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मंत्री का आदेश बेअसर, तालाबों में नहीं भरवाया गया पानी
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बाराबंकी। प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री का आदेश भी अफसरों के लिए कोई मायने नहीं रखता है। अप्रैल में जिले के दौरे पर आए मंत्री ने गांवों में सूखे पड़े तालाबों में पानी भरवाने के निर्देश दिए थे लेकिन इसके बावजूद ज्यादातर तालाब अभी तक सूखे ही पड़े हुए हैं। इसके चलते भीषण गर्मी में पशु-पक्षियों को भी पेयजल की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
जिले की 1161 ग्राम पंचायतों में करीब 22 हजार तालाब हैं। इनमें बारिश के समय तो पानी रहता है लेकिन इस समय भीषण गर्मी में ज्यादातर तालाब सूखे पड़े हैं। विकास खंड सिरौलीगौसपुर की ग्राम पंचायत किंतूर में लाखों रुपयों की लागत से मनरेगा के तहत खोदवाए गए तालाब पूर्ण रूप से सूख चुके हैं। इससे पशु-पक्षियों के सामने पेयजल संकट गहराता चला जा रहा है। इसी तरह अन्य गांवों में भी तालाब सूखे है।
ब्लॉक क्षेत्र निंदूरा की 88 ग्राम पंचायतों में से किसी भी ग्राम पंचायतों में तालाब में पानी नहीं भरा गया है। सराय शहवाज तालाब की खोदाई में 10 लाख व ग्राम पंचायत बिसाई में तालाब की खोदाई में करीब चार लाख रुपये खर्च किए गए लेकिन किसी में पानी नहीं पहुंचा। इसी तरह दरियाबाद ब्लॉक के कोटवाधाम में भी तालाब सूखे पड़े हैं।
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रामनगर ब्लॉक की ग्राम पंचायत निजामपुर, ग्राम पंचायत जलुहामऊ आदि जगहों पर तालाब सूखे हैं। हैदरगढ़ ब्लॉक के भटगवां, हरख ब्लॉक के रसूलपुर व जैदपुर देहात के तमाम गांवों में भी तालाबों में पानी नहीं भरवाया गया है। यही हाल जिले की ज्यादातर ग्राम पंचायतों का है।
भले ही गांवों में तालाब भरवाने के निर्देश मंत्री ने दिए हों लेकिन पंचायती राज विभाग के मुखिया ऐसे किसी काम में रुचि नहीं लेते है। इसी का नतीजा है कि विभाग के पास यह भी आंकड़ा नहीं है कि कितने तालाब सूखे हैं और कितने में पानी भर गया है। न ही ग्राम प्रधानों को कोई दिशा-निर्देश जारी किया गया है। ऐसे में गांवों में पानी का संकट होना लाजिमी है।
अप्रैल में रसौली में पेयजल परियोजनाओं का उद्घाटन करने आये प्रदेश सरकार के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करके निर्देश दिया था कि 15 मई तक तालाबों में पानी भर दिया जाए। बावजूद इसके तालाब नहीं भरे जा सके हैं जबकि पशु-पक्षी व हर तरह के जीवों के लिए ये तालाब पानी के बड़े स्रोत होते हैं लेकिन पानी न होने से पशु-पक्षी भी परेशान हैं।
जिले में जो तालाब नहरों से कनेक्ट हैं, उनको भरवा दिया गया है। गांवों के तालाब भरवाने के लिए डीपीआरओ को निर्देशित किया गया है। जल्द ही सूखे पडे़ तालाबों में पानी भरवा दिया जाएगा।
-अजय कुमार पांडेय, डीडीओ
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जिले की 1161 ग्राम पंचायतों में करीब 22 हजार तालाब हैं। इनमें बारिश के समय तो पानी रहता है लेकिन इस समय भीषण गर्मी में ज्यादातर तालाब सूखे पड़े हैं। विकास खंड सिरौलीगौसपुर की ग्राम पंचायत किंतूर में लाखों रुपयों की लागत से मनरेगा के तहत खोदवाए गए तालाब पूर्ण रूप से सूख चुके हैं। इससे पशु-पक्षियों के सामने पेयजल संकट गहराता चला जा रहा है। इसी तरह अन्य गांवों में भी तालाब सूखे है।
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ब्लॉक क्षेत्र निंदूरा की 88 ग्राम पंचायतों में से किसी भी ग्राम पंचायतों में तालाब में पानी नहीं भरा गया है। सराय शहवाज तालाब की खोदाई में 10 लाख व ग्राम पंचायत बिसाई में तालाब की खोदाई में करीब चार लाख रुपये खर्च किए गए लेकिन किसी में पानी नहीं पहुंचा। इसी तरह दरियाबाद ब्लॉक के कोटवाधाम में भी तालाब सूखे पड़े हैं।
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रामनगर ब्लॉक की ग्राम पंचायत निजामपुर, ग्राम पंचायत जलुहामऊ आदि जगहों पर तालाब सूखे हैं। हैदरगढ़ ब्लॉक के भटगवां, हरख ब्लॉक के रसूलपुर व जैदपुर देहात के तमाम गांवों में भी तालाबों में पानी नहीं भरवाया गया है। यही हाल जिले की ज्यादातर ग्राम पंचायतों का है।
भले ही गांवों में तालाब भरवाने के निर्देश मंत्री ने दिए हों लेकिन पंचायती राज विभाग के मुखिया ऐसे किसी काम में रुचि नहीं लेते है। इसी का नतीजा है कि विभाग के पास यह भी आंकड़ा नहीं है कि कितने तालाब सूखे हैं और कितने में पानी भर गया है। न ही ग्राम प्रधानों को कोई दिशा-निर्देश जारी किया गया है। ऐसे में गांवों में पानी का संकट होना लाजिमी है।
अप्रैल में रसौली में पेयजल परियोजनाओं का उद्घाटन करने आये प्रदेश सरकार के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करके निर्देश दिया था कि 15 मई तक तालाबों में पानी भर दिया जाए। बावजूद इसके तालाब नहीं भरे जा सके हैं जबकि पशु-पक्षी व हर तरह के जीवों के लिए ये तालाब पानी के बड़े स्रोत होते हैं लेकिन पानी न होने से पशु-पक्षी भी परेशान हैं।
जिले में जो तालाब नहरों से कनेक्ट हैं, उनको भरवा दिया गया है। गांवों के तालाब भरवाने के लिए डीपीआरओ को निर्देशित किया गया है। जल्द ही सूखे पडे़ तालाबों में पानी भरवा दिया जाएगा।
-अजय कुमार पांडेय, डीडीओ