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धान बेचने के दस दिन बाद भी नहीं हो रहा भुगतान, किसान परेशान
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बाराबंकी। 72 घंटा तो दूर धान बेचने के दस दिन बाद भी किसानों के खाते में धान बेचने का पैसा नहीं पहुंच रहा है। इसके चलते ही अब तक हुई 55 सौ एमटी धान की खरीद के भुगतान में दी जाने वाली साढ़े दस करोड़ रुपये की राशि के इतर किसानों के खाते में बमुश्किल पांच करोड़ की राशि ही पहुंच सकी है।
किसानों के हिस्से की साढ़े पांच करोड़ की राशि का भुगतान अभी भी खरीद केंद्रों पर अटका है। धान खरीद की राशि का भुगतान 72 घंटे के अंदर किसानों के खाते में सुनिश्चित कराने का निर्देश सीएम योगी ने दे रखा है। इसका अनुपालन न होने के कारण ही खरीद का बकाया पाने के लिए किसानों को विभाग से लेकर बैंकों तक के चक्कर काट कर परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके चलते ही किसान अब सरकारी केंद्रों पर धान बेचने से भी कतराने लगे हैं।
किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम मिले इसके लिए सरकार समर्थन मूल्य 1940 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों से धान की खरीद कर रही है। इसके लिए जिले भर में 63 धान खरीद केंद्र खोले गए हैं। इनके माध्यम से अब तक 55 सौ एमटी सरकारी धान की खरीद हो चुकी है। इसके एवज में भुगतान की जाने वाली साढ़े दस करोड़ रुपये की राशि में से अभी तक सिर्फ 5 करोड़ रुपये का ही भुगतान हो पाया है।
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भुगतान को लेकर गंभीर नहीं जिम्मेदार
हैदरगढ़ क्षेत्र के निवासी किसान सूर्य नारायन अवस्थी का आरोप हैं कि सीएम के निर्देश के बाद भी धान खरीद का भुगतान समय पर कराने को लेकर जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं। सरकारी केंद्रों पर तैनात प्रभारी व कर्मचारी खरीद में पूरी तरह से मनमानी बरत रहे हैं। पहले तो खरीद के लिए धान की तौल नहीं करते हैं यदि तौल हो भी जाती है तो भुगतान का पैसा खाते में पहुंचने में दस दिन से अधिक का समय लग जाता है। किसान राजेश सिंह कहते हैं कि धान की तौल महज 35 प्रतिशत की जा रही है, इसके साथ ही पंखा इतनी तेज चला देते हैं कि फरहा के साथ सही धान भी उड़ जाता है।
जिले में अब तक किसानों से हुई धान खरीद के साढ़े दस करोड़ रुपये की भुगतान राशि में से 5 करोड़ का भुगतान हो चुका है। भुगतान एक प्रक्रिया के तहत सीधे किसानों के खाते में जाता है। यदि पैसा निर्धारित समय पर खाते में नहीं पहुंच रहा है तो इस समस्या को दूर कराने का प्रयास किया जाएगा।
रमेश कुमार, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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किसानों के हिस्से की साढ़े पांच करोड़ की राशि का भुगतान अभी भी खरीद केंद्रों पर अटका है। धान खरीद की राशि का भुगतान 72 घंटे के अंदर किसानों के खाते में सुनिश्चित कराने का निर्देश सीएम योगी ने दे रखा है। इसका अनुपालन न होने के कारण ही खरीद का बकाया पाने के लिए किसानों को विभाग से लेकर बैंकों तक के चक्कर काट कर परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके चलते ही किसान अब सरकारी केंद्रों पर धान बेचने से भी कतराने लगे हैं।
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किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम मिले इसके लिए सरकार समर्थन मूल्य 1940 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों से धान की खरीद कर रही है। इसके लिए जिले भर में 63 धान खरीद केंद्र खोले गए हैं। इनके माध्यम से अब तक 55 सौ एमटी सरकारी धान की खरीद हो चुकी है। इसके एवज में भुगतान की जाने वाली साढ़े दस करोड़ रुपये की राशि में से अभी तक सिर्फ 5 करोड़ रुपये का ही भुगतान हो पाया है।
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भुगतान को लेकर गंभीर नहीं जिम्मेदार
हैदरगढ़ क्षेत्र के निवासी किसान सूर्य नारायन अवस्थी का आरोप हैं कि सीएम के निर्देश के बाद भी धान खरीद का भुगतान समय पर कराने को लेकर जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं। सरकारी केंद्रों पर तैनात प्रभारी व कर्मचारी खरीद में पूरी तरह से मनमानी बरत रहे हैं। पहले तो खरीद के लिए धान की तौल नहीं करते हैं यदि तौल हो भी जाती है तो भुगतान का पैसा खाते में पहुंचने में दस दिन से अधिक का समय लग जाता है। किसान राजेश सिंह कहते हैं कि धान की तौल महज 35 प्रतिशत की जा रही है, इसके साथ ही पंखा इतनी तेज चला देते हैं कि फरहा के साथ सही धान भी उड़ जाता है।
जिले में अब तक किसानों से हुई धान खरीद के साढ़े दस करोड़ रुपये की भुगतान राशि में से 5 करोड़ का भुगतान हो चुका है। भुगतान एक प्रक्रिया के तहत सीधे किसानों के खाते में जाता है। यदि पैसा निर्धारित समय पर खाते में नहीं पहुंच रहा है तो इस समस्या को दूर कराने का प्रयास किया जाएगा।
रमेश कुमार, जिला खाद्य विपणन अधिकारी