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Barabanki News: हेतमापुर में 70 मकान और 1000 बीघा जमीन सरयू नदी में समाई

Fri, 02 Oct 2026 01:41 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Fri, 02 Oct 2026 01:41 AM IST
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70 houses and 1,000 bighas of land in Hetmapur were swallowed by the Saryu River.
कोटवाधाम क्षेत्र में कोठीडीहा के पास कटान करती सरयू।
कोटवाधाम/सूरतगंज। दो महीने तक सरयू का बढ़ता-घटता जलस्तर तटीय गांवों के लिए मुसीबत बना रहा। अब नदी का पानी उतरने से लोगों ने राहत की सांस ली है, लेकिन कटान ने नई चिंता खड़ी कर दी है। रामनगर के हेतमापुर में नदी अब तक आधा गांव निगल चुकी है। बाबा नारायण दास का मंदिर भी करीब 15 दिन से कटान के मुहाने पर था। बुधवार रात मंदिर के आसपास कटान तेज होने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई। आधी रात के बाद जलस्तर घटने लगा, जिससे मंदिर नदी में समाने से फिलहाल बच गया। हालांकि मंदिर के बरामदे की फर्श नदी की ओर से धंस गई है और खतरा अभी टला नहीं है।
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हेतमापुर में करीब एक महीने से नदी लगातार किनारा काट रही है। अब तक पुराना दूरभाष केंद्र, एक मंदिर, करीब 70 मकान, पशु चिकित्सालय और लगभग 1000 बीघा जमीन नदी में समा चुकी है। बुधवार रात हालात इतने गंभीर हो गए थे कि मंदिर के भी नदी में समाने की आशंका थी। रात करीब 12 बजे के बाद पानी घटना शुरू हुआ। बृहस्पतिवार सुबह नदी का जलस्तर खतरे के निशान से छह सेंटीमीटर ऊपर था, जबकि पहले यह 30 सेंटीमीटर ऊपर था। शाम तक जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आने की स्थिति में पहुंच गया।
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पानी घटने के साथ तटवर्ती इलाकों में कटान तेज हो गई है। रामनगर के बाबा का पुरवा, सुंदरनगर, परशुरामपुर और फाजिलपुर समेत करीब 10 गांवों में अभी जगह-जगह पानी भरा है। प्रशासन के अनुसार रामनगर, सिरौलीगौसपुर और रामसनेहीघाट तहसील के 38 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। करीब 1635 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हुई है। अब जलस्तर घटने के बाद कटान प्रभावित गांवों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
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एडीएम निरंकार सिंह ने बताया कि बाढ़ग्रस्त इलाकों की निगरानी की जा रही है। अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड शशिकांत सिंह ने बताया कि सरयू का जलस्तर घटा है और तराई क्षेत्र पर नजर रखी जा रही है। बाढ़ प्रभावित लोगों को लगातार मदद दी जा रही है।

पानी घटते ही घुटरू-कोठीडीहा में बढ़ी कटान
कोटवाधाम। सिरौली गौसपुर क्षेत्र के घुटरू और कोठीडीहा गांव के पास जलस्तर घटने के साथ कटान तेज हो गई है। ग्रामीणों के अनुसार करीब एक माह से जारी कटान में किसानों की लगभग 25 बीघे खेती योग्य जमीन नदी में समा चुकी है। कोठीडीहा निवासी दयाराम और मंशाराम ने बताया कि नदी इसी तरह किनारा काटती रही तो जल्द आबादी भी इसकी चपेट में आ सकती है। ग्रामीणों ने समय रहते कटान रोकने के लिए बचाव कार्य शुरू कराने की मांग की है।

कोटवाधाम क्षेत्र में कोठीडीहा के पास कटान करती सरयू।

कोटवाधाम क्षेत्र में कोठीडीहा के पास कटान करती सरयू।

कोटवाधाम क्षेत्र में कोठीडीहा के पास कटान करती सरयू।

कोटवाधाम क्षेत्र में कोठीडीहा के पास कटान करती सरयू।

कोटवाधाम क्षेत्र में कोठीडीहा के पास कटान करती सरयू।

कोटवाधाम क्षेत्र में कोठीडीहा के पास कटान करती सरयू।

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