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Barabanki News: सरयू की बदली धारा लील गई बबुरी गांव

Thu, 08 Aug 2024 05:14 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Thu, 08 Aug 2024 05:14 AM IST
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Changing stream of Saryu washed away Baburi village
बाराबंकी/ सूरतगंज। धारा बदलकर बह रही सरयू नदी की तेज कटान से 72 घंटे में ही बबुरी गांव का अस्तित्व ही खत्म होने की कगार पर है। बुधवार देर शाम तक नदी की तेज कटान की चपेट में आकर गांव के करीब 30 और घर नदी में समा गए। नदी के रौद्र स्वरूप से भयभीत कई ग्रामीण स्वयं अपना मकान तोड़ कर बची सामग्री लेकर पलायन में जुटे हैं। विस्थापित हुए ग्रामीण फिलहाल सड़क किनारे ही तंबू डालकर शरण लेने को विवश है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि 29 पीड़ितों को जमीन का पट्टा दूसरी जगह बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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पिछले कई दिनों से सरयू नदी का जलस्तर घट-बढ़ रहा है। बीते तीन दिन पहले रामनगर तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत सरसंडा के बबुरी गांव के पास नदी ने तेजी से कटान शुरू कर दिया। इससे घंटे भर में ही 8 से 10 फिट जमीन नदी में समा गई। बीती पूरी रात कटान जारी रहने से गांव में दहशत व्याप्त है।
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सूरतगंज प्रतिनिधि के अनुसार बुधवार को एक के बाद एक 30 घर नदी का हिस्सा बन पानी में समा गए। बबुरी गांव के शिवकुमार, रोहित, दीपक, रवि, पद्मावती, पप्पू, देवी शरण, सूरज, चंद्र प्रकाश, सुशीला देवी, छोटेराम ,लालता, रामदीन, तीर्थ, चंद्रदीप, रमेश, लालू, मुनेश्वर, सियाराम, दिलेराम, दिनेश समेत कुल 26 लोगों के मकान अब तक नदी में समा चुके हैं। इससे पूरे बबुरी गांव का अस्तित्व ही मिटने की कगार पर आ गया है।
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गांव के लाेग अब अपने घरों को स्वयं तोड़कर ईंट वाहनों पर लादकर सुरक्षित स्थान पर शरण के लिए जा रहे हैं ताकि इसकी मदद से फिर से घरों का निर्माण कर सकें। बुधवार को एसडीएम रामनगर पवन कुमार, तहसीलदार भूपेंद्र विक्रम सिंह, बीडीओ देवेंद्र प्रताप सिंह बबुरी गांव का जायजा लेकर नदी किनारे के घरों को खाली करवा कर परिवारों को सुरक्षित स्थान पर जाने को कहा। एसडीएम रामनगर पवन कुमार ने बताया कि नदी ने धारा बदल ली है। बबुरी गांव में मंगलवार तक जो 13 मकान नदी में समा गए थे उन परिवारों के हर मुखिया को 1.20 लाख रुपये की आर्थिक मदद प्रशासन की तरफ से मुहैया कराई गई है। 29 अन्य परिवाराें को भी घर बनाने के लिए जमीन का पट्टा दे दिया गया है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए है।

बबुरी गांव के निवासी रोहित नदी की तरफ इशारा करके बताते है कि कल तक वहां हमारा घर था। लेकिन मजबूरी में हमको मकान तोड़ना पड़ा। इस बची हुई ईंटों से अब नयी जगह पर घर तो बना सकेंगे। बबुरी गांव निवासी ममता देवी की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। बताया कि 12 साल पहले इस गांव में ब्याह कर आई थी। एक-एक पैसा जोड़कर पति ने काफी मेहनत कर छोटा सा आशियाना बनाया था। वह भी नदी में समा गया। अब दोबारा घर बनाने की चुनौती सामने हैं।
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