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5 रुपये में दाल रोटी के साथ मौसमी फल, कैसे भरेगा पेट!

Sat, 04 Jun 2022 12:48 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jun 2022 12:48 AM IST
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बाराबंकी। खाने-पीने की चीजों में महंगाई किसी से छिपी नहीं है। सामान्य ढाबों पर एक थाली की कीमत 70 से 100 रुपये है मगर आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि मिड-डे मील में एक बार के भोजन के लिए कक्षा 1 से 5 के बच्चों पर 4 रुपया 97 पैसा व कक्षा 6 से 8 के बच्चों पर मात्र 7 रुपया 45 पैसा ही दिया जा रहा है। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में तो रोजाना दो टाइम नाश्ता व दो टाइम खाने पर केवल 60 रुपया दिया जा रहा है। ऐसे में मेन्यू का कितना पालन हो रहा है इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।
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जिले में कुल 2636 परिषदीय विद्यालयों में करीब साढ़े चार लाख नौनिहाल शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। जबकि सभी 15 ब्लॉकों में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में डेढ़ हजार बालिकाएं अध्ययनरत है। वर्तमान में मिड-डे मील के तहत प्राथमिक विद्यालय में प्रति बच्चे 4 रुपया 97 पैसा दिया जा रहा है। जबकि पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में प्रति बच्चा 7 रुपया 45 पैसा दिया जा रहा है। एक शिक्षक बताते हैं कि मेन्यू में किसी दिन सब्जी रोटी के साथ मौसमी फल देना होता है तो कभी तहरी के साथ दूध।
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पांच रुपये से कम में इन चीजों की व्यवस्था कैसे की जा सकती है। एक शिक्षक ने बताया कि दूध का आधा किलो का पैकेट 30 रुपये में है। खुले में दूध 50 रुपये लीटर से ऊपर बिक रहा है। हर ब्लॉक में संचालित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों का भी यही हाल है। प्रति बालिका 60 रुपये दिए जा रहे हैं। इसी में दो बार मेन्यू के हिसाब से नाश्ता व भोजन दिया जाता है। एक शिक्षिका बताती हैं कि बीते पांच सालों से कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में कनवर्जन कॉस्ट में बढ़ोत्तरी नहीं की गई मगर चीजों के दाम दो गुने तक हो गए।
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यहां 90 रुपये में दो बार खाना एक बार नाश्ता
जिला महिला अस्पताल में एक समूह द्वारा प्रसूताओं को भोजन दिया जा रहा है। यहां सुबह दूूध-बिस्कुट के बाद दोपहर में दाल चावल रोटी व रात में दाल रोटी या सब्जी रोटी दी जा रही है। इसके लिए प्रति प्रसूता 90 रुपये दिए जा रहे हैं। सीएमएस डॉ. पीके श्रीवास्तव कहते हैं कि जो समूह खाना दे रहे हैं वह मानवता के नाते इतने कम पैसे में व्यवस्था कर रहे हैं।

वर्ष 2021 में कुछ पैसे की बढ़ोत्तरी मिड-डे मील में की गई थी। शासन से जो रेट तय हैं उसमें जिले स्तर से कुछ नहीं किया जा सकता। उसी के हिसाब से विद्यालयों में भोजन व्यवस्था को संचालित किया जा रहा है।
-अमित कुमार, बीएसए
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