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तराइ में घाघरा की तबाही ने बिगाड़े हालात, बाढ़ पीड़ितों का बढ़ा संकट
Updated Sun, 19 Aug 2018 10:34 PM IST
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लोगों को परेशानी
- फोटो : Amarujala
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दाने-दाने को मोहताज हो गए बाढ़ पीड़ित
बाराबंकी। नेपाली पानी से तराई में मची तबाही के बाद अब बाढ़ग्रस्त इलाकों के हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। बाढ़ पीड़ितों के सामने दो वक्त की रोटी जुटाने का संकट खड़ा हो गया है।
राहत के नाम पर जो सामग्री बांटी गई थी वह खत्म हो चुकी है। घरों में रखा अनाज आदि घाघरा बहा ले गई। बाढ़ पीड़ित परिवार इधर-उधर से राशन जुटाकर किसी तरह पेट भर रहे हैं। तमाम परिवार तो दाने-दाने के मोहताज हैं।
इसके अलावा खाना पकाने के लिए लकड़ियां तक नहीं मिल पा रही हैं क्योंकि चारों तरफ पानी भरा है। ये अलग बात है कि नदी का पानी एकबार फिर से घटने लगा है। मगर जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से 58 सेमी ऊपर है।
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घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान 106.076 से बढ़कर 106.656 पर पहुंच गया है। नदी का पानी अभी भी खतरे के निशान से 58 सेमी ऊपर रहा है।
नेपाली पानी ने तराई में ऐसी तबाही मचाई है कि पिछले 20 दिन से बाढ़ पीड़ितों की जिंदगी बंधे पर कट रही है। शनिवार को बाढ़ग्रस्त इलाकों का जो नजारा दिखा तो आंखों में पानी भर आया।
रायपुर, परसावल, कमियार आदि गांवों के जो लोग परिवारीजनों के साथ बंधे पर रह रहे हैं उनका राशन पानी खत्म हो गया है।
चूल्हा जलाने के लिए सुखी लकड़ियां तक नहीं मिल रही हैं। राहत सामग्री पूरी खत्म हो चुकी है। अब पेयजल तक नहीं मिल पा रहा है।
तिरपाल के नीचे गुजारा कर रहे इन परिवारों को अभी घर लौटने में वक्त लगेगा क्योंकि गांवों में भरा पानी कम होने में अभी वक्त लगेगा। इन सब हालात के बावजूद बाढ़ पीड़ितों को प्रशासन से अपेक्षित मदद नहीं मिल पा रही है।
बाढ़ग्रस्त गांव रायपुर के हरिश्चंद्र की आंखों में आंसू भरे थे। बोले, भैया क्या बताएं सब कुछ तो घाघरा में समा गया है। अब तो कुछ भी नहीं बचा है। ऐसे में कैसे जीवन कट रहा है, समझा जा सकता है।
सनावा की कलावती ने बताया कि, घर में दो से तीन फिट तक पानी भरा है। अभी तक पानी की धारा कम नहीं हुई है। राहत के नाम पर जो भी सामग्री मिली थी वो खत्म हो चुकी है। चूल्हा जलाने के लिए लकड़ियां भी नहीं हैं, जो हैं वो भीगी हैं।
गोबरहा के गुरुदीन ने बताया कि, लोग किसी तरह रूखी सूखी खाकर जिंदा हैं। हर तरफ पानी ही पानी है। घरों के साथ खेत की फसल, अनाज सब बर्बाद हो गया।
परसावल के दुखी का कहना है कि, उनका घर भी पास ही है। एक अजीब सी हालत थी। घर का सामान बचाने की कोशिश करता तो दुकान का माल बह रहा था और दुकान का सामान बचा रहा था तो घर का सामान बह गया। बाढ़ ने पूरी तरह से तबाह कर दिया है।
एडीएम संदीप गुप्ता का कहना है कि, नदी का पानी तेजी से घट रहा है, लेकिन जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से 58 सेंटीमीटर ऊपर है। जिन गांवों में पानी भरा था उनमें से भी पानी कम हो रहा है।
