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करिहा क्षमा छठी मइया, भूल-चूक गलती हमार....
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बाराबंकी। सोलह श्रृंगार से सजी-धजी और मौसमी सब्जियों व फलों से भरी सूप सिर पर उठाए घाट की ओर जाती महिलाएं..। दीपों और गन्ने की ढेरियों से सुशोभित वेदियां.. छठ मैैया के गूंजते मीठे सुरीले गीत और कमर भरे पानी में खड़े होकर अर्घ्य देते व्रती।
कुछ यही मनोहर ऐसा नजारा था बुधवार की शाम शहर के तालाबों व घाटों का, जहां पर व्रती महिलाओं ने छठ माई की कथा सुनकर घुटने तक पानी में जाकर डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य दिया। भगवान सूर्य के सामने आंचल फैलाकर परिवार में सुख समृद्धि का आशीष मांगा।
शहर में नागेश्वरनाथ तालाब और रेठ नदी के चिलहटा घाट, आलापुर घाट, सोमैया नगर, बंकी व तालाबों पर उत्सव सरीखा माहौल दिखा। महिलाओं ने छठ माता को गन्ना, फूल, मिष्ठान और मौसमी सब्जियों व फल एकत्र की गई पूजन सामग्री वेदी पर अर्पित की। पानी में उतर कर महिलाओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर दीपकों की कतार जल मेें प्रवाहित की। माथे पर पीला सिंदूर का तिलक सजाकर आंचल फैलाकर सूर्यदेव से आशीष मांगा।
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पूजा करने आई महिलाओं ने कबहूं ना छूूटी छठि मइया, हमनी से बरत तोहार.. पहिली पहिल हम कइनी छठी मैया व्रत तोहार, करिहा क्षमा छठी मईया, भूल चूक गलती हमार.., कांचहिं बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाए.. आदि गीत गाए।
घुंघटेर क्षेत्र के दौलतपुर, मदनपुर, मौलाबाद, बजगहनी में व्रती महिलाएं सिर पर पूजा की सामग्री फल फूल आदि डाल में रखकर ढोल नगाड़ों के साथ छठ गीत गाते हुए घाट पर पहुंची और पूजा अर्चना की। टिकैतनगर में सरजू घाट के किनारे, सुढ़ियामऊ में हरबलपुर व नौबस्ता घाट, रामनगर कस्बा के सरादी तालाब, सरजू घाट और जैदपुर क्षेत्र में ग्राम टंडनपुरवा, नयपालगंज, बरायन में व्रती महिलाओं ने डूबते हुए सूर्य केे अर्घ्य दिया।
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कुछ यही मनोहर ऐसा नजारा था बुधवार की शाम शहर के तालाबों व घाटों का, जहां पर व्रती महिलाओं ने छठ माई की कथा सुनकर घुटने तक पानी में जाकर डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य दिया। भगवान सूर्य के सामने आंचल फैलाकर परिवार में सुख समृद्धि का आशीष मांगा।
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शहर में नागेश्वरनाथ तालाब और रेठ नदी के चिलहटा घाट, आलापुर घाट, सोमैया नगर, बंकी व तालाबों पर उत्सव सरीखा माहौल दिखा। महिलाओं ने छठ माता को गन्ना, फूल, मिष्ठान और मौसमी सब्जियों व फल एकत्र की गई पूजन सामग्री वेदी पर अर्पित की। पानी में उतर कर महिलाओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर दीपकों की कतार जल मेें प्रवाहित की। माथे पर पीला सिंदूर का तिलक सजाकर आंचल फैलाकर सूर्यदेव से आशीष मांगा।
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पूजा करने आई महिलाओं ने कबहूं ना छूूटी छठि मइया, हमनी से बरत तोहार.. पहिली पहिल हम कइनी छठी मैया व्रत तोहार, करिहा क्षमा छठी मईया, भूल चूक गलती हमार.., कांचहिं बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाए.. आदि गीत गाए।
घुंघटेर क्षेत्र के दौलतपुर, मदनपुर, मौलाबाद, बजगहनी में व्रती महिलाएं सिर पर पूजा की सामग्री फल फूल आदि डाल में रखकर ढोल नगाड़ों के साथ छठ गीत गाते हुए घाट पर पहुंची और पूजा अर्चना की। टिकैतनगर में सरजू घाट के किनारे, सुढ़ियामऊ में हरबलपुर व नौबस्ता घाट, रामनगर कस्बा के सरादी तालाब, सरजू घाट और जैदपुर क्षेत्र में ग्राम टंडनपुरवा, नयपालगंज, बरायन में व्रती महिलाओं ने डूबते हुए सूर्य केे अर्घ्य दिया।