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जिले का साहित्य, इतिहास सहेजना गौरवपूर्ण
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बाराबंकी। देश का इतिहास तटस्थ नहीं लिखा गया है, यह जिम्मेदारी शासन, सत्ता, साहित्यकारों को मिलकर पूरी करनी होगी और एक तटस्थ इतिहास लिखना होगा। यह बात गुरुवार को पूर्वज साहित्यकार जन्म भूमि दर्शन यात्रा के दूसरे चरण का हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ करते हुए सांसद उपेंद्र सिंह रावत ने कही। कहा कि यात्रा के संयोजक पंकज कंवल व अध्यक्ष प्रदीप सारंग के नेतृत्व में जनपद का साहित्य इतिहास सहेजा जाना गौरवपूर्ण है।
यात्रा प्रथम पड़ाव कबीरमठ मुंजापुर मसौली पहुंची। यहां पर महंत निष्ठा साहब की अध्यक्षता में एक संगोष्ठी हुई। जिसमें कबीर साहित्य को अवधी और हिंदी को समृद्ध बनाने वाला कहा गया। यात्रा दल के सदस्यों ने गुरु प्रसाद सिंह को नमन किया। यात्रा दल के रामनगर तहसील पहुंचने पर तहसील प्रशासन द्वारा स्वागत किया गया।
तहसील सभागार में तहसीलदार सुरेंद्र कुमार की अध्यक्षता में काव्य गोष्ठी हुई। इसके बाद यात्रा दल द्वारा बाबा जगजीवन दास की जन्मभूमि सरदहा, कोटवाधाम, महंत दुलारेदास की जन्मभूमि कमोली धाम आदि अन्य कवियों की जन्मभूमि पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यात्रा दल में डॉ. राम बहादुर मिश्र, डॉ. श्याम सुंदर दीक्षित, अजय सिंह गुरुजी, प्रदीप सारंग, पुष्पेंद्र, विष्णु शर्मा समेत कई शामिल रहे। उधर, कोटवाधाम में श्री कोटवाधाम के समर्थ साहेब जगजीवन दास बड़े बाबा के वंशज महंत नीलेन्द्र बक्श दास नीरज भैय्या ने बृहस्पतिवार को पूर्वज साहित्यकार जन्मभूमि दर्शन यात्रा का स्वागत किया।
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यात्रा कोटवाधाम में कवि प्रेमनारायण वर्मा के आवास पर पर रुकी। साहित्यकार अजय सिंह गुरु ने कहा कि बाबा जगजीवन दास जगन्नाथपुरी के औतार है। उन्होंने औरंगजेब की हुकुमत को सत्य के पथ से शिकस्त दी थी। देवा-महादेवा तो धार्मिक स्थल है, कोटवाधाम एक पंथ एक समाज को चलाने वाला स्थान है। ऐसे स्थान के दर्शन मात्र से सभी पाप धुल जाते हैं। उन्होंने कहा कि रामबहादुर मिश्रा 22 देशों में हिंदी साहित्य का प्रचार-प्रसार कर चुके है। मौके पर प्रदीप सारंग, पंकज कॅवल, डा. कुमार पुष्पेन्द्र, मंयक बाजपेई, बहोरी प्रसाद शुक्ला उपस्थित रहे।
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यात्रा प्रथम पड़ाव कबीरमठ मुंजापुर मसौली पहुंची। यहां पर महंत निष्ठा साहब की अध्यक्षता में एक संगोष्ठी हुई। जिसमें कबीर साहित्य को अवधी और हिंदी को समृद्ध बनाने वाला कहा गया। यात्रा दल के सदस्यों ने गुरु प्रसाद सिंह को नमन किया। यात्रा दल के रामनगर तहसील पहुंचने पर तहसील प्रशासन द्वारा स्वागत किया गया।
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तहसील सभागार में तहसीलदार सुरेंद्र कुमार की अध्यक्षता में काव्य गोष्ठी हुई। इसके बाद यात्रा दल द्वारा बाबा जगजीवन दास की जन्मभूमि सरदहा, कोटवाधाम, महंत दुलारेदास की जन्मभूमि कमोली धाम आदि अन्य कवियों की जन्मभूमि पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यात्रा दल में डॉ. राम बहादुर मिश्र, डॉ. श्याम सुंदर दीक्षित, अजय सिंह गुरुजी, प्रदीप सारंग, पुष्पेंद्र, विष्णु शर्मा समेत कई शामिल रहे। उधर, कोटवाधाम में श्री कोटवाधाम के समर्थ साहेब जगजीवन दास बड़े बाबा के वंशज महंत नीलेन्द्र बक्श दास नीरज भैय्या ने बृहस्पतिवार को पूर्वज साहित्यकार जन्मभूमि दर्शन यात्रा का स्वागत किया।
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यात्रा कोटवाधाम में कवि प्रेमनारायण वर्मा के आवास पर पर रुकी। साहित्यकार अजय सिंह गुरु ने कहा कि बाबा जगजीवन दास जगन्नाथपुरी के औतार है। उन्होंने औरंगजेब की हुकुमत को सत्य के पथ से शिकस्त दी थी। देवा-महादेवा तो धार्मिक स्थल है, कोटवाधाम एक पंथ एक समाज को चलाने वाला स्थान है। ऐसे स्थान के दर्शन मात्र से सभी पाप धुल जाते हैं। उन्होंने कहा कि रामबहादुर मिश्रा 22 देशों में हिंदी साहित्य का प्रचार-प्रसार कर चुके है। मौके पर प्रदीप सारंग, पंकज कॅवल, डा. कुमार पुष्पेन्द्र, मंयक बाजपेई, बहोरी प्रसाद शुक्ला उपस्थित रहे।