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जीवन डोर टूटने नहीं देती इनके लहू की धार
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Fri, 30 Sep 2016 11:43 PM IST
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blood donation camp in dehradun secretariat
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दर्जनों बार रक्तदान कर अजनबी व दूसरों के लिए मददगार साबित होने वाले जिले के कई किसान, व्यापारी, चिकित्सक व अन्य कर्मचारी राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर लोगों को रक्तदान करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
यह महादानी आपातकाल में जरूरतमंदों की मदद करने में पीछे नहीं हटते हैं। कई लोगों ने अपना नाम पता ब्लड ग्रुप व मोबाइल पैथालॉजी में दर्ज करा रखा जिससे उन्हें सूचना मिल सके और वह अपना खून देकर किसी की जान बचा सकें। किसी के लिए अपना खून देना यह लोग अपना सौभाग्य समझते हुए अनजान की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।
जिले के कई महादानियों ने अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर की सराहना करते हुए लोगों से रक्तदान करने की अपील कर रहे हैं। शनिवार को जिला अस्पताल में अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से आयोजित रक्तदान शिविर में ये सब फिर एक बार रक्तदान कर इतिहास रचेंगे।
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राष्ट्रपति कर चुके सम्मानित, 39 बार कर चुके रक्तदान
वास्थ्य विभाग केफाइलेरिया विभाग में तैनात केके गुप्ता ने अब तक 39 बार रक्तदान कर समाज सेवा में एक नया कीर्तिमान रच दिया है। इस कार्य के लिए उन्हें 5 अप्रैल 2007 में भारत के राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। केके गुप्ता ने बताया कि उन्हें हरियाणा के राज्यपाल एआर किदवई, राजनाथ सिंह, प्रमुख सचिव, स्वास्थ्यमंत्री समेत कई हस्तियों ने सम्मानित कर प्रशस्ति पत्र दिया है।
ताजा वाक्या बताते हुए कहा कि 27 जुलाई को हाईवे के पास सफेदाबाद चौराहे पर एक बाइक सवार हादसे में खून से लतपथ पड़ा था। और मैं एंबुलेंस से एक विभागीय मरीज को लेकर ट्रॉमा सेंटर जा रहा था। उसे एंबुलेंस में लादकर ट्रॉमा पहुंचाकर भर्ती कराया।
खून ज्यादा निकल जाने के कारण डॉक्टरों ने तत्काल खून चढ़ाने को कहा। परिवारीजनों के आने से पहले उसे अपना खून देकर बचाया। युवक निशातगंज गली नंबर तीन रहने वाला मिलेश कुमार था जो आज मुझे अपना बड़ा भाई मानने लगा है।
प्रसव पीड़िता की बचाई जान
कोठी थाना क्षेत्र के ग्राम न्यामतपुर निवासी राघवेद्र शरण अब तक 17 बार रक्तदान कर कई लोगों की जान बचा चुके हैं। राघवेंद्र ने बताया कि एक साल पूर्व लखनऊ के लोहिया अस्पताल में भर्ती प्रसव पीड़िता का आपरेशन होना था परिवार के तीन सदस्यों ने अपना खून दिया उसके बाद भी एक यूनिट की और आवश्यकता पड़ गई। परिवारीजनों ने हमे खून देने के लिए कहा तो अस्पताल जाकर महिला को खून दिया तो आपरेशन शुरु हो सका।
खून देकर बचाई दोस्त की मां की जान
असंद्रा थाना क्षेत्र के टिकरिया चांद के रहने वाले किसान बृजेंद्र कुमार धीमान सर्वदाता हैं। वह 42 साल की उम्र में अब तक 18 बार रक्तदान कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि कई उनके साथी जरगवां निवासी सर्वेश की माता का एक्सीडेंट में घायल हो गई थी। सर्वेश उस समय अपना खून देने में असमर्थ था। जिला अस्पताल जाकर ब्लड देकर उनकी जान बचाई उस दिन से हर जरूरतमंद की मदद करने में वह पीछे नहीं हटते हैं।
पीजीआई में कैंसर पीड़ित के लिए किया रक्तदान
अपनों के लिए रक्तदान करने से शुरुआत कर नियमित रक्तदाता बने पूरेतोड़ी मजरे कस्बा थाना असंद्रा निवासी परीदीन रावत सबसे पहले अपने परिवार के सदस्य के लिए रक्तदान किया था। किसी की जान बचाने में जो शकून महशूश हुआ उसी पल ने परीदीन को नियमित रक्तदाता बन गए। 16 बार स्वैच्छिक रक्तदान से लोगों की जान बचा चुके हैं। उन्होंने बताया कि एक साल पूर्व वह पीजीआई में एक मरीज को देखने गए थे। वहीं पर एक जान पहचान वाले मिले जो खून के लिए इधर-उधर भटक रहे थे। मरीज के स्वस्थ होने की सांत्वना दिलाते हुए उसके लिए रक्तदान किया।
