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बदले मौसम से किसान चिंतित
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 09 Jan 2016 11:25 PM IST
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बदले मौसम ने किसानों की रातों की नींद उडा दी है। ठंड न पड़ने से किसान परेशान हैं क्योंकि मौसम का असर फसलों के उत्पादन पर पड़ता है। जानकार बताते हैं कि ऐसे मौसम से न सिर्फ पैदावार बल्कि फसलों में रोग लगने की भी आशंका है।
जिले में किसानों ने इस बार 1 लाख 63 हजार 878 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं, 16 हजार 500 हेक्टेयर पर आलू, 31 हजार हेक्टेयर पर सरसों, 3570 हेक्टेयर भूमि पर मटर और 817 हेक्टेयर भूमि पर चना की बोआई की है।
पिछले कुछ दिनों में बदले मौसम ने किसानों की नींद उड़ा दी है। वे मानते हैं कि अगर ठंड न पड़ी तो इसका असर फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा। गेहूं में जल्दी बालियां निकल आएगी और आलू की उपज भी प्रभावित होगी। कृषि विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि मौसम में आया बदलाव किसानों के लिए ठीक नहीं है। क्योंकि इसका असर फसलों के उत्पादन पर पड़ना तय है। जिले का किसान भी इसको लेकर खासा परेशान है।
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हांसेमऊ के किसान दिनेश कुमार, अजय और रामकेश ने बताया कि पहले इस समय कड़ाके ठंड पड़ती थी। जिसका सबसे ज्यादा फायदा गेहूं और मटर को होता था। लेकिन इस साल तापमान बढ़ने से फसलों का विकास नहीं हो पा रहा है।
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जिले में किसानों ने इस बार 1 लाख 63 हजार 878 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं, 16 हजार 500 हेक्टेयर पर आलू, 31 हजार हेक्टेयर पर सरसों, 3570 हेक्टेयर भूमि पर मटर और 817 हेक्टेयर भूमि पर चना की बोआई की है।
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पिछले कुछ दिनों में बदले मौसम ने किसानों की नींद उड़ा दी है। वे मानते हैं कि अगर ठंड न पड़ी तो इसका असर फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा। गेहूं में जल्दी बालियां निकल आएगी और आलू की उपज भी प्रभावित होगी। कृषि विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि मौसम में आया बदलाव किसानों के लिए ठीक नहीं है। क्योंकि इसका असर फसलों के उत्पादन पर पड़ना तय है। जिले का किसान भी इसको लेकर खासा परेशान है।
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हांसेमऊ के किसान दिनेश कुमार, अजय और रामकेश ने बताया कि पहले इस समय कड़ाके ठंड पड़ती थी। जिसका सबसे ज्यादा फायदा गेहूं और मटर को होता था। लेकिन इस साल तापमान बढ़ने से फसलों का विकास नहीं हो पा रहा है।