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जिले में फर्जी संस्था खोल रही जनसेवा केंद्र
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Fri, 13 Jan 2017 12:03 AM IST
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वाशिंदों को मिलेगी ई-गवर्नेंस की सुविधा
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्र व राज्य सरकार के अनुबंध के बिना जिले में एक फर्जी संस्था द्वारा त्रिवेणी जनसेवा केंद्र खोले जाने का मामला प्रकाश में आया है। यह खुलासा तब हुआ जब 9 जनवरी 2017 को ई-गवर्नेंस के राज्य समन्वयक ने डीएम को पत्र भेजकर फर्जी संस्था द्वारा जनसेवा केंद्र खोले जाने की जांच किए जाने के आदेश दिए। फर्जी संस्था ने अब तक जिले में करीब 725 जनसेवा केंद्र खोल चुकी है।
वर्ष 2015-16 में ई-गवर्नेंस से वयम् टेकभनोलॉजी का अनुबंध समाप्त हो जाने के बाद दोबारा जिलों में जनसेवा केंद्र, लोकवाणी व त्रिवेणी केंद्रों के संचालन कराए जाने के लिए सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस उत्तर-प्रदेश द्वारा विभिन्न कंपनियों से टेंडर मांगे गए थे।
जिसमें सहज ई-विलेज, वयम्टेक, सीएमएस, एसआरएन, केडी एंड ई, आईएपी, निकटन व आईसीएससी आदि ने टेंडर डाले थे। टेंडर प्रक्रिया में एक कंपनी को अधिकतम 20 जनपदों में केंद्र व राज्य की योजनाओं से संबंधित सेवाओं का लाभ क्षेत्रीय लोगाें को दिए जाने के लिए पोर्टल जारी किया जाना था।
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इसके साथ ही कंपनी को प्रत्येक जिले में काम करने के लिए 25 लाख रुपये की सिक्योरटी राशि जमा करना था। लेकिन सीएससी-एसपीवी कंपनी द्वारा न ही टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया गया और न ही किसी प्रकार का कोई अनुबंध डीआईजीएस सोसाइटी से लिया गया। उसके बाद भी सूबे के सभी जनपदों में फर्जी तरीके से त्रिवेणी जनसेवा केंद्रों को खोलकर ठगी कर रही है।
जिले के ई डिस्ट्रिक मैनेजर ने बताया कि सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस उत्तर-प्रदेश के राज्य समंवयक सुरेंद्र विक्रम ने 9 जनवरी को डीएम को पत्र भेजकर बताया कि जिले में जो सीएचसी-एसपीवी संस्था कार्य कर रही है, वह फर्जी है। उसको राज्य सरकार व केंद्र सरकार द्वारा किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं दी गई है।
सीएससी-सीपीवी संस्था के पास मौजूदा समय में किसी प्रकार का अनुमति पत्र नहीं है। मेरी संस्था केंद्र सरकार की योजनाओं के लिए कार्य करती है। अब तक जिले में 725 जनसेवा केंद्र खोले जा चुके हैं। इस संबंध में अभी तक किसी की शिकायत मुझे नहीं मिली है जो भी पूछताछ होगी उसका जवाब दिया जाएगा। - दिनेश वर्मा, जिला कोआर्डिनेटर सीएससी-सीपीवी संस्था
जिले में सहज संस्था द्वारा सभी ग्राम पंचायत वार व शहरी क्षेत्रों में वार्ड वार 1296 जनसेवा केंद्र खोले जा चुके हैं जो केंद्र व राज्य सरकार की 26 सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। सीएससी-सीपीवी संस्था द्वारा खोले गए 725 केंद्रो से ई-गवर्नेंस का कोई लेना देना नहीं है। शासन से इस कंपनी के खिलाफ जिलाधिकारी को जांच के लिए पत्र आया है। - एके सिंह, एडीएम
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वर्ष 2015-16 में ई-गवर्नेंस से वयम् टेकभनोलॉजी का अनुबंध समाप्त हो जाने के बाद दोबारा जिलों में जनसेवा केंद्र, लोकवाणी व त्रिवेणी केंद्रों के संचालन कराए जाने के लिए सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस उत्तर-प्रदेश द्वारा विभिन्न कंपनियों से टेंडर मांगे गए थे।
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जिसमें सहज ई-विलेज, वयम्टेक, सीएमएस, एसआरएन, केडी एंड ई, आईएपी, निकटन व आईसीएससी आदि ने टेंडर डाले थे। टेंडर प्रक्रिया में एक कंपनी को अधिकतम 20 जनपदों में केंद्र व राज्य की योजनाओं से संबंधित सेवाओं का लाभ क्षेत्रीय लोगाें को दिए जाने के लिए पोर्टल जारी किया जाना था।
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इसके साथ ही कंपनी को प्रत्येक जिले में काम करने के लिए 25 लाख रुपये की सिक्योरटी राशि जमा करना था। लेकिन सीएससी-एसपीवी कंपनी द्वारा न ही टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया गया और न ही किसी प्रकार का कोई अनुबंध डीआईजीएस सोसाइटी से लिया गया। उसके बाद भी सूबे के सभी जनपदों में फर्जी तरीके से त्रिवेणी जनसेवा केंद्रों को खोलकर ठगी कर रही है।
जिले के ई डिस्ट्रिक मैनेजर ने बताया कि सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस उत्तर-प्रदेश के राज्य समंवयक सुरेंद्र विक्रम ने 9 जनवरी को डीएम को पत्र भेजकर बताया कि जिले में जो सीएचसी-एसपीवी संस्था कार्य कर रही है, वह फर्जी है। उसको राज्य सरकार व केंद्र सरकार द्वारा किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं दी गई है।
सीएससी-सीपीवी संस्था के पास मौजूदा समय में किसी प्रकार का अनुमति पत्र नहीं है। मेरी संस्था केंद्र सरकार की योजनाओं के लिए कार्य करती है। अब तक जिले में 725 जनसेवा केंद्र खोले जा चुके हैं। इस संबंध में अभी तक किसी की शिकायत मुझे नहीं मिली है जो भी पूछताछ होगी उसका जवाब दिया जाएगा। - दिनेश वर्मा, जिला कोआर्डिनेटर सीएससी-सीपीवी संस्था
जिले में सहज संस्था द्वारा सभी ग्राम पंचायत वार व शहरी क्षेत्रों में वार्ड वार 1296 जनसेवा केंद्र खोले जा चुके हैं जो केंद्र व राज्य सरकार की 26 सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। सीएससी-सीपीवी संस्था द्वारा खोले गए 725 केंद्रो से ई-गवर्नेंस का कोई लेना देना नहीं है। शासन से इस कंपनी के खिलाफ जिलाधिकारी को जांच के लिए पत्र आया है। - एके सिंह, एडीएम