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सम्मान के भूखे लोकतंत्र सेनानी, केंद्र सरकार से मलाल
Updated Sat, 24 Jun 2017 11:51 PM IST
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आपातकाल में जेल काटने वाले अब काट रहे मुफलिसी व गुमनामी की जिंदगी
सम्मान के भूखे लोकतंत्र सेनानी, केंद्र सरकार से मलाल
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। 19 माह के आपातकाल में लोकतंत्र की रक्षा के आंदोलन किया और जेल तक गए, महीनों घर-परिवार से मिलना नहीं हो सका। रिश्तेदारों ने भी मुंह मोड़ लिया तो पारिवारिक समस्याओं से भी ताल्लुक नहीं रहा। किसी के बूढ़े माता-पिता गुजर गए तो किसी का बेटा नही रहा। जेल में बंद होने के कारण वह अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो सके। अब ऐसे लोकतंत्र सेनानियों की कोई सुध लेने वाला नहीं है। कई लोकतंत्र सेनानियों को राज्य सरकार से मिलने वाली सुविधाएं सिर्फ कागजों में मिल रही हैं। ऐसे में खेती किसानी के सहारे वह जीवन बसर कर रहे है।
इस बारे में लोकतंत्र सेनानियों से बात की गई तो उनका दर्द छलका पड़ा। सम्मान की भूख तो केंद्र सरकार से उनकी सुध न लेने का मलाल होने की बात सामने आई। परिवहन निगम की बस आरक्षित सीट के साथ सम्मान न मिलने की बात बताई। वहीं फ्री स्वास्थ्य सेवा के नाम पर मार्केट से दवा भी खरीदने का दर्द लोकतंत्र सेनानियों को है। सरकारी अस्पताल में उपलब्ध दवाओं के अलावा बाहर से दवा खरीद कर देने की शासन की मंशा भी पूरी नहीं हो सकी। सरकारी अस्पताल के जिम्मेदार उन्हें शासनादेश की जानकारी न होने की बात कहकर टरका देते हैं। वर्ष 2006 में मुलायम सिंह के मुख्यमंत्री रहते लोकतंत्र सेनानियों को 15 हजार रुपए मासिक सम्मान राशि, स्वास्थ्य व परिवहन सेवा फ्री करने का शासनादेश जारी किया। मगर, जिले के कई लोकतंत्र सेनानियों को इसका लाभ अभी भी नहीं मिल रहा है। जिले में 212 लोकतंत्र सेनानी है।
फोटो-29
बेटे के अंतिम संस्कार में शामिल न होने की पीड़ा आज भी
जिले के आवास विकास कालोनी में रहने वाले लोकतंत्र सेनानी व लोकतंत्र सेनानी कल्याण परिषद के जिला संयोजक अजय सिंह से बात की गई तो उन्होंने आपातकाल की पूरी तस्वीर बयां कर दी। कहा, लोकतंत्र सेनानियों की गिरफ्तारी के शुरुआती दौर में जिले में सबसे पहले उन्हीं की गिरफ्तारी हुई। इस दौरान उनके बेटे की तबियत बिगड़ गई और इलाज के अभाव में उसकी मौत भी हो गई। फैजाबाद जेल में बंद होने के कारण वह बेटे के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके। चार बेटियों की जिम्मेदारी अब उन पर है। उन्हें केंद्र सरकार से लोकतंत्र सेनानियों की सुध न लेने का मलाल है। वह कहते हैं कि जिस लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई लोकतंत्र सेनानियों ने लड़ी आज उसी लोकतंत्र को लेकर राजनीति हो रही है।
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फोटो-30
बीमार लोकतंत्र सेनानी का कोई नही पूछता हाल
शहर के लाजपतनगर मोहल्ले में रहने वाले वयोवृद्ध लोकतंत्र सेनानी गोपाल सिंह सेवक को भी सम्मान की दरकार है। वह इन दिनों बीमार है और उनका इलाज लखनऊ के एक निजी चिकित्सक के यहां से चल रहा है। सरकारी अस्पताल में उन्हें इलाज नही मिला तो मजबूरन उन्हें निजी चिकित्सक से इलाज कराना पड़ रहा है। वह कहते है कि लोकतंत्र की रक्षा को लेकर लड़ाई लड़ी और जेल भी गए। मगर, आज वह बीमार है तो कोई हाल पूछने वाला नहीं है। वह अपने छोटे बेटे के साथ रह रहे है। हालांकि तीन माह से उन्हें सम्मान राशि भी नही मिली है।
सुविधा न मिलने का मलाल
फोटो- 31
