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Barabanki News: पैर में घुंघरू, कांधे पर कांवर, महादेवा में बम-बम की गूंज
Tue, 18 Feb 2025 12:11 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 18 Feb 2025 12:11 AM IST
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महादेवा (बाराबंकी)। पैर में घुंघरू, कांधे पर सजे-धजे कांवर में गंगा जल के साथ होठों से निकलते बम-बम से पूरा महादेवा परिसर गूंजने लगा है। लखनऊ-अयोध्या मार्ग से लेकर महादेवा जाने वाले मार्ग पर कांवड़ियों की टोलियां अपने आराध्य शिव के जलाभिषेक के लिए नंगे पांव महादेवा पहुंचने लगी हैं। आस्था और अनुशासन के उल्लास में डूबे कावंड़ियों की कतार मेला परिसर भी केसरिया रंग में रंगने लगा है।
सोमवार को बड़ी संख्या में कांवड़िया महादेवा पहुंचे। इसके अलावा साईकिल, बाइक और बसों से भी शिव भक्त जलाभिषेक करने के लिए महादेवा पहुंचने लगे हैं। जितनी आकर्षक उनकी कांवड़ सजी हैं, उतने ही निराले अंदाज में कांवड़ियां भी दिख रहे हैं। बताया कि बाबा के धाम महादेवा में पहुंचते ही सारी थकान अचानक गायब हो गई है। कांवड़ियों केेे पहुंचने से मेला परिसर भी गुलजार होने लगा है।
अभरण तालाब में स्नान फिर शिव का ध्यान
महादेवा पहुंचे कांवड़ियां पहले बोहनिया सरोवर पर पहुंच कर विश्राम करते हैं। टोली में शामिल सभी लोग एक जगह पर ही अपना कांवड़ रखते हैं। सरोवर में स्नान करने के बाद धूप-दीप से कांवड़ की पूजा अर्चना कर यात्रा के दौरान हुई भूलचूक की माफी मांगी जाती है। इसके बाद अपने आराध्य देव भगवान भोलेनाथ का अभिषेक कर कांवड़ का जल उन्हें समर्पित किया जाता है।
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सोमवार को बड़ी संख्या में कांवड़िया महादेवा पहुंचे। इसके अलावा साईकिल, बाइक और बसों से भी शिव भक्त जलाभिषेक करने के लिए महादेवा पहुंचने लगे हैं। जितनी आकर्षक उनकी कांवड़ सजी हैं, उतने ही निराले अंदाज में कांवड़ियां भी दिख रहे हैं। बताया कि बाबा के धाम महादेवा में पहुंचते ही सारी थकान अचानक गायब हो गई है। कांवड़ियों केेे पहुंचने से मेला परिसर भी गुलजार होने लगा है।
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अभरण तालाब में स्नान फिर शिव का ध्यान
महादेवा पहुंचे कांवड़ियां पहले बोहनिया सरोवर पर पहुंच कर विश्राम करते हैं। टोली में शामिल सभी लोग एक जगह पर ही अपना कांवड़ रखते हैं। सरोवर में स्नान करने के बाद धूप-दीप से कांवड़ की पूजा अर्चना कर यात्रा के दौरान हुई भूलचूक की माफी मांगी जाती है। इसके बाद अपने आराध्य देव भगवान भोलेनाथ का अभिषेक कर कांवड़ का जल उन्हें समर्पित किया जाता है।
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