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Barabanki News: सरकारी खजाने पर सेंधमारी की कोशिश, प्रशासन सतर्क
Wed, 06 May 2026 01:35 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 06 May 2026 01:35 AM IST
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बाराबंकी। जिले में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने की आहट मिलते ही विकास खंडों में अफरा-तफरी का माहौल है। अपनी कुर्सी बचाने और जाते-जाते सरकारी धन को खपाने के लिए सचिव और प्रधानों के बीच एक अघोषित गठजोड़ सक्रिय हो गया है। ग्राम पंचायतों के खातों में विभिन्न मदों के तहत बची धनराशि को निकालने के लिए फर्जी बिलों और अधूरे कार्यों के भुगतान का सहारा लिया जा रहा है।
हाल ही में जिले में एक ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है, जहां नियम-विरुद्ध तरीके से सादे बाउचर लगाकर साढ़े तीन लाख रुपये का भुगतान करा लिए गए। इस वित्तीय अनियमितता के उजागर होते ही प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। संबंधित ग्राम पंचायत के प्रधान और सचिव को नोटिस जारी कर तलब किया गया है।
इस कार्रवाई के बाद से अन्य विकास खंडों के कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों में हड़कंप मचा हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने अब पूरे जनपद में होने वाले भुगतानों पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी है। उच्चाधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बिना स्थलीय सत्यापन के किसी भी कार्य का अंतिम भुगतान न किया जाए। पुराने कार्यों के नाम पर नए बिल लगाने वालों पर तत्काल कार्रवाई हो। अंतिम समय में अनावश्यक रूप से निकाली जा रही बड़ी धनराशि की जांच की जाए।
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डीपीआरओ नितेश भोंडेले के अनुसार, कार्यकाल के अंतिम दिनों में होने वाली गड़बड़ी को रोकने के लिए ऑडिट प्रक्रिया को भी सख्त किया जा रहा है। यदि जांच में कोई भी दोषी पाया जाता है, तो रिकवरी के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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हाल ही में जिले में एक ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है, जहां नियम-विरुद्ध तरीके से सादे बाउचर लगाकर साढ़े तीन लाख रुपये का भुगतान करा लिए गए। इस वित्तीय अनियमितता के उजागर होते ही प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। संबंधित ग्राम पंचायत के प्रधान और सचिव को नोटिस जारी कर तलब किया गया है।
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इस कार्रवाई के बाद से अन्य विकास खंडों के कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों में हड़कंप मचा हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने अब पूरे जनपद में होने वाले भुगतानों पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी है। उच्चाधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बिना स्थलीय सत्यापन के किसी भी कार्य का अंतिम भुगतान न किया जाए। पुराने कार्यों के नाम पर नए बिल लगाने वालों पर तत्काल कार्रवाई हो। अंतिम समय में अनावश्यक रूप से निकाली जा रही बड़ी धनराशि की जांच की जाए।
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डीपीआरओ नितेश भोंडेले के अनुसार, कार्यकाल के अंतिम दिनों में होने वाली गड़बड़ी को रोकने के लिए ऑडिट प्रक्रिया को भी सख्त किया जा रहा है। यदि जांच में कोई भी दोषी पाया जाता है, तो रिकवरी के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।