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मुंशी प्रेेमचंद के साहित्य युगों-युगों तक करेगा निर्देशित
Updated Thu, 09 Aug 2018 01:07 AM IST
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‘हिंदी साहित्य का ध्रुवतारा हैं प्रेमचंद’
क्रासर
-ज्योरी स्थित महाविद्यालय में हुआ आयोजन
फोटो:- 08 पी
अमर उजाला ब्यूरो
मसौली(बाराबंकी)। मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य के ऐसे लेखक थे जिनका साहित्य युगों-युगों तक भावी पीढ़ियों को दिशा प्रदान करता रहेगा। यह उद्गार वीणा सुधाकर ओझा महाविद्यालय ज्योरी, मसौली में आयोजित मुंशी प्रेमचंद जयंती समारोह की अध्यक्षता करते हुए डॉ.भगवान वत्स ने व्यक्त किये। समारोह के मुख्य वक्ता डॉ. ब्रजकिशोर पांडेय ने कहा कि प्रेमचंद का दृष्टिकोण सुधारात्मक है। उनके पात्र आदर्श एवं यथार्थ के धरातल के अनुयायी हैं। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. श्यामसुंदर दीक्षित ने कहा कि साहित्य के अध्येता को प्रेमचंद के साहित्य में स्वानुभूति की प्रतीति होती है। कहानीकार डॉ. विनय दास ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद के साहित्य में सर्वहारा की आवाज तथा मानवीय संवेदना का विचित्र चित्रण हुआ है। वरिष्ठ साहित्यकार अजय सिंह ने प्रेमचंद के साहित्य से संबंधित शोधोपयोगी पुस्तकों एवं पत्र पत्रिकाओं पर प्रकाश डाला। डॉ. ऋषिकेश सिंह ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद के साहित्य में आदर्शोन्मुख यथार्थवाद विद्यमान है। डॉ.वंदना मिश्रा ने प्रेमचंद को हिंदी साहित्य का ध्रुवतारा कहा। समारोह में डॉ. बलराम सिंह, डॉ.खुशबू श्रीवास्तव एवं पुष्पेंद्र ने अपने काव्य पाठ से श्रोताओं का मन मोहा। इस मौके पर डॉ.नन्हे सिंह, डॉ.एके पांडेय, डॉ.राम सुरेश, डॉ. दिनेश सिंह, हरिनारायण पांडेय, प्राचार्य डॉ.बलराम वर्मा, चीफ प्रॉक्टर डॉ.नवीन पांडेय, राम मिलन वर्मा, राजेश शुक्ला, सुरेश यादव, रमेश रावत, श्रवण कुमार, कमला प्रसाद समेत महाविद्यालय के शिक्षक शिक्षिकाएं व छात्र उपस्थित रहे।
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क्रासर
-ज्योरी स्थित महाविद्यालय में हुआ आयोजन
फोटो:- 08 पी
अमर उजाला ब्यूरो
मसौली(बाराबंकी)। मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य के ऐसे लेखक थे जिनका साहित्य युगों-युगों तक भावी पीढ़ियों को दिशा प्रदान करता रहेगा। यह उद्गार वीणा सुधाकर ओझा महाविद्यालय ज्योरी, मसौली में आयोजित मुंशी प्रेमचंद जयंती समारोह की अध्यक्षता करते हुए डॉ.भगवान वत्स ने व्यक्त किये। समारोह के मुख्य वक्ता डॉ. ब्रजकिशोर पांडेय ने कहा कि प्रेमचंद का दृष्टिकोण सुधारात्मक है। उनके पात्र आदर्श एवं यथार्थ के धरातल के अनुयायी हैं। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. श्यामसुंदर दीक्षित ने कहा कि साहित्य के अध्येता को प्रेमचंद के साहित्य में स्वानुभूति की प्रतीति होती है। कहानीकार डॉ. विनय दास ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद के साहित्य में सर्वहारा की आवाज तथा मानवीय संवेदना का विचित्र चित्रण हुआ है। वरिष्ठ साहित्यकार अजय सिंह ने प्रेमचंद के साहित्य से संबंधित शोधोपयोगी पुस्तकों एवं पत्र पत्रिकाओं पर प्रकाश डाला। डॉ. ऋषिकेश सिंह ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद के साहित्य में आदर्शोन्मुख यथार्थवाद विद्यमान है। डॉ.वंदना मिश्रा ने प्रेमचंद को हिंदी साहित्य का ध्रुवतारा कहा। समारोह में डॉ. बलराम सिंह, डॉ.खुशबू श्रीवास्तव एवं पुष्पेंद्र ने अपने काव्य पाठ से श्रोताओं का मन मोहा। इस मौके पर डॉ.नन्हे सिंह, डॉ.एके पांडेय, डॉ.राम सुरेश, डॉ. दिनेश सिंह, हरिनारायण पांडेय, प्राचार्य डॉ.बलराम वर्मा, चीफ प्रॉक्टर डॉ.नवीन पांडेय, राम मिलन वर्मा, राजेश शुक्ला, सुरेश यादव, रमेश रावत, श्रवण कुमार, कमला प्रसाद समेत महाविद्यालय के शिक्षक शिक्षिकाएं व छात्र उपस्थित रहे।