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Barabanki News: किसानों की आय का स्रोत बनीं मेंथा की जड़ें
Mon, 06 Feb 2023 12:55 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 06 Feb 2023 12:55 AM IST
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बाराबंकी। मेंथा की खेती जिले की पहचान बनी हुई है। इसके तेल के साथ-साथ जड़ का व्यापार भी किसानों को समृद्ध बना रहा है। मेंथा की जड़ की बाजार विशुनपुर में लगभग 15 साल से लग रही है। जड़ें खरीदने के लिए प्रदेश भर से किसान यहां आते हैं।
विशुनपुर बाजार में जड़ के विक्रेता और किसान सुरेश चंद्र यादव बताते हैं कि वह तीन प्रकार की जड़ें बेचते हैं। उनमें प्रमुख तौर पर सिम उन्नति है। पिछले कुछ सालों में सिम उन्नति किस्म की जड़ किसानों की पहली पसंद बनी हुई है। इस जड़ की खास बात यह है कि इसे 10 किलो प्रति बीघे में लगाया जाता है और इससे 22 से 24 किलो प्रति बीघा तेल निकलता है। दूसरी किस्म पंजाब गोल्ड है। इसमें 20 किलो प्रति बीघे तेल निकलता है। तीसरी किस्म देशी है जिसे कोसी भी कहते हैं। देशी जड़ में मात्र 15 किलो ही तेल मिलता है। सुरेश यह सब अपने खेतों में तैयार करते हैं।
शुरुआती दौर में वह सिर्फ देशी किस्म ही बेचते थे। धीरे-धीरे जब मेंथा की किस्मों का ज्ञान बढ़ा, तब उन्होंने अपना व्यापार भी बढ़ाना शुरू किया। उन्होंने बताया कि इस सीजन के अंत तक वह एक किस्म की जड़ और बाजार में ले आएंगे। जड़ें खरीदने यहां सीतापुर, लखीमपुर, अयोध्या, रायबरेली, अमेठी, फतेहपुर, गोंडा, बहराइच, बलरामपुर, महाराजगंज, हरदोई आदि जिलों के किसान आते हैं। शनिवार को महाराजगंज से आए किसान ललित कुमार ने बताया कि वह पिछले दो सालों से जड़ें यहीं से ले जाते हैं। सिम उन्नति किस्म और कहीं इतनी अच्छी नहीं मिलती, जितनी विशुनपुर में मिलती है। वह चार से छह क्विंटल जड़ें हर साल ले जाते हैं।
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विशुनपुर बाजार में जड़ के विक्रेता और किसान सुरेश चंद्र यादव बताते हैं कि वह तीन प्रकार की जड़ें बेचते हैं। उनमें प्रमुख तौर पर सिम उन्नति है। पिछले कुछ सालों में सिम उन्नति किस्म की जड़ किसानों की पहली पसंद बनी हुई है। इस जड़ की खास बात यह है कि इसे 10 किलो प्रति बीघे में लगाया जाता है और इससे 22 से 24 किलो प्रति बीघा तेल निकलता है। दूसरी किस्म पंजाब गोल्ड है। इसमें 20 किलो प्रति बीघे तेल निकलता है। तीसरी किस्म देशी है जिसे कोसी भी कहते हैं। देशी जड़ में मात्र 15 किलो ही तेल मिलता है। सुरेश यह सब अपने खेतों में तैयार करते हैं।
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शुरुआती दौर में वह सिर्फ देशी किस्म ही बेचते थे। धीरे-धीरे जब मेंथा की किस्मों का ज्ञान बढ़ा, तब उन्होंने अपना व्यापार भी बढ़ाना शुरू किया। उन्होंने बताया कि इस सीजन के अंत तक वह एक किस्म की जड़ और बाजार में ले आएंगे। जड़ें खरीदने यहां सीतापुर, लखीमपुर, अयोध्या, रायबरेली, अमेठी, फतेहपुर, गोंडा, बहराइच, बलरामपुर, महाराजगंज, हरदोई आदि जिलों के किसान आते हैं। शनिवार को महाराजगंज से आए किसान ललित कुमार ने बताया कि वह पिछले दो सालों से जड़ें यहीं से ले जाते हैं। सिम उन्नति किस्म और कहीं इतनी अच्छी नहीं मिलती, जितनी विशुनपुर में मिलती है। वह चार से छह क्विंटल जड़ें हर साल ले जाते हैं।
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