{"_id":"6158acea8ebc3e0bc5795fcb","slug":"hospital-barabanki-news-lko5983369175","type":"story","status":"publish","title_hn":"अवैध अस्पतालों पर विभाग मेहरबान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अवैध अस्पतालों पर विभाग मेहरबान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाराबंकी। लाइसेंस का नवीनीकरण कराए बिना ही अस्पतालों का संचालन करने वालों पर विभाग पूरी तरह से मेहरबान है। निर्धारित अवधि के बीत जाने के बाद भी 50 से ज्यादा अस्पताल संचालक ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक अपने लाइसेंसों का नवीनीकरण तक नहीं कराया है इसके बावजूद मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि विभाग को इस बात की जानकारी नहीं है। जानकारी होने के बाद भी ऐसे अस्पताल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने का साहस विभाग नहीं जुटा पा रहा है।
जिले में पंजीकृत अस्पतालों की संख्या सवा सौ के आसपास है। इनमें से अभी तक 50 से ज्यादा अस्पताल संचालक ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक अपने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया है। यहीं नहीं शहर में पल्हरी चौराहा, नाका सतरिख, बड़ेल चौराहा, सिविल लाइन रोड आदि स्थानों पर एक दर्जन से ज्यादा अस्पताल बिना लाइसेंस का नवीनीकरण कराए ही चल रहे हैं।
बताते हैं कि इनके संचालकों को विभाग के ही अधिकारियों का खुला संरक्षण प्राप्त है। यही कारण है कि यहां पर मरीजों को भर्ती कर उपचार भी किया जा रहा है और आरोप है कि इन मरीजों से इलाज के नाम पर मोटी रकम भी वसूल की जा रही है। इसको लेकर कई बार शिकायतें भी हुईं लेकिन जांच के नाम पर महज नोटिस जारी कर औपचारिकता निभा ली गई। जिससे अस्पताल संचालकों के हौसले खासे बुलंद हैं लेकिन विभाग ऐसे अस्पताल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने का साहस तक नहीं जुटा पा रहा है।
विज्ञापन
जिन अस्पताल संचालकों ने अभी तक अपने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया है उनके खिलाफ नोडल अधिकारी को जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर इनके खिलाफ आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
-डॉ. रामजी वर्मा, सीएमओ
विज्ञापन
जिले में पंजीकृत अस्पतालों की संख्या सवा सौ के आसपास है। इनमें से अभी तक 50 से ज्यादा अस्पताल संचालक ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक अपने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया है। यहीं नहीं शहर में पल्हरी चौराहा, नाका सतरिख, बड़ेल चौराहा, सिविल लाइन रोड आदि स्थानों पर एक दर्जन से ज्यादा अस्पताल बिना लाइसेंस का नवीनीकरण कराए ही चल रहे हैं।
विज्ञापन
बताते हैं कि इनके संचालकों को विभाग के ही अधिकारियों का खुला संरक्षण प्राप्त है। यही कारण है कि यहां पर मरीजों को भर्ती कर उपचार भी किया जा रहा है और आरोप है कि इन मरीजों से इलाज के नाम पर मोटी रकम भी वसूल की जा रही है। इसको लेकर कई बार शिकायतें भी हुईं लेकिन जांच के नाम पर महज नोटिस जारी कर औपचारिकता निभा ली गई। जिससे अस्पताल संचालकों के हौसले खासे बुलंद हैं लेकिन विभाग ऐसे अस्पताल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने का साहस तक नहीं जुटा पा रहा है।
विज्ञापन
जिन अस्पताल संचालकों ने अभी तक अपने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया है उनके खिलाफ नोडल अधिकारी को जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर इनके खिलाफ आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
-डॉ. रामजी वर्मा, सीएमओ