बाढ़ पीड़ितों में समय-समय पर राहत सामग्री का वितरण कराया जाता है। मवेशियों के चारे की भी व्यवस्था कराई गई है। बाढ़ पीड़ितों को यथासंभव मदद की जा रही है।
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बाराबंकी। नेपाली पानी से तराई में मची तबाही के बाद अब बाढ़ग्रस्त इलाकों के हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। बाढ़ पीड़ितों के सामने दो वक्त की रोटी जुटाने का संकट खड़ा हो गया है।
राहत के नाम पर जो सामग्री बांटी गई थी वह खत्म हो चुकी है। घरों में रखा अनाज आदि घाघरा बहा ले गई। बाढ़ पीड़ित परिवार इधर-उधर से राशन जुटाकर किसी तरह पेट भर रहे हैं। तमाम परिवार तो दाने-दाने के मोहताज हैं।
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इसके अलावा खाना पकाने के लिए लकड़ियां तक नहीं मिल पा रही हैं क्योंकि चारों तरफ पानी भरा है। ये अलग बात है कि नदी का पानी एकबार फिर से घटने लगा है। मगर जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से 58 सेमी ऊपर है।
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घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान 106.076 से बढ़कर 106.656 पर पहुंच गया है। नदी का पानी अभी भी खतरे के निशान से 58 सेमी ऊपर रहा है।
नेपाली पानी ने तराई में ऐसी तबाही मचाई है कि पिछले 20 दिन से बाढ़ पीड़ितों की जिंदगी बंधे पर कट रही है। शनिवार को बाढ़ग्रस्त इलाकों का जो नजारा दिखा तो आंखों में पानी भर आया।
रायपुर, परसावल, कमियार आदि गांवों के जो लोग परिवारीजनों के साथ बंधे पर रह रहे हैं उनका राशन पानी खत्म हो गया है।
चूल्हा जलाने के लिए सुखी लकड़ियां तक नहीं मिल रही हैं। राहत सामग्री पूरी खत्म हो चुकी है। अब पेयजल तक नहीं मिल पा रहा है।
तिरपाल के नीचे गुजारा कर रहे इन परिवारों को अभी घर लौटने में वक्त लगेगा क्योंकि गांवों में भरा पानी कम होने में अभी वक्त लगेगा। इन सब हालात के बावजूद बाढ़ पीड़ितों को प्रशासन से अपेक्षित मदद नहीं मिल पा रही है।
बाढ़ग्रस्त गांव रायपुर के हरिश्चंद्र की आंखों में आंसू भरे थे। बोले, भैया क्या बताएं सब कुछ तो घाघरा में समा गया है। अब तो कुछ भी नहीं बचा है। ऐसे में कैसे जीवन कट रहा है, समझा जा सकता है।
सनावा की कलावती ने बताया कि, घर में दो से तीन फिट तक पानी भरा है। अभी तक पानी की धारा कम नहीं हुई है। राहत के नाम पर जो भी सामग्री मिली थी वो खत्म हो चुकी है। चूल्हा जलाने के लिए लकड़ियां भी नहीं हैं, जो हैं वो भीगी हैं।
गोबरहा के गुरुदीन ने बताया कि, लोग किसी तरह रूखी सूखी खाकर जिंदा हैं। हर तरफ पानी ही पानी है। घरों के साथ खेत की फसल, अनाज सब बर्बाद हो गया।
परसावल के दुखी का कहना है कि, उनका घर भी पास ही है। एक अजीब सी हालत थी। घर का सामान बचाने की कोशिश करता तो दुकान का माल बह रहा था और दुकान का सामान बचा रहा था तो घर का सामान बह गया। बाढ़ ने पूरी तरह से तबाह कर दिया है।
एडीएम संदीप गुप्ता का कहना है कि, नदी का पानी तेजी से घट रहा है, लेकिन जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से 58 सेंटीमीटर ऊपर है। जिन गांवों में पानी भरा था उनमें से भी पानी कम हो रहा है।
बाढ़ पीड़ितों में समय-समय पर राहत सामग्री का वितरण कराया जाता है। मवेशियों के चारे की भी व्यवस्था कराई गई है। बाढ़ पीड़ितों को यथासंभव मदद की जा रही है।