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बारिश का कहर, बदहाल हुआ गांव और शहर
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बाराबंकी। पिछले 24 घंटे के भीतर बादल आफत बनकर बरसे। मूसलाधार बारिश का कहर ऐसा कि पूरा जनजीवन प्रभावित हो गया। जिधर देखो उधर सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है। घर से लेकर दफ्तर और गांव से लेकर शहर, हर तरफ जलजमाव ही नजर आ रहा है।
बारिश के साथ तेज हवा से दर्जनों स्थानों पर पेड़ गिर गए, दीवारें व छतें ढह गईं तो सड़क किनारे बिजली के खंभे और पेड़ गिरने से बिजली आपूर्ति के साथ जलापूर्ति चरमरा गई। घरों में घुसा पानी ने लोगों को गृहस्थी बटोरने का मौका तक नहीं दिया। शहर के कई मोहल्लों में तो बाढ़ सरीखे हालत दिखे।
सब्जी से लेकर सभी फसलों के लिए भी बारिश फायदा नहीं बल्कि भारी नुकसान बनकर बरसी। खासकर सब्जी, दलहनी फसलें बर्बाद हुईं। सरसों की बुआई पिछड़ेगी तो धान की फसल गिरने के कारण भारी नुकसान होना है। एक दिन में 233 मिमी. बारिश रिकॉर्ड की गई हैं। मौसम विभाग ने अगले दो दिन और बारिश के संकेत दिए हैं। ऐसे में जनजीवन पटरी पर जल्दी वापस लौटने के आसार कम हैं। बिजली पानी के संकट से स्थिति और गहरा गई है।
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बुधवार की रात से शुरू हुई बारिश धीरे-धीरे बढ़ती ही गई। बीती रात और दिन में लगातार घंटों तक हुई बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। हालात यह हुए कि घर से बाहर और सड़कों पर जिधर देखो चारों तरह सिर्फ पानी ही पानी था।
सरकारी दफ्तर हो या अस्पताल, शहर के वीआईपी मोहल्ले हों या अन्य स्थान, कस्बे हों या गांव सभी जगह बारिश की आफत से लोगों का रहना-खाना दूभर हो गया। शहर के कैलाश आश्रम, दशहराबाग, पीरबटावन नई बस्ती, हजाराबाग खलरिया, बड़ेल आदि मोहल्लों में जहां सैकड़ों घरों में पानी घुसा वहीं सड़कों पर जलभराव के कारण चलना मुश्किल हो गया।
डीआईओ ऑफिस, जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, रजिस्ट्री कार्यालय, बीआरसी बड़ेल में दफ्तरों के भीतर तक पानी भर गया। वहीं माती पुलिस चौकी की दीवार ढह गई। गनीमत रही कि कोई हानि नहीं हुई। इसी तरह देवा के टेराखुर्द, शेषपुर, दरियाबाद के अमनियापुर, कोटवासड़क के छंदवल, त्रिवेदीगंज के मोहम्मदपुर व देवीपुर व फतेहपुर के सायपुर, निंदूरा क्षेत्र के रामनगर गांव में छत, छप्पर और दीवार गिरने से लोगों का भारी नुकसान हुआ और कुछ घायल भी हुए।
आधे जिले में शुक्रवार की देर रात तक बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई थी और बिजली की आवाजाही जारी थी। ईओ नगर पालिका पवन कुमार ने बताया कि शहर के हजाराबाग खलरिया मोहल्ले में पानी ज्यादा था। पंप लगाकर पानी निकाला जा रहा है। अन्य जगहों पर पानी अपने आप निकल रहा है।
पल्हरी कृषि फार्म में घुसा पानी
बाराबंकी। कृषि विभाग का राजकीय पल्हरी फार्म है। बारिश के बीच शुक्रवार की सुबह उफनाई बड़ेल रजबहा कटने से पूरा फार्म डूब गया। पानी फार्म पर बने सरकारी गोदाम में घुसने लगा तब इसकी सूचना कृषि फॉर्म के कर्मचारियों ने अधिकारियों को दी। इस पर जिला कृषि अधिकारी ने सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता को सूचना देने के साथ नहर कटने की लोकेशन उपलब्ध कराई।