हैदरगढ़ क्षेत्र के बहरामपुर निवासी लोकतंत्र सेनानी दुखहरन सिंह को सम्मान राशि, फ्री परिवहन व स्वास्थ्य सेवा का लाभ नहीं मिल रहा है। खेती किसानी के सहारे वह जीवन बसर कर रहे हैं। वर्ष 1975 में प्रशासन की सख्ती के बाद हैदरगढ़ में आपातकाल का विरोध दुखहरन सिंह के नेतृत्व में ही हुआ था। उसके बाद भी सुविधा न मिलने की उपेक्षा उन्हें अखर रही है। उन्हें मलाल है तो बस सम्मान न मिलने का। राजनीति में अभी भी सक्रिय दुखहरन सिंह कहते है कि लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई लड़ने वाले लोकतंत्र सेनानियों को भले ही भूला दिया जाय पर उनके योगदान को नहीं भूलाया जा सकता।
फ्री परिवहन व स्वास्थ्य सेवा की नहीं मिली सुविधा
फोटो-32
हैदरगढ़ क्षेत्र के पेचरुवा निवासी लोकतंत्र सेनानी संतसरन सिंह को काफी दौड़-भाग के बाद सम्मान राशि तो मिलने लगी। मगर, फ्री परिवहन व स्वास्थ्य सेवा की सुविधा नहीं मिल पा रही है। संतसरन सिंह कहते हैं कि परिवहन बस में सफर के दौरान किराया देने के बाद में लोकतंत्र सेनानी का सम्मान न मिलने का दर्द उन्हें जरूर है। मगर, उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। उपेक्षा की बात की जाय तो कोई हाल भी नहीं पूछता। राज्य सरकार ने तो लोकतंत्र सेनानियों को लेकर वर्ष 2006 में कुछ सुविधाएं दीं। मगर, केंद्र सरकार लोकतंत्र सेनानियों को भूलाए बैठी है।
सुविधाएं तो दूर वृद्धावस्था पेंशन तक हुई बंद
फोटो-40
माती निवासी लोकतंत्र सेनानी अवधेश तिवारी को कोई सुविधा नही मिल रही है। वृद्धा अवस्था पेंशन मिल रही थी 2014 में वह भी बंद कर दी गई। अवधेश कहते हैं लोकतंत्र बचाने में उन्होंने संघर्ष किया। उसके बदले चाहत कोई नहीं है। मगर, सुविधा व सम्मान मिले यही क्या कम है। उनकी मुलाकात पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी से दिल्ली के एक अस्पताल में चौधरी चरण सिंह को देखने के दौरान हुई। काफी देर तक बात भी हुई पर उन्होंने उनसे भी कोई अपेक्षा नहीं जाहिर की गई। हालांकि समाज कल्याण द्वारा बंद की पेंशन को लेकर वह काफी परेशान है। वह इस बारे में जिला समाज कल्याण अधिकारी से कई बार बात कर चुके है। उसके बाद भी पेंशन बहाल नही की गई।
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सम्मान के भूखे लोकतंत्र सेनानी, केंद्र सरकार से मलाल
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। 19 माह के आपातकाल में लोकतंत्र की रक्षा के आंदोलन किया और जेल तक गए, महीनों घर-परिवार से मिलना नहीं हो सका। रिश्तेदारों ने भी मुंह मोड़ लिया तो पारिवारिक समस्याओं से भी ताल्लुक नहीं रहा। किसी के बूढ़े माता-पिता गुजर गए तो किसी का बेटा नही रहा। जेल में बंद होने के कारण वह अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो सके। अब ऐसे लोकतंत्र सेनानियों की कोई सुध लेने वाला नहीं है। कई लोकतंत्र सेनानियों को राज्य सरकार से मिलने वाली सुविधाएं सिर्फ कागजों में मिल रही हैं। ऐसे में खेती किसानी के सहारे वह जीवन बसर कर रहे है।
इस बारे में लोकतंत्र सेनानियों से बात की गई तो उनका दर्द छलका पड़ा। सम्मान की भूख तो केंद्र सरकार से उनकी सुध न लेने का मलाल होने की बात सामने आई। परिवहन निगम की बस आरक्षित सीट के साथ सम्मान न मिलने की बात बताई। वहीं फ्री स्वास्थ्य सेवा के नाम पर मार्केट से दवा भी खरीदने का दर्द लोकतंत्र सेनानियों को है। सरकारी अस्पताल में उपलब्ध दवाओं के अलावा बाहर से दवा खरीद कर देने की शासन की मंशा भी पूरी नहीं हो सकी। सरकारी अस्पताल के जिम्मेदार उन्हें शासनादेश की जानकारी न होने की बात कहकर टरका देते हैं। वर्ष 2006 में मुलायम सिंह के मुख्यमंत्री रहते लोकतंत्र सेनानियों को 15 हजार रुपए मासिक सम्मान राशि, स्वास्थ्य व परिवहन सेवा फ्री करने का शासनादेश जारी किया। मगर, जिले के कई लोकतंत्र सेनानियों को इसका लाभ अभी भी नहीं मिल रहा है। जिले में 212 लोकतंत्र सेनानी है।
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बेटे के अंतिम संस्कार में शामिल न होने की पीड़ा आज भी
