{"_id":"580d002c4f1c1bcf75bc1fed","slug":"dried-three-lakh-trees-in-negligence","type":"story","status":"publish","title_hn":"लापरवाही में सूख गए तीन लाख पौधे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लापरवाही में सूख गए तीन लाख पौधे
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Sun, 23 Oct 2016 11:53 PM IST
विज्ञापन
लापरवाही में सूख गए पौधे
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने के लिए सरकार के निर्देश पर पौधरोपण अभियान चलाकर 97 स्थानों पर 9 लाख 12 हजार पौधे लगाकर लक्ष्य तो पूरा कर दिया गया। इसके बाद कई स्थानों पर पौधों की देखरेख न होे पाने की वजह से पौधे सूख गए।
वन विभाग ने दोबारा सूखे हुए पौधों के स्थान पर पौध रोपण कर पौधों की संख्या कुछ दिन बरकरार रखी। लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते 30 फीसदी (करीब 2 लाख 75 हजार) पौधों का अस्तित्व समाप्त हो चुका है।
मालूम हो कि प्रदेश सरकार द्वारा 11 जुलाई को किए जाने वाले पौधरोपण के लिए जिले को 9 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य सौंपा था। लक्ष्य के सापेक्ष 12 हजार अधिक पौधों को लगाया गया था। यह तेजी सिर्फ अभियान को अमली जामा पहनाए जाने तक ही दिखी। उसके बाद कई स्थानों पर पौधे सूख गए तो उसके बाद दो चरणों में लगभग 10 हजार पौधे दोबारा लगाए गए।
विज्ञापन
पौधों की सिंचाई में अनदेखी होने पर सूखते पौधों की संख्या बढ़ती गई। अमर उजाला की टीम ने रविवार को विकास खंड मसौली के अमदहा जंगल व जहांगीराबाद थाने पास पड़ी वन विभाग की भूमि पर लगे पेड़ों की पड़ताल की जिसमें से करीब 30 फीसदी पौधे सूखे व 10 फीसदी पौधे टूटे मिले। कई स्थानों पर ऊसर भूमि में पौधरोपण किए जाने के कारण उनकी ग्रोथ नहीं हो पाई और सूख गए।
कंधईपुर में लगे सबसे अधिक 71 हजार पौधे
जिले के रामसनेहीघाट की ग्राम पंचायत कंधईपुर में सबसे अधिक 71 हजार पौधे लगाए गए थे यहां के निवासी आशीष मिश्रा व शिवम शुक्ला के अनुसार रोपे गए पौधों में से मौजूदा समय में करीब 20 हजार से ज्यादा पौधे सूख चुके हैं। यही हाल पौध रोपण किए गए इन स्थानों का है।
त्रिवेदीगंज की शिवनाम में 28 हजार, सालेहनगर में 16 हजार, छावनी परिसर में 10 हजार, भहरेमऊ में 77 सौ, ब्रांच नहर हैदरगढ़ में 55 सौ, हाजीपुर में 10 हजार, चकसार प्रथम में 55 सौ, चकसार द्वितीय में 56 सौ, रेल भूमि पर 31 सौ, दरियाबाद ब्रांच पर 66 सौ, देवा मेला परिसर में एक हजार और चौकाघाट में 31 सौ, सिरौलीगौसपुर मार्ग के दोनों ओर दस हजार, कुशभर जंगल में दस हजार, पतुलकी में 12 सौ, जेठौती में 24 सौ दरियाबाद में 66 सौ पौधे लगाए गए। इसी प्रकार जिले के 97 स्थानों पर 9 लाख 12 हजार पौधे रोपे गए थे। जिसमें से करीब 30 फीसदी पौधे सूख चुके हैं।
पेड़ों के नीचे व ऊसर भूमि में किया गया था पौधरोपण
कुरौली चौराहे पर विशाल पेड़ों के नीचे खाली पड़ी जमीन पर पौधे लगा दिए गए थे। इसकी शिकायत भी यहां के लोगों ने किया था लेकिन लक्ष्य के आगे वन विभाग के अधिकारियों को कुछ नहीं दिखाई दे रहा था। वहीं कई स्थानों पर वन विभाग की खाली पड़ी ऊसर भूमि पर पौधे लगाए गए। इसी का नतीजा है कि पौधों को बचाना प्रशासन के बस के बाहर हो गया।
जिले में पौधरोपण अभियान के तहत 9 लाख 12 हजार पौधे लगाए गए थे। इसके बाद कुछ पौधे सूखे भी थे दोबारा करीब 10 हजार पौधे रोपे गए हैं। सड़क पर लगे पौधों की सिंचाई के लिए टैंकर व अन्य स्थानों पर किसानों से पानी लेकर या नदियों व नहरों के पानी से सिंचाई कराई गई।