उन्होंने अधिकारियों को बताया कि अगर, समय रहते कटी हुई नहर को बांधकर पानी का बहाव नहीं रोका गया तो गोदाम में रखा करीब दो हजार क्विंटल गेहूं व तीन सौ क्विंटल चना का बीज भीगने से बर्बाद हो जाएगा। इस पर सिंचाई विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मौके पर पहुंचे और कटी नहर को बंधवाया। तब जाकर गेहूं का बीज अन्यत्र शिफ्ट करने बाद राहत की सास ली।
खेती को हुआ भारी नुकसान
बाराबंकी। काफी समय से सिंचाई के परेशान किसानों के लिए बादल आफत बनकर बरसे। 36 घंटे से अधिक समय से हो रही बारिश से खेती को फायदा कम नुकसान ज्यादा हुआ है। इसको लेकर किसान परेशान हैं। तेज हवा के साथ हुई बारिश से बासमती और लालमती जैसे धान की लहलहाती फसलें खेतों में चटाई बनकर बिछ गई हैं। वहीं जिन फसलों में फूल निकल रहे थे वह भी बर्बाद हो गई।
इतना ही नहीं जलभराव के चलते खेतों में बोई गई ज्वार, बाजरा, उरद, तिल व मक्के की फसल को पानी में डूबा देख किसान परेशान है। जलभराव से सबसे अधिक सब्जी की फसलें प्रभावित हुई हैं। तेज हवा के बीच हुई बारिश से केले की फसल भी काफी प्रभावित हुई है।
जिला कृषि अधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि धान की अगेती फसलों के साथ मक्का ज्वार, बाजरा, तिल व उरद की फसलों को नुकसान है। वहीं सरसों की बुआई भी प्रभावित होगी। अन्य फसलों के नुकसान की सूचना किसान बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर- 18008896868 पर दर्ज करा दें। ताकि उन्हें फसल बीमा का लाभ मिल सके।
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बारिश के साथ तेज हवा से दर्जनों स्थानों पर पेड़ गिर गए, दीवारें व छतें ढह गईं तो सड़क किनारे बिजली के खंभे और पेड़ गिरने से बिजली आपूर्ति के साथ जलापूर्ति चरमरा गई। घरों में घुसा पानी ने लोगों को गृहस्थी बटोरने का मौका तक नहीं दिया। शहर के कई मोहल्लों में तो बाढ़ सरीखे हालत दिखे।
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सब्जी से लेकर सभी फसलों के लिए भी बारिश फायदा नहीं बल्कि भारी नुकसान बनकर बरसी। खासकर सब्जी, दलहनी फसलें बर्बाद हुईं। सरसों की बुआई पिछड़ेगी तो धान की फसल गिरने के कारण भारी नुकसान होना है। एक दिन में 233 मिमी. बारिश रिकॉर्ड की गई हैं। मौसम विभाग ने अगले दो दिन और बारिश के संकेत दिए हैं। ऐसे में जनजीवन पटरी पर जल्दी वापस लौटने के आसार कम हैं। बिजली पानी के संकट से स्थिति और गहरा गई है।
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बुधवार की रात से शुरू हुई बारिश धीरे-धीरे बढ़ती ही गई। बीती रात और दिन में लगातार घंटों तक हुई बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। हालात यह हुए कि घर से बाहर और सड़कों पर जिधर देखो चारों तरह सिर्फ पानी ही पानी था।