जिले के आवास विकास कालोनी में रहने वाले लोकतंत्र सेनानी व लोकतंत्र सेनानी कल्याण परिषद के जिला संयोजक अजय सिंह से बात की गई तो उन्होंने आपातकाल की पूरी तस्वीर बयां कर दी। कहा, लोकतंत्र सेनानियों की गिरफ्तारी के शुरुआती दौर में जिले में सबसे पहले उन्हीं की गिरफ्तारी हुई। इस दौरान उनके बेटे की तबियत बिगड़ गई और इलाज के अभाव में उसकी मौत भी हो गई। फैजाबाद जेल में बंद होने के कारण वह बेटे के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके। चार बेटियों की जिम्मेदारी अब उन पर है। उन्हें केंद्र सरकार से लोकतंत्र सेनानियों की सुध न लेने का मलाल है। वह कहते हैं कि जिस लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई लोकतंत्र सेनानियों ने लड़ी आज उसी लोकतंत्र को लेकर राजनीति हो रही है।
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बीमार लोकतंत्र सेनानी का कोई नही पूछता हाल
शहर के लाजपतनगर मोहल्ले में रहने वाले वयोवृद्ध लोकतंत्र सेनानी गोपाल सिंह सेवक को भी सम्मान की दरकार है। वह इन दिनों बीमार है और उनका इलाज लखनऊ के एक निजी चिकित्सक के यहां से चल रहा है। सरकारी अस्पताल में उन्हें इलाज नही मिला तो मजबूरन उन्हें निजी चिकित्सक से इलाज कराना पड़ रहा है। वह कहते है कि लोकतंत्र की रक्षा को लेकर लड़ाई लड़ी और जेल भी गए। मगर, आज वह बीमार है तो कोई हाल पूछने वाला नहीं है। वह अपने छोटे बेटे के साथ रह रहे है। हालांकि तीन माह से उन्हें सम्मान राशि भी नही मिली है।
सुविधा न मिलने का मलाल
फोटो- 31
हैदरगढ़ क्षेत्र के बहरामपुर निवासी लोकतंत्र सेनानी दुखहरन सिंह को सम्मान राशि, फ्री परिवहन व स्वास्थ्य सेवा का लाभ नहीं मिल रहा है। खेती किसानी के सहारे वह जीवन बसर कर रहे हैं। वर्ष 1975 में प्रशासन की सख्ती के बाद हैदरगढ़ में आपातकाल का विरोध दुखहरन सिंह के नेतृत्व में ही हुआ था। उसके बाद भी सुविधा न मिलने की उपेक्षा उन्हें अखर रही है। उन्हें मलाल है तो बस सम्मान न मिलने का। राजनीति में अभी भी सक्रिय दुखहरन सिंह कहते है कि लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई लड़ने वाले लोकतंत्र सेनानियों को भले ही भूला दिया जाय पर उनके योगदान को नहीं भूलाया जा सकता।
फ्री परिवहन व स्वास्थ्य सेवा की नहीं मिली सुविधा
फोटो-32
हैदरगढ़ क्षेत्र के पेचरुवा निवासी लोकतंत्र सेनानी संतसरन सिंह को काफी दौड़-भाग के बाद सम्मान राशि तो मिलने लगी। मगर, फ्री परिवहन व स्वास्थ्य सेवा की सुविधा नहीं मिल पा रही है। संतसरन सिंह कहते हैं कि परिवहन बस में सफर के दौरान किराया देने के बाद में लोकतंत्र सेनानी का सम्मान न मिलने का दर्द उन्हें जरूर है। मगर, उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। उपेक्षा की बात की जाय तो कोई हाल भी नहीं पूछता। राज्य सरकार ने तो लोकतंत्र सेनानियों को लेकर वर्ष 2006 में कुछ सुविधाएं दीं। मगर, केंद्र सरकार लोकतंत्र सेनानियों को भूलाए बैठी है।
सुविधाएं तो दूर वृद्धावस्था पेंशन तक हुई बंद
फोटो-40
माती निवासी लोकतंत्र सेनानी अवधेश तिवारी को कोई सुविधा नही मिल रही है। वृद्धा अवस्था पेंशन मिल रही थी 2014 में वह भी बंद कर दी गई। अवधेश कहते हैं लोकतंत्र बचाने में उन्होंने संघर्ष किया। उसके बदले चाहत कोई नहीं है। मगर, सुविधा व सम्मान मिले यही क्या कम है। उनकी मुलाकात पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी से दिल्ली के एक अस्पताल में चौधरी चरण सिंह को देखने के दौरान हुई। काफी देर तक बात भी हुई पर उन्होंने उनसे भी कोई अपेक्षा नहीं जाहिर की गई। हालांकि समाज कल्याण द्वारा बंद की पेंशन को लेकर वह काफी परेशान है। वह इस बारे में जिला समाज कल्याण अधिकारी से कई बार बात कर चुके है। उसके बाद भी पेंशन बहाल नही की गई।