या 2636 है, इनमें पंजीकृत छात्रों की संख्या करीब 3 लाख 50 हजार है। विभाग के मुताबिक अब तक करीब दो लाख बच्चों को किताबों का वितरण कराया जा चुका है। जबकि सूत्रों का कहना कि जितनी किताबें विभाग को चाहिए, उतनी मिल नहीं सकी हैं। यही कारण है कि करीब डेढ़ लाख बच्चे ऐसे हैं जिन्हें किताबें नहीं मिल सकी है।
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इन बच्चों को किताबें कब तक मिल पाएंगी, यह कह पाना काफी मुश्किल है। विभाग का दावा है कि उसे बच्चों की संख्या के आधार पर किताबें मिल चुकी हैं, इन्हें ब्लॉकों पर भेज दिया गया था। जिस दिन से विद्यालय खुले हैं, उसी दिन से बच्चों में किताबों का वितरण कराया जा रहा है।
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इस संबंध में सभी बीईओ को स्पष्ट निर्देश भी दिए जा चुके हैं। बीएसए अजय कुमार सिंह ने बताया कि जिले के सभी ब्लॉकों पर पर्याप्त मात्रा में किताबें उपलब्ध हैं। जिस दिन से विद्यालय खुले हैं, उसी दिन से किताबों का वितरण बच्चों में कराया जा रहा है। उन्हीं बच्चों को किताबें नहीं मिल सकी है जो किन्हीं कारणों से स्कूल नहीं आ पा रहे हैं।