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Barabanki News: चिकनकारी ने बनाया आत्मनिर्भर, खुले समृद्धि के द्वार
Wed, 06 Aug 2025 12:16 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 06 Aug 2025 12:16 AM IST
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घुंघटेर (बाराबंकी)। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत गठित गंगा महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने स्वरोजगार में चिकनकारी को अपनाकर खुद का आत्मनिर्भर बनाने की मिसाल पेश की है। समूह की 12 महिलाएं नाहिद बानो के नेतृत्व में चिकनकारी करती हैं। इनकी चिकनकारी सबको भाने लगी है। इससे समूह को ज्यादा काम मिलने से उनकी आमदनी भी काफी बेहतर हो गई है। चिकक की कढ़ाई के लिए कई बड़े व्यापारी भी अपने कपड़े समूह से जुड़ी महिलाओं के पास भेजते हैं।
निंदूरा ब्लॉक के बजगहनी गांव की नाहिद बानो ने बताया कि उन्होंने चार साल पहले समूह से जुड़कर स्वरोजगारी बनने के लिए 20 हजार रुपये का ऋण लेकर चिकन की कढ़ाई का सामान खरीदा था। इसके साथ ही इसे लेकर लखनऊ के कुछ व्यापारियों से संपर्क भी किया जो कपड़ों पर चिकन की कढ़ाई कराते थे। धीरे-धीरे काम बढ़ा तो समूह की सभी महिलाओं को चिकनकारी का काम मिलने लगा।
इससे समूह से जुड़ी महिलाओं को पारिश्रमिक निकालकर औसतन करीब दस हजार रुपये महीना तक की बचत हो जाती है। समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनता देखकर गांव की अन्य महिलाएं भी उनसे प्रेरणा लेकर चिकनकारी की कढ़ाई का काम सीख कर समूह से जुड़ने लगी हैं। सीखने के दौरान भी समूह की तरफ से उन्हें मानदेय दिया जाता है।
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नाहिदा ने बताया कि उनके समूह के द्वार तैयार चिकन की कढ़ाई के परिधान लखनऊ, कानपुर, आगरा, दिल्ली, श्रीनगर कश्मीर बरेली व रामपुर जैसे शहरों में खूब पसंद किए जाते हैं। लोग उनके काम की सराहना भी करते हैं। कढ़ाई कर तैयार किए जाने वाले कपड़ों को थोक व्यापारियों के माध्यम से विभिन्न शहरों में भेजा जाता है।
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निंदूरा ब्लॉक के बजगहनी गांव की नाहिद बानो ने बताया कि उन्होंने चार साल पहले समूह से जुड़कर स्वरोजगारी बनने के लिए 20 हजार रुपये का ऋण लेकर चिकन की कढ़ाई का सामान खरीदा था। इसके साथ ही इसे लेकर लखनऊ के कुछ व्यापारियों से संपर्क भी किया जो कपड़ों पर चिकन की कढ़ाई कराते थे। धीरे-धीरे काम बढ़ा तो समूह की सभी महिलाओं को चिकनकारी का काम मिलने लगा।
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इससे समूह से जुड़ी महिलाओं को पारिश्रमिक निकालकर औसतन करीब दस हजार रुपये महीना तक की बचत हो जाती है। समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनता देखकर गांव की अन्य महिलाएं भी उनसे प्रेरणा लेकर चिकनकारी की कढ़ाई का काम सीख कर समूह से जुड़ने लगी हैं। सीखने के दौरान भी समूह की तरफ से उन्हें मानदेय दिया जाता है।
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नाहिदा ने बताया कि उनके समूह के द्वार तैयार चिकन की कढ़ाई के परिधान लखनऊ, कानपुर, आगरा, दिल्ली, श्रीनगर कश्मीर बरेली व रामपुर जैसे शहरों में खूब पसंद किए जाते हैं। लोग उनके काम की सराहना भी करते हैं। कढ़ाई कर तैयार किए जाने वाले कपड़ों को थोक व्यापारियों के माध्यम से विभिन्न शहरों में भेजा जाता है।