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प्रसव पीड़िता फर्श पर, नर्स सोई चारपाई में
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 28 Oct 2015 12:27 AM IST
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एफआरयू (फर्स्ट रेफरल यूनिट) पर प्रसव के लिए आयीं महिलाओं व तीमारदारों को दोयम दर्जे की सुविधाएं भी नसीब नहीं हो रही है। वार्डों में अंधेरा पसरा रहता है। मरीजों को लॉबी की फर्श पर व तीमारदारों को ठंड में खुले आसमान नीचे रात गुजारनी पड़ रही है। दर्द की मामूली दवाएं भी मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ती हैं।
हैदरगढं तहसील मुख्यालय पर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को मरीजों की सुविधा के लिए पांच वर्ष पहले फर्स्ट रेफरल यूनिट का दर्जा दिया गया था। 30 बेड के चिकित्सालय में अधीक्षक, सर्जन, दो महिला चिकित्सक समेत करीब दस डाक्टर तैनात हैं। इसके अलावा इमरजेंसी सेवाओं के लिए ग्रामीण अंचल की पीएचसी पर तैनात चिकित्सकों की सेवाएं भी प्रत्येक सप्ताह ली जाती हैं। केंद्र पर रोशनी के लिए बड़ा जनरेटर सोलर प्लांट आदि भी मौजूद है लेकिन मरीजों को होने वाली कठिनाई को देख कर स्वास्थ्य सेवाएं दिए जाने का सरकारी दावा खोखला दिखाई देता है।
सोमवार रात को एफआरयू में भर्ती त्रिवेदीगंज के दहिला की नीलम पत्नी राजेश को लॉबी की फर्श पर लिटाया गया था। पीएचसी त्रिवेदीगंज से रेफर होने पर लाई गई थी। राजेश ने बताया शाम को करीब पांच बजे सामान्य प्रसव होने पर नर्स ने इनकी सास चंपाकली से एक हजार रुपए की मांग की थी। न मिलने पर लॉबी की फर्श पर लिटा दिया और बाहर मौजूद मेडिकल स्टोर के रात में बंद होने से पहले दवाएं खरीद कर रख लेने को कहा। ठंड में अंदर लिटाने की मांग पर अंधेरे में ही जाकर लेट जाने को कह कर चली गई।
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बताया कि हर समस्या पर चिकित्साकर्मी केंद्र के अधीक्षक को सभी कमियों के लिए दोषी बता कर स्वयं ही शिकायत करने की सलाह देने लगते हैं। एक अन्य मरीज रमकुमारी पत्नी लक्खीराम को भी प्रसव के बाद इन्हीं परिस्थितियों से दो चार होना पड़ा। फर्श पर चादर बिछा कर देर रात तक अपने नौनिहाल को ठंड से बचाने का प्रयास करती रही जबकि इस दौरान स्टाफ नर्स बगल में चारपाई बिछा कर खर्राटे भरती रही।
रात करीब नौ बजे फोन पर शिकायत के बाद अधीक्षक के निर्देश पर वार्ड में रोशनी कर मरीजों को वहां लिटाया गया और इमरजेंसी सेवा के चिकित्सक डॉ. जयशंकर पांडेय ने केंद्र के स्टोर से आवश्यक दवाएं दिलवायीं।
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हैदरगढं तहसील मुख्यालय पर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को मरीजों की सुविधा के लिए पांच वर्ष पहले फर्स्ट रेफरल यूनिट का दर्जा दिया गया था। 30 बेड के चिकित्सालय में अधीक्षक, सर्जन, दो महिला चिकित्सक समेत करीब दस डाक्टर तैनात हैं। इसके अलावा इमरजेंसी सेवाओं के लिए ग्रामीण अंचल की पीएचसी पर तैनात चिकित्सकों की सेवाएं भी प्रत्येक सप्ताह ली जाती हैं। केंद्र पर रोशनी के लिए बड़ा जनरेटर सोलर प्लांट आदि भी मौजूद है लेकिन मरीजों को होने वाली कठिनाई को देख कर स्वास्थ्य सेवाएं दिए जाने का सरकारी दावा खोखला दिखाई देता है।
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सोमवार रात को एफआरयू में भर्ती त्रिवेदीगंज के दहिला की नीलम पत्नी राजेश को लॉबी की फर्श पर लिटाया गया था। पीएचसी त्रिवेदीगंज से रेफर होने पर लाई गई थी। राजेश ने बताया शाम को करीब पांच बजे सामान्य प्रसव होने पर नर्स ने इनकी सास चंपाकली से एक हजार रुपए की मांग की थी। न मिलने पर लॉबी की फर्श पर लिटा दिया और बाहर मौजूद मेडिकल स्टोर के रात में बंद होने से पहले दवाएं खरीद कर रख लेने को कहा। ठंड में अंदर लिटाने की मांग पर अंधेरे में ही जाकर लेट जाने को कह कर चली गई।
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बताया कि हर समस्या पर चिकित्साकर्मी केंद्र के अधीक्षक को सभी कमियों के लिए दोषी बता कर स्वयं ही शिकायत करने की सलाह देने लगते हैं। एक अन्य मरीज रमकुमारी पत्नी लक्खीराम को भी प्रसव के बाद इन्हीं परिस्थितियों से दो चार होना पड़ा। फर्श पर चादर बिछा कर देर रात तक अपने नौनिहाल को ठंड से बचाने का प्रयास करती रही जबकि इस दौरान स्टाफ नर्स बगल में चारपाई बिछा कर खर्राटे भरती रही।
रात करीब नौ बजे फोन पर शिकायत के बाद अधीक्षक के निर्देश पर वार्ड में रोशनी कर मरीजों को वहां लिटाया गया और इमरजेंसी सेवा के चिकित्सक डॉ. जयशंकर पांडेय ने केंद्र के स्टोर से आवश्यक दवाएं दिलवायीं।