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घरों में घुसा बाढ़ का पानी, ग्रामीणों का पलायन जारी

Fri, 15 Jul 2016 11:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी Updated Fri, 15 Jul 2016 11:35 PM IST
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Flood waters entered homes, villagers continue to flee
घरों में घुसा बाढ़ का पानी, - फोटो : अमर उजाला
तराई में झमाझम बारिश तो नहीं हुई लेकिन पहाड़ों पर हो रही निरंतर बारिश के चलते घाघरा उफान पर है। गुरुवार को घाघरा लाल निशान से 10 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। मध्य रात्रि से घाघरा का जलस्तर कम होना शुरू हुआ। लेकिन तब तक तलहटी में बसे परसावल, नैपुरा, रायपुर, कमियार, गोपीपुरवा, बांसगाव, सोनबरसा आदि गांवों में घाघरा का पानी लोगों के घरों में घुस गया।
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बढे़ हुए पानी को देखकर ग्रामीण भी अपनी गृहस्थी का सामान समेटकर सुरक्षित स्थान की ओर पलायन करने लगे हैं पलायन का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा। नैपुरा के प्राथमिक विद्यालय को घाघरा ने चारों तरफ से घेर लिया है। जिस कारण बच्चों की पाठशाला बंधे पर लगी ।
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रामसनेहीघाट तहसील के परसावल, नैपुरा, रायपुर गांव में नदी का पानी घुस गया है। इन गांवों में लगभग 4 हजार की आबादी प्रभावित हुई है। यहां के ग्रामीण अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थान की ओर पलायन कर रहे हैं। गांव में अब खाली मकान के सिवा कुछ नहीं बचा है।
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बाढ़ पीड़ित ननकऊ, गोपाल, रामजी, सुरेन्द्र, विश्राम आदि ने बताया कि गांव में पानी भरने से मुसीबत बढ़ गई है। तटबंध पर किसी तरह मवेशियों और परिवारीजनों को लाया गया है। बताया कि पानी भरने से पशुओं के चारे का संकट खड़ा हो गया। परसावल व नैपुरा के लोग नाव पर अपना सामान लादकर बंधे पर ला रहे हैं।

इनके पास सिर छिपाने के लिए कोई जगह नही बची है। रायपुर व परसावल के पास की फसलें नदी की पानी में डूब गयी हैं। उधर उफनाई घाघरा से एल्गिन चरसरी तटबंध के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। तटबंध के डेंजर जोन ग्राम रायपुर के सामने 2 किलोमीटर की परिधि में बालू भरी बोरी से बनाये गए कटरों के बराबर पानी बह रहा है।

यही नही कटान रोकने के लिए दर्जनों मजदूर बालू की बोरियों को भरकर डाल रहे हैं। कटान व बाढ़ की विभीषिका से ग्रामीणों को दो चार होना पड़ रहा है। बाढ़ पीड़ितों को अभी तक किसी प्रकार की प्रशासनिक सहायता उपलब्ध नहीं करायी गई।

नैपुरा के प्राथमिक स्कूल में पानी भर
बाढ़ प्रभावित नैपुरा के प्राथमिक स्कूल में पानी भर गया है। जिसके चलते यहां पढ़ने वाले बच्चे व शिक्षक नही पहुंच पा रहे हैं। वैकल्पिक व्यवस्था में बंधे पर बच्चों की पाठशाला चल रही है लेकिन केवल दो चार घरों के बच्चे ही मौके पर पहुंच पा रहे है। 

दाने-दाने को तरस रहे पीड़ित
कभी जिनके पास अच्छे नस्ल के पशु, पक्के मकान कई-कई बीघे कृषि योग्य भूमि थी। वही परिवार अब अन्न के दाने-दाने को मोहताज है। पीड़ित परिवार के लोग घाघरा की लहरो में अपना सब कुछ गंवाकर अब खुले आसमान के नीचे बंजारों की तरह रहने को विवश हैं।

घाघरा परसावल, नैपुरा, कमियार, गोपीपुरवा, बांसगाव, सोनबरसा, पत्रा, बसंतपुर, जैसे दर्जनों गांव के हजारों परिवारों के घरों और कृषि योग्य जमीनों को नदी का पानी निगल चुका है। इनका विस्थापन प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।


घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आ गया है। लेकिन प्रभावित क्षेत्र के तीन गांव अभी भी चपेट में हैं। इन गांव के लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का कार्य राजस्वकर्मी कर रहे हैं। बाढ़ पीड़ितों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो इसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है। -हरिकेश चौरसिया, अपर जिलाधिकारी
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