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Barabanki News: मां की हत्या, पिता जेल में...दादा-दादी के सहारे मासूम
Tue, 09 Jun 2026 12:08 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 09 Jun 2026 12:08 AM IST
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बाराबंकी। कैलेंडर में दर्ज आठ जून की तारीख अरुई गांव के दो मासूम भाइयों के लिए शायद जिंदगी भर कभी सामान्य नहीं हो पाएगी। संयोग देखिए कि आठ जून 2018 को उनकी मां संगीता की हत्या हुई थी और आठ जून 2026 को अदालत ने पिता दामोदर और उसकी प्रेमिका मनोरानी उर्फ राधिका को उम्रकैद की सजा सुना दी। पांच साल के लंबे इंतजार के बाद न्याय मिलने के साथ दोनों बच्चे मानो अनाथ हो गए। उनका भविष्य खतरे में है।
दामोदर व संगीता के दो पुत्र आर्यन (8) और विभु (6) है। जब वारदात हुई थी तब दोनों गोद से उतरकर स्कूल जाना सीख रहे थे। इतना ही नहीं दामोदर की प्रेमिका मनोरानी के भी एक बेटा है। ग्रामीण बताते हैं कि बच्चों को लंबे समय तक यह समझ ही नहीं आया कि आखिर उनकी मां उनके पास क्यों नहीं लौट रही।
समय के साथ उन्हें सच्चाई का पता चला, लेकिन तब तक बचपन का एक बड़ा हिस्सा उनसे छिन चुका था। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी सजा उन दो मासूमों को मिली है, जिन्होंने बिना किसी गलती के मां-बाप दोनों का साथ खो दिया। मां अब इस दुनिया में नहीं है और पिता उम्रकैद की सजा काटेगा। फिलहाल दोनों को उनके बुजुर्ग दादा व दादी सहारा दिए हैं।
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घटना के बाद गांव में हुआ था बवाल
आठ जून को संगीता की हत्या के बाद पुलिस ने संदेह के आधार पर दामोदर को भी हिरासत में ले लिया था। नौ जून को पुलिस संगीता के शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए अरुई गांव पहुंची, तो दामोदर के भाई-बहनों समेत कई ग्रामीण आक्रोशित हो गए। पुलिस दामोदर को अपने साथ लेकर गई थी।
इस दौरान दामोदर ने आरोप लगाया कि पुलिस उसकी पिटाई कर रही है, जिससे ग्रामीण उग्र हो गए और पुलिस पर हमला बोल दिया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसके जवाब में ग्रामीणों ने पथराव शुरू कर दिया। इस झड़प में दो थानाध्यक्ष सहित छह पुलिसकर्मी तथा 11 ग्रामीण घायल हो गए थे।
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दामोदर व संगीता के दो पुत्र आर्यन (8) और विभु (6) है। जब वारदात हुई थी तब दोनों गोद से उतरकर स्कूल जाना सीख रहे थे। इतना ही नहीं दामोदर की प्रेमिका मनोरानी के भी एक बेटा है। ग्रामीण बताते हैं कि बच्चों को लंबे समय तक यह समझ ही नहीं आया कि आखिर उनकी मां उनके पास क्यों नहीं लौट रही।
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समय के साथ उन्हें सच्चाई का पता चला, लेकिन तब तक बचपन का एक बड़ा हिस्सा उनसे छिन चुका था। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी सजा उन दो मासूमों को मिली है, जिन्होंने बिना किसी गलती के मां-बाप दोनों का साथ खो दिया। मां अब इस दुनिया में नहीं है और पिता उम्रकैद की सजा काटेगा। फिलहाल दोनों को उनके बुजुर्ग दादा व दादी सहारा दिए हैं।
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घटना के बाद गांव में हुआ था बवाल
आठ जून को संगीता की हत्या के बाद पुलिस ने संदेह के आधार पर दामोदर को भी हिरासत में ले लिया था। नौ जून को पुलिस संगीता के शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए अरुई गांव पहुंची, तो दामोदर के भाई-बहनों समेत कई ग्रामीण आक्रोशित हो गए। पुलिस दामोदर को अपने साथ लेकर गई थी।
इस दौरान दामोदर ने आरोप लगाया कि पुलिस उसकी पिटाई कर रही है, जिससे ग्रामीण उग्र हो गए और पुलिस पर हमला बोल दिया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसके जवाब में ग्रामीणों ने पथराव शुरू कर दिया। इस झड़प में दो थानाध्यक्ष सहित छह पुलिसकर्मी तथा 11 ग्रामीण घायल हो गए थे।