{"_id":"125-47372","slug":"Barabanki-47372-125","type":"story","status":"publish","title_hn":"कड़ी सुरक्षा के बीच आज दफनाये जाएंगे ताजिये","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कड़ी सुरक्षा के बीच आज दफनाये जाएंगे ताजिये
Barabanki
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाराबंकी। दसवीं मोहर्रम के जुलूस को लेकर पुलिस ने चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था की है। मोहर्रम के जुलूस को लेकर शहर में जगह-जगह क्लोज सर्किट कैमरे लगाए गए हैं। शनिवार शाम उच्चाधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। शहर में मुख्य रूप से सिविल लाइंस कर्बला में ताजिये दफन किये जाएंगे और जुलूस घंटाघर से धनोखर होते हुए शहर के मुख्य मार्गों से यहां पहुंचेगा।
इससे पूर्व नौवीं मोहर्रम पर ईशा की नमाज के बाद अजादारों ने घरों की चौक और इमामबाड़ाें पर ताजिये रखकर करबला के शहीद हजरत इमाम हुसैन से अपनी मोहब्बत और अकीदे का इजहार किया। इसके साथ ही मजलिस व मातम में शिरकत की।
शनिवार को इमामबाड़ा मोहम्मद हुसैन, इमामबाड़ा इम्तियाज अली, इमामबाड़ा रक्खू खां, इमामबाड़ा रज्जाक साहब, इमामबाड़ा गढ़ी में भी अलम और ताजिये रखे गए। फजलुर्रहमान पार्क, घंटाघर, कानून गोयान, अब्दुल गनी राईन साहब, चंदना, पीर बटावन, कटरा, रसूलपुर, लखपेडाबाग, बेगमगंज व आजाद नगर आदि मोहल्लों में लोगों ने इमामबाड़ा व घरों को सजा कर ताजिये रखे। इमामबाड़ा इम्तियाज अली एक मजलिस मुकद्दस हसनैन, गरीबैन जिक्रे कर्बला की गई। जिसे खिताब करते हुए हजरत मौलाना जाहिद निजामी ने कहा कि कर्बला के शहीदों ने सब्र व सच्चाई का दामन नहीं छोड़ा। इसी वजह से यजीदियत कब की मिट चुकी है पर हुसैनियत आज भी जिंदा हैं। मोर्हरम कमेटी के खलीफा अब्दुल ताज बाबा राइन ने बताया कि बारगाहे इमाम अली मकाम के तुफैल ए मोहम्मद के जरिए अपनी मुरादों को पूरी होने के लिए चौकियां भरी। चंदना स्थिति रहमतुल्ला वारसी के कदीमी लकड़ी के बने ताजिये व चांद ढाबे वाले की ताजिये देखने को भीड़ लगी रही। इस मौके पर मोहम्मद हसनैन, हाफिज इशरत अली अंसारी, मो. इस्माइल राइन, मोहर्रम अली, ताज वारसी , कुतुबुद्दीन, जुनेद अंसारी, ओसामा ने लंगर तकसीम किया। अकीदत मंदों ने इमामबाड़ाें में भी सबील और लंगर का इंतजाम किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
इससे पूर्व नौवीं मोहर्रम पर ईशा की नमाज के बाद अजादारों ने घरों की चौक और इमामबाड़ाें पर ताजिये रखकर करबला के शहीद हजरत इमाम हुसैन से अपनी मोहब्बत और अकीदे का इजहार किया। इसके साथ ही मजलिस व मातम में शिरकत की।
विज्ञापन
शनिवार को इमामबाड़ा मोहम्मद हुसैन, इमामबाड़ा इम्तियाज अली, इमामबाड़ा रक्खू खां, इमामबाड़ा रज्जाक साहब, इमामबाड़ा गढ़ी में भी अलम और ताजिये रखे गए। फजलुर्रहमान पार्क, घंटाघर, कानून गोयान, अब्दुल गनी राईन साहब, चंदना, पीर बटावन, कटरा, रसूलपुर, लखपेडाबाग, बेगमगंज व आजाद नगर आदि मोहल्लों में लोगों ने इमामबाड़ा व घरों को सजा कर ताजिये रखे। इमामबाड़ा इम्तियाज अली एक मजलिस मुकद्दस हसनैन, गरीबैन जिक्रे कर्बला की गई। जिसे खिताब करते हुए हजरत मौलाना जाहिद निजामी ने कहा कि कर्बला के शहीदों ने सब्र व सच्चाई का दामन नहीं छोड़ा। इसी वजह से यजीदियत कब की मिट चुकी है पर हुसैनियत आज भी जिंदा हैं। मोर्हरम कमेटी के खलीफा अब्दुल ताज बाबा राइन ने बताया कि बारगाहे इमाम अली मकाम के तुफैल ए मोहम्मद के जरिए अपनी मुरादों को पूरी होने के लिए चौकियां भरी। चंदना स्थिति रहमतुल्ला वारसी के कदीमी लकड़ी के बने ताजिये व चांद ढाबे वाले की ताजिये देखने को भीड़ लगी रही। इस मौके पर मोहम्मद हसनैन, हाफिज इशरत अली अंसारी, मो. इस्माइल राइन, मोहर्रम अली, ताज वारसी , कुतुबुद्दीन, जुनेद अंसारी, ओसामा ने लंगर तकसीम किया। अकीदत मंदों ने इमामबाड़ाें में भी सबील और लंगर का इंतजाम किया।
विज्ञापन