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Barabanki News: खरमास से चलते शुभ कार्य बंद, अब जनवरी में बजेगी शहनाई
Sat, 14 Dec 2024 11:35 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 14 Dec 2024 11:35 PM IST
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बाराबंकी। एकादशी से शुरू हुए सहालगों पर रविवार 15 दिसंबर से फिर ब्रेक लग जाएगा। रविवार से शुरू होने वाले खरमास के चलते अब शादी-विवाह, उपनयन, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे कोई भी मांगलिक व शुभ कार्य 14 जनवरी 2025 तक नहीं हो सकेंगे। इसके चलते अब शादी समारोह में शहनाइयां अगले साल जनवरी से ही बजेंगी।
पं. वीरेंद्र व्यास शास्त्री ने बताया कि 15 दिसंबर को रात 10 बजकर 10 मिनट पर सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही खरमास शुरू हो जाएगा। यह खरमास 14 जनवरी 2025 को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर समाप्त होगा। इसके बाद शुभ कार्य भी शुरू हो जाएंगे। कोटवाधाम मंदिर के महंत नीलेंद्र बख्श दास ने बताया कि 15 दिसंबर से खरमास की शुरुआत के बाद सभी तरह के मांगलिक कार्यक्रम बंद हो जाएंगे। केवल पूजा पाठ का आयोजन ही हो सकेगा। बताया कि अगले माह जनवरी में 16, 17, 18, 19, 20, 21, 23, 24, 26 और 27 तारीख विवाह के लिए उत्तम मुहूर्त रहेंगे।
कुंतेश्वर धाम मंदिर के पुजारी पं. शीतला प्रसाद ने बताया कि सूर्य जब बृहस्पति की राशि धनु या मीन में प्रवेश करता है तो उसे दिन से खरमास की शुरुआत होती है। धार्मिक ग्रंथों में खरमास का महीना शुभ नहीं माना गया है। इसके बावजूद खरमास में पूजा पाठ का महत्व दोगुना बढ़ जाता है ।
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पं. वीरेंद्र व्यास शास्त्री ने बताया कि 15 दिसंबर को रात 10 बजकर 10 मिनट पर सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही खरमास शुरू हो जाएगा। यह खरमास 14 जनवरी 2025 को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर समाप्त होगा। इसके बाद शुभ कार्य भी शुरू हो जाएंगे। कोटवाधाम मंदिर के महंत नीलेंद्र बख्श दास ने बताया कि 15 दिसंबर से खरमास की शुरुआत के बाद सभी तरह के मांगलिक कार्यक्रम बंद हो जाएंगे। केवल पूजा पाठ का आयोजन ही हो सकेगा। बताया कि अगले माह जनवरी में 16, 17, 18, 19, 20, 21, 23, 24, 26 और 27 तारीख विवाह के लिए उत्तम मुहूर्त रहेंगे।
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कुंतेश्वर धाम मंदिर के पुजारी पं. शीतला प्रसाद ने बताया कि सूर्य जब बृहस्पति की राशि धनु या मीन में प्रवेश करता है तो उसे दिन से खरमास की शुरुआत होती है। धार्मिक ग्रंथों में खरमास का महीना शुभ नहीं माना गया है। इसके बावजूद खरमास में पूजा पाठ का महत्व दोगुना बढ़ जाता है ।
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