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स्वास्थ्य सुविधाओं का अजब खेल, ट्रांसफार्मर फुंका, जेनरेटर फेल
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बाराबंकी। जिला अस्पताल का ट्रांसफार्मर फुंकने और जनरेटर फेल होने से सोमवार को इलाज के लिए आए मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस दौरान कई प्रकार की जांचें आदि न होने से लोग निजी पैथालॉजियों के चक्कर काटते नजर आए। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि दोपहर बाद जनरेटर सही हो गया था लेकिन ट्रांसफार्मर देर शाम तक नहीं बदला जा सका था। जेनरेटर के सहारे वार्डोँ को बिजली की आपूर्ति की गई।
जिला अस्पताल की ओपीडी में सोमवार को मरीजों की भारी भीड़ देखने को मिली। विभाग की माने तो इस दौरान करीब 1615 मरीजों ने पंजीकरण कराया। इनमें सबसे ज्यादा मरीजों की संख्या वायरल और बुखार से पीड़ितों की रही। लेकिन सुबह ओपीडी शुरू होती इससे पहले ही अस्पताल में रखा ट्रांसफार्मर फुंक गया और अस्पताल में लगा जेनरेटर भी दगा दे गया।
इसी दशा में अस्पताल में आए मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ओपीडी में भीड़ इतनी ज्यादा थी कि चिकित्सकों के कक्षों के बाहर मरीजों की लंबी लाइनें लगी हुई थी लेकिन बिजली न होने के कारण सभी पसीने-पसीने थे। इस दौरान चिकित्सकों द्वारा मरीजों को लिखी गई एक्सरे, ब्लड आदि की जांचें नहीं हो सकी जिससे मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा।
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लोगों की इस मजबूरी का फायदा निजी पैथालॉजी संचालकों ने खूब उठाया और जांच के नाम पर मरीजों के तीमारदारों से मोटी रकम वसूल की गई। हालांकि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि दोपहर एक बजे के बाद जनरेटर सही कर लिया गया था और जांच आदि का कार्य भी शुरू करा दिया गया था। मगर तब तक ज्यादातर मरीज जांच कराने के लिए अस्पताल से निजी पैथालॉजी के लिए जा चुके थे।
जिला अस्पताल का ट्रांसफार्मर फुंकने और जेनरेटर न चलने की वजह से करीब तीन घंटे तक दिक्कत रही। इसके बाद जनरेटर को सही करा लिया गया था जिसके माध्यम से आपूर्ति की गई। सोमवार को वैसे भी मरीजों की संख्या ज्यादा रहती है। इसके बावजूद चिकित्सकों ने मरीजों को देख और दवाएं दी गई।
-बीके सिंह, सीएमएस
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जिला अस्पताल की ओपीडी में सोमवार को मरीजों की भारी भीड़ देखने को मिली। विभाग की माने तो इस दौरान करीब 1615 मरीजों ने पंजीकरण कराया। इनमें सबसे ज्यादा मरीजों की संख्या वायरल और बुखार से पीड़ितों की रही। लेकिन सुबह ओपीडी शुरू होती इससे पहले ही अस्पताल में रखा ट्रांसफार्मर फुंक गया और अस्पताल में लगा जेनरेटर भी दगा दे गया।
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इसी दशा में अस्पताल में आए मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ओपीडी में भीड़ इतनी ज्यादा थी कि चिकित्सकों के कक्षों के बाहर मरीजों की लंबी लाइनें लगी हुई थी लेकिन बिजली न होने के कारण सभी पसीने-पसीने थे। इस दौरान चिकित्सकों द्वारा मरीजों को लिखी गई एक्सरे, ब्लड आदि की जांचें नहीं हो सकी जिससे मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा।
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लोगों की इस मजबूरी का फायदा निजी पैथालॉजी संचालकों ने खूब उठाया और जांच के नाम पर मरीजों के तीमारदारों से मोटी रकम वसूल की गई। हालांकि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि दोपहर एक बजे के बाद जनरेटर सही कर लिया गया था और जांच आदि का कार्य भी शुरू करा दिया गया था। मगर तब तक ज्यादातर मरीज जांच कराने के लिए अस्पताल से निजी पैथालॉजी के लिए जा चुके थे।
जिला अस्पताल का ट्रांसफार्मर फुंकने और जेनरेटर न चलने की वजह से करीब तीन घंटे तक दिक्कत रही। इसके बाद जनरेटर को सही करा लिया गया था जिसके माध्यम से आपूर्ति की गई। सोमवार को वैसे भी मरीजों की संख्या ज्यादा रहती है। इसके बावजूद चिकित्सकों ने मरीजों को देख और दवाएं दी गई।
-बीके सिंह, सीएमएस