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पानी कम होते ही घरों को वापस जाने लगे बाढ़ पीड़ित
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बाराबंकी। सरयू नदी का पानी तेजी के साथ घट रहा है। नदी का पानी खतरे के निशान से 19 सेमी नीचे आ गया है। जिन गांवों में नदी का पानी भर गया था वह निकलने की वजह से तटबंध पर शरण लिए ज्यादातर परिवार अपने घरों को वापस जाने लगे हैं लेकिन अभी भी सैकड़ों परिवार ऐसे हैं जो तटबंध पर ही शरण लिए हुए हैं।
एल्गिन ब्रिज पर बने कंट्रोल रूम के मुताबिक नदी का पानी खतरे के निशान 106.076 से नीचे 105.886 पर पहुंच गया है जो खतरे के निशान से 19 सेमी नीचे है। वहीं दुर्गापुर, कोरियनपुरवा, तपेसिपाह और लहडरा आदि गांवों से पानी निकल जाने से यहां के लोगों ने राहत की सांस ली है। कोटवाधाम प्रतिनिधि के अनुसार नदी का पानी भले ही कम हो गया हो लेकिन बाढ़ पीड़ितों का दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
अलीनगर रानीमऊ तटबंध पर अभी भी सैकड़ों की संख्या में लोग रह रहे हैं जिनके कच्चे मकान वह लोग वापस अपने घर को ना जाकर तटबंध पर ही रह रहे हैं लेकिन जिनके मकान पक्के बने हुए हैं वह लोग पानी कम होते हैं पुन: अपने अपने घरों को वापस जाने लगे हैं। कतहारनपुरवा, टेपरा, सरायं सुरजन, भैरवकोल, भयकपुरवा आदि गांवों से पानी कम हो जाने से लोग अब फिर से गांव पहुंचने लगे हैं।
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क्रांति देवी ने बताया कि गांव से पानी भले ही निकल गया हो लेकिन गांव को जाना खतरे से कम नहीं है क्योंकि गांव में सीपेज अभी भी बना हुआ है। टेपरा के भुसु बताते हैं कि मकान नदी की धारा में समा गया है इसलिए बांध के अलावा उनके पास रहने के लिए कोई सहारा नहीं बचा है। तहसीलदार अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि कोटवाधाम राहत केंद्र व बेहटा प्राथमिक विद्यालय में पीड़ितों को राशन किट का वितरण किया गया। बाढ़ पीड़ितों पर बराबर नजर रखी जा रही है।
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एल्गिन ब्रिज पर बने कंट्रोल रूम के मुताबिक नदी का पानी खतरे के निशान 106.076 से नीचे 105.886 पर पहुंच गया है जो खतरे के निशान से 19 सेमी नीचे है। वहीं दुर्गापुर, कोरियनपुरवा, तपेसिपाह और लहडरा आदि गांवों से पानी निकल जाने से यहां के लोगों ने राहत की सांस ली है। कोटवाधाम प्रतिनिधि के अनुसार नदी का पानी भले ही कम हो गया हो लेकिन बाढ़ पीड़ितों का दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
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अलीनगर रानीमऊ तटबंध पर अभी भी सैकड़ों की संख्या में लोग रह रहे हैं जिनके कच्चे मकान वह लोग वापस अपने घर को ना जाकर तटबंध पर ही रह रहे हैं लेकिन जिनके मकान पक्के बने हुए हैं वह लोग पानी कम होते हैं पुन: अपने अपने घरों को वापस जाने लगे हैं। कतहारनपुरवा, टेपरा, सरायं सुरजन, भैरवकोल, भयकपुरवा आदि गांवों से पानी कम हो जाने से लोग अब फिर से गांव पहुंचने लगे हैं।
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क्रांति देवी ने बताया कि गांव से पानी भले ही निकल गया हो लेकिन गांव को जाना खतरे से कम नहीं है क्योंकि गांव में सीपेज अभी भी बना हुआ है। टेपरा के भुसु बताते हैं कि मकान नदी की धारा में समा गया है इसलिए बांध के अलावा उनके पास रहने के लिए कोई सहारा नहीं बचा है। तहसीलदार अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि कोटवाधाम राहत केंद्र व बेहटा प्राथमिक विद्यालय में पीड़ितों को राशन किट का वितरण किया गया। बाढ़ पीड़ितों पर बराबर नजर रखी जा रही है।