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महंगाई के चलते शोपीस बने उज्जवला के गैस सिलेंडर
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बाराबंकी। महंगाई ने एक बार फिर उज्ज्वला के लाभार्थियों को चूल्हा फूंकने पर मजबूर कर दिया है। घरेलू गैस सिलेंडर के दाम लगातार बढ़ने की वजह से योजना के तहत मिले गैस सिलेंडर घरों की रसोईयों की शोभा बढ़ा रहे हैं। ज्यादातर परिवार ऐसे हैं जिनके पास पैसा न होने के कारण वह आज तक गैस लेने एजेंसी तक गए ही नहीं। ऐसे में योजना को जिस मकसद से शुरू किया गया था वह पूरा होते नहीं दिख रही है।
महंगाई आज के समय में मध्य और निम्म वर्ग के लिए मुसीबत बन गई है। घरेलू गैस सिलेंडर से लेकर सब्जियों के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं जिसकी वजह से हर किसी का बजट पूरी तरह से बिगड़ा हुआ है। लेकिन महंगाई पर रोक लगाने के लिए प्रशासन की और से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। देखा जाए तो जिले में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की संख्या 2 लाख 61 हजार के आसपास है।
लेकिन इन्हें योजना के तहत जो गैस सिलेंडर मिले हुए हैं वह घरों की रसोई की शोभा बढ़ा रहे हैं। क्योंकि मौजूदा समय में गैस सिलेंडर के दाम करीब साढ़े नौ सौ रुपये के आसपास पहुंच गए हैं ऐसे में इन परिवारों की पहुंच से गैस सिलेंडर बाहर होते जा रहे हैं।
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एजेंसी संचालकों की माने तो ज्यादातर परिवार योजना का लाभ पाने के बाद दोबारा गैस सिलेंडर लेने ही नहीं आए। वहीं योजना का लाभ पाने वालों का कहना है कि सिलेंडर इतना ज्यादा महंगा हो गया है कि जिसे खरीद पाना संभव नहीं है ऐसे में हम लोगों के लिए सबसे बेहतर माध्यम चूल्हा ही है।
छह माह से घर पर रखा है गैस सिलेंडर
सिरौलीगौसपुर के अमनियापुर निवासी ऊषा बताती हैं कि पिछले छह माह से उज्ज्वला योजना के तहत मिला गैस सिलेंडर घर पर ही रखा है। सिलेंडर इतना ज्यादा महंगा हो गया है कि इसे भराने के लिए पैसा नहीं है। जिससे हम चूल्हे पर ही खाना बनाकर परिवार का पेट पाल रहे हैं।
महंगाई की वजह से नहीं भरा पाए सिलेंडर
किंतूर गांव की रहने वाली फूलन देवी बताती हैं कि परिवार का जीविका मेहनत और मजदूरी से चलती है। जबकि गैस सिलेंडर के दाम आसमान पर हैं। ऐसे में महंगाई की वजह उसे भरा पाना संभव नहीं है। गैस सिलेंडर के साथ ही अन्य चीजों के दाम भी आसमान पर हैं।
जिले में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की संख्या दो लाख 61 हजार के आसपास है। अब तक कितने लाभार्थियों ने दोबारा सिलेंडर नहीं लिया है, इसकी जानकारी नहीं हैं।
-डॉ. राकेश कुमार तिवारी, जिला पूर्ति अधिकारी
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महंगाई आज के समय में मध्य और निम्म वर्ग के लिए मुसीबत बन गई है। घरेलू गैस सिलेंडर से लेकर सब्जियों के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं जिसकी वजह से हर किसी का बजट पूरी तरह से बिगड़ा हुआ है। लेकिन महंगाई पर रोक लगाने के लिए प्रशासन की और से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। देखा जाए तो जिले में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की संख्या 2 लाख 61 हजार के आसपास है।
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लेकिन इन्हें योजना के तहत जो गैस सिलेंडर मिले हुए हैं वह घरों की रसोई की शोभा बढ़ा रहे हैं। क्योंकि मौजूदा समय में गैस सिलेंडर के दाम करीब साढ़े नौ सौ रुपये के आसपास पहुंच गए हैं ऐसे में इन परिवारों की पहुंच से गैस सिलेंडर बाहर होते जा रहे हैं।
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एजेंसी संचालकों की माने तो ज्यादातर परिवार योजना का लाभ पाने के बाद दोबारा गैस सिलेंडर लेने ही नहीं आए। वहीं योजना का लाभ पाने वालों का कहना है कि सिलेंडर इतना ज्यादा महंगा हो गया है कि जिसे खरीद पाना संभव नहीं है ऐसे में हम लोगों के लिए सबसे बेहतर माध्यम चूल्हा ही है।
छह माह से घर पर रखा है गैस सिलेंडर
सिरौलीगौसपुर के अमनियापुर निवासी ऊषा बताती हैं कि पिछले छह माह से उज्ज्वला योजना के तहत मिला गैस सिलेंडर घर पर ही रखा है। सिलेंडर इतना ज्यादा महंगा हो गया है कि इसे भराने के लिए पैसा नहीं है। जिससे हम चूल्हे पर ही खाना बनाकर परिवार का पेट पाल रहे हैं।
महंगाई की वजह से नहीं भरा पाए सिलेंडर
किंतूर गांव की रहने वाली फूलन देवी बताती हैं कि परिवार का जीविका मेहनत और मजदूरी से चलती है। जबकि गैस सिलेंडर के दाम आसमान पर हैं। ऐसे में महंगाई की वजह उसे भरा पाना संभव नहीं है। गैस सिलेंडर के साथ ही अन्य चीजों के दाम भी आसमान पर हैं।
जिले में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की संख्या दो लाख 61 हजार के आसपास है। अब तक कितने लाभार्थियों ने दोबारा सिलेंडर नहीं लिया है, इसकी जानकारी नहीं हैं।
-डॉ. राकेश कुमार तिवारी, जिला पूर्ति अधिकारी