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Barabanki News: हिंदी कविता को नई दिशा देने में अज्ञेय का योगदान महत्वपूर्ण
Fri, 08 Mar 2024 12:46 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Fri, 08 Mar 2024 12:46 AM IST
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सुल्तानपुर। हिंदी कविता को नई दिशा देने में अज्ञेय का योगदान सबसे बड़ा है। काव्य में नवीन प्रयोग करने वाले अज्ञेय भविष्यद्रष्टा साहित्यकार थे। उन्होंने समाज और पाठक को केंद्र में रखकर रचनाएं की हैं। यह बातें असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह ने कहीं।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से बृहस्पतिवार को अज्ञेय जयंती पर आयोजित संगोष्ठी को वे बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। अध्यक्षता करते हुए परिषद के जिलाध्यक्ष मथुरा प्रसाद सिंह जटायु ने कहा कि अज्ञेय की रचनाएं आत्मनिष्ठ और व्यक्तिवादी हैं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने किसान आंदोलन की अलख जगाई और महीनों तक गांव गांव घूमे। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ़ सुशील कुमार पांडेय साहित्येंदु ने कहा कि अज्ञेय ने अपने समूचे काव्य में नवनिर्मित उपमानों के प्रयोग का जो कौशल दिखाया है, वह पाठक को पूरी तरह चमत्कृत कर देता है।
संत तुलसीदास पीजी कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ़ करुणेश भट्ट ने कहा कि अज्ञेय विचारधारात्मक आग्रहों के आधार पर नहीं बल्कि संप्रेषण के लिए लिखते थे।
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अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से बृहस्पतिवार को अज्ञेय जयंती पर आयोजित संगोष्ठी को वे बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। अध्यक्षता करते हुए परिषद के जिलाध्यक्ष मथुरा प्रसाद सिंह जटायु ने कहा कि अज्ञेय की रचनाएं आत्मनिष्ठ और व्यक्तिवादी हैं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने किसान आंदोलन की अलख जगाई और महीनों तक गांव गांव घूमे। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ़ सुशील कुमार पांडेय साहित्येंदु ने कहा कि अज्ञेय ने अपने समूचे काव्य में नवनिर्मित उपमानों के प्रयोग का जो कौशल दिखाया है, वह पाठक को पूरी तरह चमत्कृत कर देता है।
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संत तुलसीदास पीजी कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ़ करुणेश भट्ट ने कहा कि अज्ञेय विचारधारात्मक आग्रहों के आधार पर नहीं बल्कि संप्रेषण के लिए लिखते थे।