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देश के इतिहास के साथ किया गया छल: मनोज
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12- बाराबंकी। रामनगर पीजी कॉलेज रामनगर परिसर में आयोजित अमृत महोत्सव समापन के अवसर पर सांस्कृतिक ?
- फोटो : BARABANKI
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रामनगर (बाराबंकी)। स्थानीय पीजी कॉलेज परिसर में तीन दिवसीय अमृत महोत्सव के समापन के अवसर पर प्रबुद्ध नागरिक संगोष्ठी के मुख्य वक्ता सह प्रांत प्रचारक मनोज, विशिष्ट अतिथि राजकुमार रत्नाकर सिंह, जिला प्रभारी विपिन राठौर, अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य कौशलेंद्र विक्रम मिश्र ने मां शारदे व भारत माता की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस मौके पर मुख्य वक्ता मनोज ने कहा कि यह महोत्सव भारत में ही नहीं पूरे विश्व में स्वाधीनता के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मनाया जा रहा है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से पूछा कि 15 अगस्त व 26 जनवरी में एक गाना बजता है। दे दी हमें आजादी बिना खडक बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल क्या यह गाना सही है या गलत। इसके बाद उन्होंने कहां 1857 में तात्या टोपे, मंगल पांडेय, रानी लक्ष्मीबाई ने भी स्वाधीनता का युद्ध लड़ा। यदि हम तभी आजाद हो जाते तो भारत अखंड होता, लेकिन नहीं हम 1947 में आजाद हुए। जिसमें हमारे देश के शूरवीर सपूतों ने भारत माता की चरणों में अपना जीवन न्योछावर किया। ऐसे लाखों देश भक्त हैं जिनके नाम हम नहीं जानते बल्कि हम कुछ ही नाम जानते हैं क्योंकि इतिहास लिखा नहीं लिखाया जाता है।
इस देश के इतिहास के साथ छल किया गया। इसलिए यह पढ़ाना और पढ़ना दोनों मजबूरी है साथ ही उन्होंने भारत में आए आक्रांताओं के नाम गिनाते हुए उनके द्वारा संपत्ति, शिक्षा, साहित्य, संस्कार को लूटने वालों के कृत्य भी उजागर किए। उन्होंने कहा लार्ड मैकाले भी भारत भ्रमण पर आया तो उसने हमारे देश में चल रहे गुरुकुल को बंद करवा कर कान्वेंट शिक्षा पद्धति लागूकर शिक्षा पर प्रहार किया। प्राचार्य ने कहा कि हमारा देश हजारों वर्ष तक गुलाम रहा उसी के कारण हमारे अंदर दीन हीन की भावना लगातार चलती रही जबकि आजादी में उन बलिदानों को हर पल हमें याद रखना चाहिए।
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कार्यक्रम में छात्रों द्वारा रंगोली, निबंध, गीत प्रतियोगिताएं भी हुई। इस अवसर पर डॉ.ओपी सिंह, डॉ.विश्वेश मिश्रा, डॉ.केके सिंह, डॉ. अखिलेश वर्मा, डॉ. रामकुमार सिंह, डॉ. अकबाल बहादुर सिंह, डॉ. ऋषिकेश मिश्रा, डॉ. मंगली शुक्ला, खंड प्रचारक आशुतोष सौरभ सिंह, अंबिकेश शर्मा, शिवेश राजा उपस्थित रहे। संचालन डॉ. अखिलेश पटेल ने किया।
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इस मौके पर मुख्य वक्ता मनोज ने कहा कि यह महोत्सव भारत में ही नहीं पूरे विश्व में स्वाधीनता के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मनाया जा रहा है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से पूछा कि 15 अगस्त व 26 जनवरी में एक गाना बजता है। दे दी हमें आजादी बिना खडक बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल क्या यह गाना सही है या गलत। इसके बाद उन्होंने कहां 1857 में तात्या टोपे, मंगल पांडेय, रानी लक्ष्मीबाई ने भी स्वाधीनता का युद्ध लड़ा। यदि हम तभी आजाद हो जाते तो भारत अखंड होता, लेकिन नहीं हम 1947 में आजाद हुए। जिसमें हमारे देश के शूरवीर सपूतों ने भारत माता की चरणों में अपना जीवन न्योछावर किया। ऐसे लाखों देश भक्त हैं जिनके नाम हम नहीं जानते बल्कि हम कुछ ही नाम जानते हैं क्योंकि इतिहास लिखा नहीं लिखाया जाता है।
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इस देश के इतिहास के साथ छल किया गया। इसलिए यह पढ़ाना और पढ़ना दोनों मजबूरी है साथ ही उन्होंने भारत में आए आक्रांताओं के नाम गिनाते हुए उनके द्वारा संपत्ति, शिक्षा, साहित्य, संस्कार को लूटने वालों के कृत्य भी उजागर किए। उन्होंने कहा लार्ड मैकाले भी भारत भ्रमण पर आया तो उसने हमारे देश में चल रहे गुरुकुल को बंद करवा कर कान्वेंट शिक्षा पद्धति लागूकर शिक्षा पर प्रहार किया। प्राचार्य ने कहा कि हमारा देश हजारों वर्ष तक गुलाम रहा उसी के कारण हमारे अंदर दीन हीन की भावना लगातार चलती रही जबकि आजादी में उन बलिदानों को हर पल हमें याद रखना चाहिए।
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कार्यक्रम में छात्रों द्वारा रंगोली, निबंध, गीत प्रतियोगिताएं भी हुई। इस अवसर पर डॉ.ओपी सिंह, डॉ.विश्वेश मिश्रा, डॉ.केके सिंह, डॉ. अखिलेश वर्मा, डॉ. रामकुमार सिंह, डॉ. अकबाल बहादुर सिंह, डॉ. ऋषिकेश मिश्रा, डॉ. मंगली शुक्ला, खंड प्रचारक आशुतोष सौरभ सिंह, अंबिकेश शर्मा, शिवेश राजा उपस्थित रहे। संचालन डॉ. अखिलेश पटेल ने किया।