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‘सूफी संगीत कभी बाजारू नहीं होता’
Barabanki
Updated Tue, 21 Oct 2014 05:31 AM IST
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देवा (बाराबंकी)। मशहूर पंजाबी सूफी गायक हंसराज हंस का कहना है कि संगीत अपने आप में जादू है। अगर चल जाए तो अच्छे-अच्छे को अपना दीवाना बना देता है। सूफी संगीत कभी बाजारू नहीं होता, यह हमेशा चलता रहता है। कहा कि अश्लीलता संगीत व जिंदगी दोनोें के लिए अच्छी नहीं है। हिंदुस्तान की संस्कृति का पूरा ध्यान रखना चाहिए। फिल्म कच्चे धागे में खाली दिल नइयो, जांन भी मंगदा, इश्क द गली बिच कोई-कोई लंगदा...गीत गाकर रातोंरात स्टार बने हंसराज हंस ने देवा महोत्सव के आठवें दिन सूफी नाइट कार्यक्रम से कुछ समय निकाल कर ग्रीन हाउस में अमर उजाला से बातचीत की। कहा कि बचपन से ही गा रहा हूं, परिवार का पहला बंदा हूं जो कि गायक हूं। हंसराज हंस ने कहा कि सूफी संगीत कभी बाजारू नहीं होता, यह चलता ही रहता है। अजमेर के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के जमाने से सूफी संगीत अब तक लगातार चल रहा है।
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