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दो साल से नहीं खुला सेंट्रल ऑक्सीजन कक्ष
बाराबंकी
Updated Sat, 12 Aug 2017 11:25 PM IST
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बाराबंकी जिला अस्पताल में सेंट्रल आक्सीजन सप्लाई सेक्शन में लगा ताला
- फोटो : अमर उजाला
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गोरखपुर जैसा हादसा जिला अस्पताल में कभी भी हो सकता है। यहां पर ऑपरेशन थियेटर से लेकर नई बिल्डिंग में भर्ती होने वाले मरीजों के लिए एक करोड़ की लागत से बने सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सेेक्शन मशीन कक्ष का ताला करीब दो साल से खोला ही नहीं गया है। अस्पताल प्रशासन की इस लापरवाही का खामियाजा किसी दिन मरीजों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ सकता है।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड से लेकर भर्ती वार्ड के लिए 32 जैंबो व 22 छोटे ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध हैं। जिसमें अस्पताल प्रशासन द्वारा 16 रिजर्व जैंबो सिलेंडर होने की बात कही जा रही है। ऑक्सीजन की सप्लाई किसी संस्था से न कराकर बल्कि नकद मूल्य पर खरीद कर की जा रही है।
ऑक्सीजन की दिक्कत न हो इसके लिए कुपोषण वार्ड के पास सेंट्रल ऑक्सीजन आपूर्ति सेक्शन मशीन कक्ष का निर्माण कर पाइप लाइन बिछाई गई है। इस कार्य पर करीब एक करोड़ रुपये की लागत आई थी। लेकिन हालात ये हैं कि दो साल से पूरा सिस्टम ठप पड़ा है।
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सूत्रों की माने तो ओटी में कुछ दिन तक आपूर्ति हुई बाद में वह भी बंद हो गई। नई बिल्डिंग के सभी वार्डों में आउटपुट की कोई व्यवस्था तक नहीं है। हैरत की बात यह है कि स्वास्थ्य कर्मचारियों को इसको ऑपरेट करने का प्रशिक्षण तक नहीं दिया गया। वार्ड में एक सिलेंडर रखा मिला, जो चालू हालत में था। शनिवार को अस्पताल में एक भी मरीज ऑक्सीजन लगा नहीं मिला।
जिले के सभी सीएचसी व जिला अस्पताल में पर्याप्त ऑक्सीजन के सिलेंडर हैं, अब तक ऑक्सीजन की कमी से किसी की जान जाने का मामला प्रकाश में नहीं आया है। जिले में लिक्विड ऑक्सीजन की आवश्यकता अभी नहीं पड़ती है, ट्रॉमा सेंटर चालू होने पर वेंटीलेटर पर इसकी जरूरत पड़ेगी। - डॉ. रमेश चंद्र सीएमओ
एजेंसी से नहीं नकद खरीदी जा रही आॅक्सीजन : चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि जिला अस्पताल में ऑक्सीजन की जरूरत रोजाना एक या दो मरीजों को पड़ती है जिसके सापेक्ष अस्पताल में पर्याप्त सिलेंडर हैं। ऑक्सीजन किसी एजेंसी के माध्यम से नहीं बल्कि नकद मूल्य पर अलग-अलग स्थानों से खरीदी जाती है।
जिले में 102 की 44 एंबुलेंस संचालित हो रही हैं, प्रत्येक एंबुलेंस में एक जैंबो व एक छोटे सिलेंडर की उपलब्धता है। वहीं 108 की 26 एंबुलेंस हैं। घायलों को जिला अस्पताल व ट्रॉमा तक ले जाने के लिए ज्यादा ऑक्सीजन की आवश्यकता होने के कारण इस एंबुलेंस में तीन बड़े व दो छोटे सिलेंडर हर समय मौजूद रहते हैं। मंडल प्रभारी राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि आक्सीजन सफेदाबाद स्थित सांरग कंपनी से खरीदी जाती है।
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड से लेकर भर्ती वार्ड के लिए 32 जैंबो व 22 छोटे ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध हैं। जिसमें अस्पताल प्रशासन द्वारा 16 रिजर्व जैंबो सिलेंडर होने की बात कही जा रही है। ऑक्सीजन की सप्लाई किसी संस्था से न कराकर बल्कि नकद मूल्य पर खरीद कर की जा रही है।
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ऑक्सीजन की दिक्कत न हो इसके लिए कुपोषण वार्ड के पास सेंट्रल ऑक्सीजन आपूर्ति सेक्शन मशीन कक्ष का निर्माण कर पाइप लाइन बिछाई गई है। इस कार्य पर करीब एक करोड़ रुपये की लागत आई थी। लेकिन हालात ये हैं कि दो साल से पूरा सिस्टम ठप पड़ा है।
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सूत्रों की माने तो ओटी में कुछ दिन तक आपूर्ति हुई बाद में वह भी बंद हो गई। नई बिल्डिंग के सभी वार्डों में आउटपुट की कोई व्यवस्था तक नहीं है। हैरत की बात यह है कि स्वास्थ्य कर्मचारियों को इसको ऑपरेट करने का प्रशिक्षण तक नहीं दिया गया। वार्ड में एक सिलेंडर रखा मिला, जो चालू हालत में था। शनिवार को अस्पताल में एक भी मरीज ऑक्सीजन लगा नहीं मिला।
जिले के सभी सीएचसी व जिला अस्पताल में पर्याप्त ऑक्सीजन के सिलेंडर हैं, अब तक ऑक्सीजन की कमी से किसी की जान जाने का मामला प्रकाश में नहीं आया है। जिले में लिक्विड ऑक्सीजन की आवश्यकता अभी नहीं पड़ती है, ट्रॉमा सेंटर चालू होने पर वेंटीलेटर पर इसकी जरूरत पड़ेगी। - डॉ. रमेश चंद्र सीएमओ
एजेंसी से नहीं नकद खरीदी जा रही आॅक्सीजन : चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि जिला अस्पताल में ऑक्सीजन की जरूरत रोजाना एक या दो मरीजों को पड़ती है जिसके सापेक्ष अस्पताल में पर्याप्त सिलेंडर हैं। ऑक्सीजन किसी एजेंसी के माध्यम से नहीं बल्कि नकद मूल्य पर अलग-अलग स्थानों से खरीदी जाती है।
जिले में 102 की 44 एंबुलेंस संचालित हो रही हैं, प्रत्येक एंबुलेंस में एक जैंबो व एक छोटे सिलेंडर की उपलब्धता है। वहीं 108 की 26 एंबुलेंस हैं। घायलों को जिला अस्पताल व ट्रॉमा तक ले जाने के लिए ज्यादा ऑक्सीजन की आवश्यकता होने के कारण इस एंबुलेंस में तीन बड़े व दो छोटे सिलेंडर हर समय मौजूद रहते हैं। मंडल प्रभारी राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि आक्सीजन सफेदाबाद स्थित सांरग कंपनी से खरीदी जाती है।