बरसात का भी लाभ मिला है। इतनी बढ़ी संख्या में लगे पौधों में से कुछ तो सूख ही जाएंगे। जहां पर ज्यादा पौधे सूखे होने की सूचना मिली है वहां जांच कराकर जो भी संभव होगा किया जाएगा। -जावेद अख्तर, डीएफओ
विज्ञापन
वन विभाग ने दोबारा सूखे हुए पौधों के स्थान पर पौध रोपण कर पौधों की संख्या कुछ दिन बरकरार रखी। लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते 30 फीसदी (करीब 2 लाख 75 हजार) पौधों का अस्तित्व समाप्त हो चुका है।
विज्ञापन
मालूम हो कि प्रदेश सरकार द्वारा 11 जुलाई को किए जाने वाले पौधरोपण के लिए जिले को 9 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य सौंपा था। लक्ष्य के सापेक्ष 12 हजार अधिक पौधों को लगाया गया था। यह तेजी सिर्फ अभियान को अमली जामा पहनाए जाने तक ही दिखी। उसके बाद कई स्थानों पर पौधे सूख गए तो उसके बाद दो चरणों में लगभग 10 हजार पौधे दोबारा लगाए गए।
विज्ञापन
पौधों की सिंचाई में अनदेखी होने पर सूखते पौधों की संख्या बढ़ती गई। अमर उजाला की टीम ने रविवार को विकास खंड मसौली के अमदहा जंगल व जहांगीराबाद थाने पास पड़ी वन विभाग की भूमि पर लगे पेड़ों की पड़ताल की जिसमें से करीब 30 फीसदी पौधे सूखे व 10 फीसदी पौधे टूटे मिले। कई स्थानों पर ऊसर भूमि में पौधरोपण किए जाने के कारण उनकी ग्रोथ नहीं हो पाई और सूख गए।
कंधईपुर में लगे सबसे अधिक 71 हजार पौधे
जिले के रामसनेहीघाट की ग्राम पंचायत कंधईपुर में सबसे अधिक 71 हजार पौधे लगाए गए थे यहां के निवासी आशीष मिश्रा व शिवम शुक्ला के अनुसार रोपे गए पौधों में से मौजूदा समय में करीब 20 हजार से ज्यादा पौधे सूख चुके हैं। यही हाल पौध रोपण किए गए इन स्थानों का है।
त्रिवेदीगंज की शिवनाम में 28 हजार, सालेहनगर में 16 हजार, छावनी परिसर में 10 हजार, भहरेमऊ में 77 सौ, ब्रांच नहर हैदरगढ़ में 55 सौ, हाजीपुर में 10 हजार, चकसार प्रथम में 55 सौ, चकसार द्वितीय में 56 सौ, रेल भूमि पर 31 सौ, दरियाबाद ब्रांच पर 66 सौ, देवा मेला परिसर में एक हजार और चौकाघाट में 31 सौ, सिरौलीगौसपुर मार्ग के दोनों ओर दस हजार, कुशभर जंगल में दस हजार, पतुलकी में 12 सौ, जेठौती में 24 सौ दरियाबाद में 66 सौ पौधे लगाए गए। इसी प्रकार जिले के 97 स्थानों पर 9 लाख 12 हजार पौधे रोपे गए थे। जिसमें से करीब 30 फीसदी पौधे सूख चुके हैं।
पेड़ों के नीचे व ऊसर भूमि में किया गया था पौधरोपण
कुरौली चौराहे पर विशाल पेड़ों के नीचे खाली पड़ी जमीन पर पौधे लगा दिए गए थे। इसकी शिकायत भी यहां के लोगों ने किया था लेकिन लक्ष्य के आगे वन विभाग के अधिकारियों को कुछ नहीं दिखाई दे रहा था। वहीं कई स्थानों पर वन विभाग की खाली पड़ी ऊसर भूमि पर पौधे लगाए गए। इसी का नतीजा है कि पौधों को बचाना प्रशासन के बस के बाहर हो गया।
जिले में पौधरोपण अभियान के तहत 9 लाख 12 हजार पौधे लगाए गए थे। इसके बाद कुछ पौधे सूखे भी थे दोबारा करीब 10 हजार पौधे रोपे गए हैं। सड़क पर लगे पौधों की सिंचाई के लिए टैंकर व अन्य स्थानों पर किसानों से पानी लेकर या नदियों व नहरों के पानी से सिंचाई कराई गई।
बरसात का भी लाभ मिला है। इतनी बढ़ी संख्या में लगे पौधों में से कुछ तो सूख ही जाएंगे। जहां पर ज्यादा पौधे सूखे होने की सूचना मिली है वहां जांच कराकर जो भी संभव होगा किया जाएगा। -जावेद अख्तर, डीएफओ