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यह महादानी आपातकाल में जरूरतमंदों की मदद करने में पीछे नहीं हटते हैं। कई लोगों ने अपना नाम पता ब्लड ग्रुप व मोबाइल पैथालॉजी में दर्ज करा रखा जिससे उन्हें सूचना मिल सके और वह अपना खून देकर किसी की जान बचा सकें। किसी के लिए अपना खून देना यह लोग अपना सौभाग्य समझते हुए अनजान की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।
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जिले के कई महादानियों ने अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर की सराहना करते हुए लोगों से रक्तदान करने की अपील कर रहे हैं। शनिवार को जिला अस्पताल में अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से आयोजित रक्तदान शिविर में ये सब फिर एक बार रक्तदान कर इतिहास रचेंगे।
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राष्ट्रपति कर चुके सम्मानित, 39 बार कर चुके रक्तदान
वास्थ्य विभाग केफाइलेरिया विभाग में तैनात केके गुप्ता ने अब तक 39 बार रक्तदान कर समाज सेवा में एक नया कीर्तिमान रच दिया है। इस कार्य के लिए उन्हें 5 अप्रैल 2007 में भारत के राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। केके गुप्ता ने बताया कि उन्हें हरियाणा के राज्यपाल एआर किदवई, राजनाथ सिंह, प्रमुख सचिव, स्वास्थ्यमंत्री समेत कई हस्तियों ने सम्मानित कर प्रशस्ति पत्र दिया है।
ताजा वाक्या बताते हुए कहा कि 27 जुलाई को हाईवे के पास सफेदाबाद चौराहे पर एक बाइक सवार हादसे में खून से लतपथ पड़ा था। और मैं एंबुलेंस से एक विभागीय मरीज को लेकर ट्रॉमा सेंटर जा रहा था। उसे एंबुलेंस में लादकर ट्रॉमा पहुंचाकर भर्ती कराया।
खून ज्यादा निकल जाने के कारण डॉक्टरों ने तत्काल खून चढ़ाने को कहा। परिवारीजनों के आने से पहले उसे अपना खून देकर बचाया। युवक निशातगंज गली नंबर तीन रहने वाला मिलेश कुमार था जो आज मुझे अपना बड़ा भाई मानने लगा है।
प्रसव पीड़िता की बचाई जान
कोठी थाना क्षेत्र के ग्राम न्यामतपुर निवासी राघवेद्र शरण अब तक 17 बार रक्तदान कर कई लोगों की जान बचा चुके हैं। राघवेंद्र ने बताया कि एक साल पूर्व लखनऊ के लोहिया अस्पताल में भर्ती प्रसव पीड़िता का आपरेशन होना था परिवार के तीन सदस्यों ने अपना खून दिया उसके बाद भी एक यूनिट की और आवश्यकता पड़ गई। परिवारीजनों ने हमे खून देने के लिए कहा तो अस्पताल जाकर महिला को खून दिया तो आपरेशन शुरु हो सका।
खून देकर बचाई दोस्त की मां की जान
असंद्रा थाना क्षेत्र के टिकरिया चांद के रहने वाले किसान बृजेंद्र कुमार धीमान सर्वदाता हैं। वह 42 साल की उम्र में अब तक 18 बार रक्तदान कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि कई उनके साथी जरगवां निवासी सर्वेश की माता का एक्सीडेंट में घायल हो गई थी। सर्वेश उस समय अपना खून देने में असमर्थ था। जिला अस्पताल जाकर ब्लड देकर उनकी जान बचाई उस दिन से हर जरूरतमंद की मदद करने में वह पीछे नहीं हटते हैं।
पीजीआई में कैंसर पीड़ित के लिए किया रक्तदान
अपनों के लिए रक्तदान करने से शुरुआत कर नियमित रक्तदाता बने पूरेतोड़ी मजरे कस्बा थाना असंद्रा निवासी परीदीन रावत सबसे पहले अपने परिवार के सदस्य के लिए रक्तदान किया था। किसी की जान बचाने में जो शकून महशूश हुआ उसी पल ने परीदीन को नियमित रक्तदाता बन गए। 16 बार स्वैच्छिक रक्तदान से लोगों की जान बचा चुके हैं। उन्होंने बताया कि एक साल पूर्व वह पीजीआई में एक मरीज को देखने गए थे। वहीं पर एक जान पहचान वाले मिले जो खून के लिए इधर-उधर भटक रहे थे। मरीज के स्वस्थ होने की सांत्वना दिलाते हुए उसके लिए रक्तदान किया।