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राष्ट्रीय मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना जिले में बदहाल
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 05 Feb 2016 11:41 PM IST
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राष्ट्रीय मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत खेतों की सेहत सुधार कर किसानाें को मजबूत करने का प्रधानमंत्री के सपने पर कृषि विभाग के अधिकारियों की लापरवाही भारी पड़ रही है। तहसील स्तरीय मृदा परीक्षण लैब में गत वर्ष जनवरी से बिना वेतन के कार्य कर रहे एनजीओ कर्मियों को खाने के लाले हैं। कई माह से पोल टूटा होने से विद्युत आपूर्ति बाधित है और मृदा परीक्षण में कठिनाई हो रही है।
प्रधानमंत्री ने बीते वर्ष फरवरी में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की शुरुआत कर खेत की बीमारी का पता लगाने व नियमित वैज्ञानिक सलाह से उपचार की विधि अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने पर बल दिया था लेकिन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह सब महज कागजी खानापूर्ति तक सीमित है। मृदा परीक्षण के लिए जमा दो हजार नमूनों में मात्र साढे़ छह सौ की जांच हो सकी है।
केवीके पर मृदा परीक्षण लैब के लिए आत्मा योजना से आए लाखों के केमिकल व उपकरण खराब हो गए लेकिन वैज्ञानिकों ने उनकी पैकिंग तक खोलना जरूरी नहीं समझा तथा शिकायतों के भय से केंद्र में ही किसी कमरे में रख दिया है। वैज्ञानिक लापरवाही छुपाने के लिए फैजाबाद की लैब से जमा नमूनों का परीक्षण करा औपचारिकता निभा रहे हैं।
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प्रधानमंत्री ने बीते वर्ष फरवरी में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की शुरुआत कर खेत की बीमारी का पता लगाने व नियमित वैज्ञानिक सलाह से उपचार की विधि अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने पर बल दिया था लेकिन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह सब महज कागजी खानापूर्ति तक सीमित है। मृदा परीक्षण के लिए जमा दो हजार नमूनों में मात्र साढे़ छह सौ की जांच हो सकी है।
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केवीके पर मृदा परीक्षण लैब के लिए आत्मा योजना से आए लाखों के केमिकल व उपकरण खराब हो गए लेकिन वैज्ञानिकों ने उनकी पैकिंग तक खोलना जरूरी नहीं समझा तथा शिकायतों के भय से केंद्र में ही किसी कमरे में रख दिया है। वैज्ञानिक लापरवाही छुपाने के लिए फैजाबाद की लैब से जमा नमूनों का परीक्षण करा औपचारिकता निभा रहे हैं।
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