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Barabanki News: रेलवे स्टेशन का 70 फीसदी काम बाकी, यात्री बेहाल
Thu, 14 Aug 2025 12:14 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 14 Aug 2025 12:14 AM IST
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बाराबंकी। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत बाराबंकी रेलवे स्टेशन का सुस्त रफ्तार से हो रहा जीर्णोद्धार काम रेलवे यात्रियों की परेशानी बढ़ा रहा है। स्टेशन पर ढहाए जा चुके आधे से अधिक पुराने भवनों के कारण पूरे स्टेशन पर व्याप्त भारी अव्यवस्था से हर दिन करीब दस हजार यात्रियों को जूझना पड़ता है। निर्माण कार्य को मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है लेकिन डेढ़ साल में अभी तक महज 30 फीसदी काम ही हो पाया है। अब बचे हुए सात माह में शेष 70 फीसदी काम कैसे पूरा होगा, इसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
अगस्त 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 33 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का वर्चुअल शिलान्यास किया था। योजना के तहत स्टेशन पर नया भवन, पोर्टिको, पार्किंग और यात्रियों से जुड़ी अत्याधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई जानी हैं। लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही से जिस धीमी रफ्तार के साथ निर्माण कार्य हो रहा है, उससे तय समय सीमा में प्रोजेक्ट पूरा होना सवालों के घेरे में आ गया है।
स्टेशन भवन का अधिकांश हिस्सा ढह चुका है, चारों ओर मलबा और मिट्टी के ढेर फैले हैं। इस कारण स्टेशन पर बैठने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ट्रेन के इंतजार में यात्रियों को घंटों प्लेटफॉर्म पर खड़े होकर अथवा फर्श पर बैठने की परेशानी उठाना पड़ रही है। बुनियादी सुविधाएं बेहद सीमित होने से स्टेशन अधीक्षक तक को कर्मचारियों के कमरे में बैठकर काम करना पड़ रहा है।
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स्टेशन अधीक्षक अरुण रायजादा ने बताया कि रेलवे स्टेशन का निर्माण मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। पुराना भवन को ढहाने का काम पूरा हो गया है। पूरा प्रयास है कि प्रस्तावित निर्माण कार्य तय समय सीमा में करा लिया जाए।
153 साल पुराना है रेलवे स्टेशन
बाराबंकी रेलवे स्टेशन का इतिहास करीब 153 साल पुराना है। बाराबंकी रेलवे स्टेशन की शुरुआत एक अप्रैल 1872 को हुआ था। यहां से सबसे पहले बुढ़वल तक 17 मील रेलवे लाइन संचालित हुई थी। इस रेलवे स्टेशन का पुर्ननिर्माण 83 साल पहले 1940 के हुआ था। वित्तीय वर्ष 2002-03 में इसका विद्युतीकरण हुआ था। अब इसे लखनऊ से छपरा तक चार लाइनों से जोड़ा जाना है।
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अगस्त 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 33 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का वर्चुअल शिलान्यास किया था। योजना के तहत स्टेशन पर नया भवन, पोर्टिको, पार्किंग और यात्रियों से जुड़ी अत्याधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई जानी हैं। लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही से जिस धीमी रफ्तार के साथ निर्माण कार्य हो रहा है, उससे तय समय सीमा में प्रोजेक्ट पूरा होना सवालों के घेरे में आ गया है।
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स्टेशन भवन का अधिकांश हिस्सा ढह चुका है, चारों ओर मलबा और मिट्टी के ढेर फैले हैं। इस कारण स्टेशन पर बैठने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ट्रेन के इंतजार में यात्रियों को घंटों प्लेटफॉर्म पर खड़े होकर अथवा फर्श पर बैठने की परेशानी उठाना पड़ रही है। बुनियादी सुविधाएं बेहद सीमित होने से स्टेशन अधीक्षक तक को कर्मचारियों के कमरे में बैठकर काम करना पड़ रहा है।
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स्टेशन अधीक्षक अरुण रायजादा ने बताया कि रेलवे स्टेशन का निर्माण मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। पुराना भवन को ढहाने का काम पूरा हो गया है। पूरा प्रयास है कि प्रस्तावित निर्माण कार्य तय समय सीमा में करा लिया जाए।
153 साल पुराना है रेलवे स्टेशन
बाराबंकी रेलवे स्टेशन का इतिहास करीब 153 साल पुराना है। बाराबंकी रेलवे स्टेशन की शुरुआत एक अप्रैल 1872 को हुआ था। यहां से सबसे पहले बुढ़वल तक 17 मील रेलवे लाइन संचालित हुई थी। इस रेलवे स्टेशन का पुर्ननिर्माण 83 साल पहले 1940 के हुआ था। वित्तीय वर्ष 2002-03 में इसका विद्युतीकरण हुआ था। अब इसे लखनऊ से छपरा तक चार लाइनों से जोड़ा जाना है।