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बाबा की खरीदी लाइसेंसी बंदूक ने पौत्री की ली जान
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हैदरगढ़। जिस परिवार की एकता की कभी पूरे क्षेत्र में मिसाल दी जाती थी। उसी परिवार में पेड़ को लेकर अपने ही जान के दुश्मन बन बैठे। मामूली बात को लेकर बाबा की खरीदी लाइसेंसी बंदूक ने ही पौत्री की जान ले ली। स्वीटी के पांच जून को होने वाले बरीक्षा में विवाह की तारीख तय होनी थी। मगर, उसकी मौत के बाद मातम में बदली खुशियों के साथ सब कुछ धरा रह गया।
असंद्रा के पलौली गांव में बुधवार सुबह यूूकेलिप्टस के पेड़ का विवाद इतना बढ़ा कि जिन बच्चों को कभी गोद में लेकर पुचकारा वहीं आंखों की किरकिरी बन गए। जिस बंदूक से चचेरे चाचा ने स्वीटी को मौत के घाट उतारा। वहीं स्वीटी की बहन शिवानी व सत्यम घायल हुए। यह लाइसेंसी बंदूक स्वीटी के बाबा कालीबक्श सिंह ने ही खरीदी थी।
ग्रामीणों की मानें तो रामेश्वर सिंह के दो पुत्र फूलबख्श व कालीबख्श थे। दोनों के चार-चार पुत्र हैं। दोनों परिवारों के बीच प्रेम व लगाव की चर्चाएं आम थीं। यही वजह है कि कालीबख्श की मौत होने के बाद उनकी दो नाली लाइसेंस बंदूक की वरासत इनके पुत्रों की बजाय भाई फूलबख्श को मिली और किसी ने आपत्ति नहीं की।
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इसी लाइसेंसी बंदूक से फूलबख्श के बेटे हरबक्श ने मामूली बात को लेकर अपनों पर ही फायर झोंक दिया। मृतका के चाचा महेश सिंह ने बताया कि स्वीटी का विवाह हरदोई जिले से हाल में ही तय हुआ था। पांच जून को बरीक्षा में विवाह की तारीख तय की जानी थी। इसकी तैयारियां घर पर चल रही हैं। बहन के विवाह में कोई कमी न रहे। इसको लेकर दुबई में रहने वाला बड़ा भाई वहां से रुपये भेजने के साथ तैयारियों के बारे में परिवारीजनों को बता रहा था।
पुलिस पहले चेतती तो बच जाती युवती की जान
मकान के बंटवारे को लेकर दोनों परिवारों के बीच आए दिन गालीगलौज व कहासुनी होती रही। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंचती। दोनों पक्षों को समझाकर लौट जाती थी। ऐसे में अगर पहले ही पुलिस प्रभावी कार्रवाई करती तो शायद युवती की जान बच जाती।
तमाशबीन बने ग्रामीणों ने बीचबचाव की नहीं जुटाई हिम्मत
बुधवार सुबह ट्रैक्टर से जाने के दौरान हुई मारपीट में ग्रामीण तमाशबीन बने रहे। किसी ने बीचबचाव कराने की भी हिम्मत नहीं जुटाई। गोली लगने पर युवती पास खड़े युवक से लिपट गई। मगर, अगला फायर होते ही युवक भी उसे छोड़कर मौके से भाग गया।
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असंद्रा के पलौली गांव में बुधवार सुबह यूूकेलिप्टस के पेड़ का विवाद इतना बढ़ा कि जिन बच्चों को कभी गोद में लेकर पुचकारा वहीं आंखों की किरकिरी बन गए। जिस बंदूक से चचेरे चाचा ने स्वीटी को मौत के घाट उतारा। वहीं स्वीटी की बहन शिवानी व सत्यम घायल हुए। यह लाइसेंसी बंदूक स्वीटी के बाबा कालीबक्श सिंह ने ही खरीदी थी।
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ग्रामीणों की मानें तो रामेश्वर सिंह के दो पुत्र फूलबख्श व कालीबख्श थे। दोनों के चार-चार पुत्र हैं। दोनों परिवारों के बीच प्रेम व लगाव की चर्चाएं आम थीं। यही वजह है कि कालीबख्श की मौत होने के बाद उनकी दो नाली लाइसेंस बंदूक की वरासत इनके पुत्रों की बजाय भाई फूलबख्श को मिली और किसी ने आपत्ति नहीं की।
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इसी लाइसेंसी बंदूक से फूलबख्श के बेटे हरबक्श ने मामूली बात को लेकर अपनों पर ही फायर झोंक दिया। मृतका के चाचा महेश सिंह ने बताया कि स्वीटी का विवाह हरदोई जिले से हाल में ही तय हुआ था। पांच जून को बरीक्षा में विवाह की तारीख तय की जानी थी। इसकी तैयारियां घर पर चल रही हैं। बहन के विवाह में कोई कमी न रहे। इसको लेकर दुबई में रहने वाला बड़ा भाई वहां से रुपये भेजने के साथ तैयारियों के बारे में परिवारीजनों को बता रहा था।
पुलिस पहले चेतती तो बच जाती युवती की जान
मकान के बंटवारे को लेकर दोनों परिवारों के बीच आए दिन गालीगलौज व कहासुनी होती रही। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंचती। दोनों पक्षों को समझाकर लौट जाती थी। ऐसे में अगर पहले ही पुलिस प्रभावी कार्रवाई करती तो शायद युवती की जान बच जाती।
तमाशबीन बने ग्रामीणों ने बीचबचाव की नहीं जुटाई हिम्मत
बुधवार सुबह ट्रैक्टर से जाने के दौरान हुई मारपीट में ग्रामीण तमाशबीन बने रहे। किसी ने बीचबचाव कराने की भी हिम्मत नहीं जुटाई। गोली लगने पर युवती पास खड़े युवक से लिपट गई। मगर, अगला फायर होते ही युवक भी उसे छोड़कर मौके से भाग गया।