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57 दिन की लुकाछिपी के बाद पिंजरे में कैद हुआ तेंदुआ
बाराबंकी
Updated Sun, 13 Aug 2017 11:33 PM IST
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बाराबंकी में रविवार को शुगर मिल के पास पिंजरे में बंद तेंदुआ
- फोटो : अमर उजाला
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57 दिनों तक शहर के आसपास लोगों की रात की नींद उड़ा रखने वाला तेंदुआ आखिरकार शिकार के चक्कर में शनिवार रात शुगर मिल जंगल में रखे पिंजरे में कैद हो गया। रविवार की सुबह पिंजरे में कैद तेंदुए की दहाड़ सुनकर वहां पहुंचे एक चौकीदार ने भागकर इसकी सूचना आसपास के लोगों को दी। तेंदुआ कैद होने की खबर फैलते ही देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो गई। बंद शुगर मिल के सुपरवाइजर ने सूचना वन विभाग को दी। जिस पर पहुंची टीम ने तेंदुए को लखनऊ के चिड़ियाघर भेज दिया।
17 जून की रात जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के नेबलेट फार्म की जमीन का समतलीकरण कर रहे ट्रैक्टर चालक ने सबसे पहले तेंदुआ देखा और इसकी सूचना पुलिस व वन विभाग की टीम को दी। दूसरे दिन वन विभाग की टीम ने पगचिह्न के निशान की जांच कर जंगली जानवर होने का दावा किया।
14 जुलाई को शुगर मिल जंगल में सुपरवाइजर रामनरेश ने तेंदुआ देखने की जानकारी फिर वन विभाग को दी थी। 16 जुलाई को तुलाराम ने जेल कॉलोनी की ओर जाते देखे जाने का दावा किया था। टीम को जो पगचिह्न मिले उससे टीम तेंदुआ के न होने बल्कि किसी जंगली जानवर के होने का दावा करती रही।
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ग्रामीणों के दबाव के चलते वन विभाग के अधिकारी पिंजरा रखकर कांबिंग की, पर तेंदुआ का कहीं पता नहीं चला। इस बीच तेंदुआ को पकड़ने के लिए वन विभाग ने जंगल में पिंजरा रखकर बकरी बांधी थी। शुक्रवार को रामनरेश ने फिर तेंदुआ देखने का दावा किया, जिस पर वन विभाग की टीम ने जहां तेंदुआ देखे जाने की बात कही थी वहां पर पिंजरा रखकर बकरा बांध दिया।
शनिवार देर रात करीब दो बजे पिंजरा का गेट गिरने की आवाज सुनाई पड़ी, पर रात होने से वहां कोई नहीं गया। सुबह तीन लोगों के साथ जाकर रामनरेश ने पिंजरा देखा तो उसमें तेंदुआ था। इसकी सूचना डीएम को दी गई। इसके बाद डीएफओ जावेद अख्तर व लखनऊ के एक्सपर्ट डॉ. विजेंद्र यादव, कीपर मतीन व महेश वर्मा ने नर तेंदुआ बताया। रेस्क्यू टीम उसे पिंजरे में डालकर चिड़ियाघर लखनऊ ले गई।
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17 जून की रात जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के नेबलेट फार्म की जमीन का समतलीकरण कर रहे ट्रैक्टर चालक ने सबसे पहले तेंदुआ देखा और इसकी सूचना पुलिस व वन विभाग की टीम को दी। दूसरे दिन वन विभाग की टीम ने पगचिह्न के निशान की जांच कर जंगली जानवर होने का दावा किया।
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14 जुलाई को शुगर मिल जंगल में सुपरवाइजर रामनरेश ने तेंदुआ देखने की जानकारी फिर वन विभाग को दी थी। 16 जुलाई को तुलाराम ने जेल कॉलोनी की ओर जाते देखे जाने का दावा किया था। टीम को जो पगचिह्न मिले उससे टीम तेंदुआ के न होने बल्कि किसी जंगली जानवर के होने का दावा करती रही।
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ग्रामीणों के दबाव के चलते वन विभाग के अधिकारी पिंजरा रखकर कांबिंग की, पर तेंदुआ का कहीं पता नहीं चला। इस बीच तेंदुआ को पकड़ने के लिए वन विभाग ने जंगल में पिंजरा रखकर बकरी बांधी थी। शुक्रवार को रामनरेश ने फिर तेंदुआ देखने का दावा किया, जिस पर वन विभाग की टीम ने जहां तेंदुआ देखे जाने की बात कही थी वहां पर पिंजरा रखकर बकरा बांध दिया।
शनिवार देर रात करीब दो बजे पिंजरा का गेट गिरने की आवाज सुनाई पड़ी, पर रात होने से वहां कोई नहीं गया। सुबह तीन लोगों के साथ जाकर रामनरेश ने पिंजरा देखा तो उसमें तेंदुआ था। इसकी सूचना डीएम को दी गई। इसके बाद डीएफओ जावेद अख्तर व लखनऊ के एक्सपर्ट डॉ. विजेंद्र यादव, कीपर मतीन व महेश वर्मा ने नर तेंदुआ बताया। रेस्क्यू टीम उसे पिंजरे में डालकर चिड़ियाघर लखनऊ ले गई।