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Barabanki News: दो दोस्तों की मौत से मातम, पापा..पापा चिल्लाते रहे मासूम

Sat, 28 Jun 2025 01:12 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Sat, 28 Jun 2025 01:12 AM IST
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Mourning over the death of two friends, innocent boy kept screaming Papa..Papa
बाराबंकी। उत्तराखंड के कैंची धाम जा रहे छह दोस्तों में से दो की मौत की खबर शुक्रवार तड़के बाराबंकी पहुंची, तो शहर की आवास विकास कॉलोनी में मातम पसर गया। हादसे में जान गंवाने वालों में कॉलोनी निवासी विवेक मिश्रा (35) और उनके करीबी मित्र योगेश कुरील (50) शामिल हैं। दोनों की मौत की खबर करीब नौ घंटे बाद देर रात दो बजे शाहजहांपुर पुलिस की कॉल से परिजनों को मिली। इसके बाद परिवार में कोहराम मच गया। मां को रोता देख बच्चे पापा...पापा चिल्लाते बिलखते रहे।
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विवेक मिश्रा जहां निजी व्यवसाय से जुड़े थे, वहीं योगेश कुरील बाराबंकी जीएसटी कार्यालय में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत थे। दोनों अच्छे मित्र थे और अक्सर एक साथ यात्रा पर जाते थे। बृहस्पतिवार शाम करीब 5:30 बजे वह अपने चार अन्य साथियों लखपेड़ाबाग निवासी बाढ़ खंड विभाग में सींचपाल पद पर तैनात नरेंद्र चौधरी, सुभाषनगर मोहल्ले के निवासी वरिष्ठ सहायक महेश कुमार, शहर के ही निवासी च सिंचाई विभाग में सींचपान पद पर तैनात शिवकुमार और इनके एक रिश्तेदार युवक के साथ कैंची धाम के लिए रवाना हुए थे। रात करीब 2:30 बजे पुलिस ने कॉल कर सूचना दी कि शाहजहांपुर में हादसे में विवेक और योगेश की मौके पर ही मौत हो गई।
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सूचना के बाद विवेक की पत्नी और बड़े भाई धर्मानंद तत्काल शाहजहांपुर के लिए रवाना हो गए। शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद जब शुक्रवार देर शाम दोनों के शव आवास विकास कॉलोनी पहुंचे, तो माहौल गमगीन हो गया। शवों को देखकर परिजनों के साथ-साथ आस-पड़ोस के लोग भी फूट-फूट कर रो पड़े। हादसे में घायल तीनों लोगों का इलाज लखनऊ के ट्रामा सेंटर में चल रहा है।
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पत्नी बेसुध, बच्चे गहरे सदमे में
विवेक की शादी करीब 12 साल पहले हुई थी। उनके सात साल का बेटा आर्यन अभी यह समझ भी नहीं पा रहा है कि क्या हो गया है। वहीं योगेश के दो बेटे युवराज और रजत भी गहरे सदमे में हैं। योगेश की पत्नी राजकुमारी को जैसे ही यह खबर मिली, वह बेसुध हो गईं। वह बच्चों से कैसे बताएं कि अब पापा नहीं रहे।

सामाजिक आयोजनों में अग्रणी थे विवेक
विवेक मिश्रा शहर में सामाजिक आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाते थे। चाहे रामलीला हो या भंडारा, हर कार्यक्रम में उनकी सहभागिता रहती थी। यही वजह है कि शहर में उनकी अच्छी खासी पहचान थी। उनके बड़े भाई धर्मानंद इलेक्ट्रॉनिक सामान की दुकान चलाते हैं, जिसमें विवेक भी साथ देते थे।
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