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तीन होनहारों का आईआईटी में चयन
Barabanki
Updated Sun, 23 Jun 2013 05:30 AM IST
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बाराबंकी। देश की प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा आईआईटी जेईई (एडवांस) में तीन मेधावियों ने जगह बनाकर जिले का नाम रोशन किया है। इन मेधावियों का सपना आईएएस व आईईएस बन कर देश व समाज की सेवा करना हैं।
ग्राम मंशापुरवा थाना जहांगीराबाद निवासी शिव विशाल वर्मा के पुत्र आकाश ने आईआईटी जेईई (एडवांस) के ओबीसी कैटेगरी में 225वीं रैंक हासिल की है। ऑल इंडिया रैंक में आकाश को 1849 वीं रैंक मिली है। वह कंप्यूटर इंजीनियर बनना चाहता है। पिता शिव विशाल वर्मा कृषक हैं जबकि मां अनीता वर्मा गृहणी हैं। आकाश का आईआईटी में प्रवेश का दूसरा प्रयास था। शहर के मोहल्ला धनोखर निवासी दिव्यांशु सिंह ने आईआईटी प्रवेश परीक्षा में ओबीसी कैटेगरी में 1668वीं रैंक हासिल की है। इनके पिता अतुल सिंह का काफी पहले ही देहांत हो गया था। पारिवारिक जिम्मेदारी मां प्रमिला सिंह पर ही आ गईं। वह आईआईटी से मैकेनिकल इंजीनियर बनकर आईईएस बनना चाहते हैं। यह दिव्यांशु का दूसरा प्रयास था। वह अपनी सफलता का श्रेय मां प्रमिला को देते हैं। दिव्यांशु को क्रिकेट खेलना पसंद है।
तहसील रामनगर के गांव अमोली कला निवासी मृदुल राकेश मिश्र ने भी आईआईटी प्रवेश परीक्षा में 8835वीं रैंक हासिल कर जिले का गौरव बढ़ाया है। वह मैकेनिकल से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर आईएएस बनना चाहते हैं। वे बताते हैं कि उन्हें गणित विषय अधिक प्रिय है। इन्हें इंटरनेट में रुचि है। वह बताते हैं कि उन्होंने आईआईटी में सफलता के लिए कोचिंग के अलावा छह घंटे पढ़ाई की। आईआईटी में सफलता का यह इनका दूसरा प्रयास था।
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ग्राम मंशापुरवा थाना जहांगीराबाद निवासी शिव विशाल वर्मा के पुत्र आकाश ने आईआईटी जेईई (एडवांस) के ओबीसी कैटेगरी में 225वीं रैंक हासिल की है। ऑल इंडिया रैंक में आकाश को 1849 वीं रैंक मिली है। वह कंप्यूटर इंजीनियर बनना चाहता है। पिता शिव विशाल वर्मा कृषक हैं जबकि मां अनीता वर्मा गृहणी हैं। आकाश का आईआईटी में प्रवेश का दूसरा प्रयास था। शहर के मोहल्ला धनोखर निवासी दिव्यांशु सिंह ने आईआईटी प्रवेश परीक्षा में ओबीसी कैटेगरी में 1668वीं रैंक हासिल की है। इनके पिता अतुल सिंह का काफी पहले ही देहांत हो गया था। पारिवारिक जिम्मेदारी मां प्रमिला सिंह पर ही आ गईं। वह आईआईटी से मैकेनिकल इंजीनियर बनकर आईईएस बनना चाहते हैं। यह दिव्यांशु का दूसरा प्रयास था। वह अपनी सफलता का श्रेय मां प्रमिला को देते हैं। दिव्यांशु को क्रिकेट खेलना पसंद है।
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तहसील रामनगर के गांव अमोली कला निवासी मृदुल राकेश मिश्र ने भी आईआईटी प्रवेश परीक्षा में 8835वीं रैंक हासिल कर जिले का गौरव बढ़ाया है। वह मैकेनिकल से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर आईएएस बनना चाहते हैं। वे बताते हैं कि उन्हें गणित विषय अधिक प्रिय है। इन्हें इंटरनेट में रुचि है। वह बताते हैं कि उन्होंने आईआईटी में सफलता के लिए कोचिंग के अलावा छह घंटे पढ़ाई की। आईआईटी में सफलता का यह इनका दूसरा प्रयास था।
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