सरकारी दफ्तर हो या अस्पताल, शहर के वीआईपी मोहल्ले हों या अन्य स्थान, कस्बे हों या गांव सभी जगह बारिश की आफत से लोगों का रहना-खाना दूभर हो गया। शहर के कैलाश आश्रम, दशहराबाग, पीरबटावन नई बस्ती, हजाराबाग खलरिया, बड़ेल आदि मोहल्लों में जहां सैकड़ों घरों में पानी घुसा वहीं सड़कों पर जलभराव के कारण चलना मुश्किल हो गया।
डीआईओ ऑफिस, जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, रजिस्ट्री कार्यालय, बीआरसी बड़ेल में दफ्तरों के भीतर तक पानी भर गया। वहीं माती पुलिस चौकी की दीवार ढह गई। गनीमत रही कि कोई हानि नहीं हुई। इसी तरह देवा के टेराखुर्द, शेषपुर, दरियाबाद के अमनियापुर, कोटवासड़क के छंदवल, त्रिवेदीगंज के मोहम्मदपुर व देवीपुर व फतेहपुर के सायपुर, निंदूरा क्षेत्र के रामनगर गांव में छत, छप्पर और दीवार गिरने से लोगों का भारी नुकसान हुआ और कुछ घायल भी हुए।
आधे जिले में शुक्रवार की देर रात तक बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई थी और बिजली की आवाजाही जारी थी। ईओ नगर पालिका पवन कुमार ने बताया कि शहर के हजाराबाग खलरिया मोहल्ले में पानी ज्यादा था। पंप लगाकर पानी निकाला जा रहा है। अन्य जगहों पर पानी अपने आप निकल रहा है।
पल्हरी कृषि फार्म में घुसा पानी
बाराबंकी। कृषि विभाग का राजकीय पल्हरी फार्म है। बारिश के बीच शुक्रवार की सुबह उफनाई बड़ेल रजबहा कटने से पूरा फार्म डूब गया। पानी फार्म पर बने सरकारी गोदाम में घुसने लगा तब इसकी सूचना कृषि फॉर्म के कर्मचारियों ने अधिकारियों को दी। इस पर जिला कृषि अधिकारी ने सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता को सूचना देने के साथ नहर कटने की लोकेशन उपलब्ध कराई।
उन्होंने अधिकारियों को बताया कि अगर, समय रहते कटी हुई नहर को बांधकर पानी का बहाव नहीं रोका गया तो गोदाम में रखा करीब दो हजार क्विंटल गेहूं व तीन सौ क्विंटल चना का बीज भीगने से बर्बाद हो जाएगा। इस पर सिंचाई विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मौके पर पहुंचे और कटी नहर को बंधवाया। तब जाकर गेहूं का बीज अन्यत्र शिफ्ट करने बाद राहत की सास ली।
खेती को हुआ भारी नुकसान
बाराबंकी। काफी समय से सिंचाई के परेशान किसानों के लिए बादल आफत बनकर बरसे। 36 घंटे से अधिक समय से हो रही बारिश से खेती को फायदा कम नुकसान ज्यादा हुआ है। इसको लेकर किसान परेशान हैं। तेज हवा के साथ हुई बारिश से बासमती और लालमती जैसे धान की लहलहाती फसलें खेतों में चटाई बनकर बिछ गई हैं। वहीं जिन फसलों में फूल निकल रहे थे वह भी बर्बाद हो गई।
इतना ही नहीं जलभराव के चलते खेतों में बोई गई ज्वार, बाजरा, उरद, तिल व मक्के की फसल को पानी में डूबा देख किसान परेशान है। जलभराव से सबसे अधिक सब्जी की फसलें प्रभावित हुई हैं। तेज हवा के बीच हुई बारिश से केले की फसल भी काफी प्रभावित हुई है।
जिला कृषि अधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि धान की अगेती फसलों के साथ मक्का ज्वार, बाजरा, तिल व उरद की फसलों को नुकसान है। वहीं सरसों की बुआई भी प्रभावित होगी। अन्य फसलों के नुकसान की सूचना किसान बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर- 18008896868 पर दर्ज करा दें। ताकि उन्हें फसल बीमा का लाभ मिल सके।