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दिमागी बुखार से बालिका की मौत
Updated Fri, 10 Nov 2017 12:02 AM IST
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दिमागी बुखार से बालिका की मौत
- बेहोशी, झटके व उल्टी आने पर जिला अस्पताल में हुई थी भर्ती
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। जिला अस्पताल में तेज बुखार, बेहोशी व उल्टी से पीड़ित एक बालिका को भर्ती कराया गया। जहां इलाज के दौरान बालिका की मौत हो गई। चिकित्सक ने दिमागी बुखार से बच्ची की मौत होने की बात कही है।
मसौली थाना क्षेत्र के ग्राम बहारुपुर निवासी ज्वाला प्रसाद की आठ वर्षीय पुत्री विमला बीते एक सप्ताह से तेज बुखार से पीड़ित थी। गुरुवार की सुबह बच्ची को बेहोशी, झटके व उल्टी की समस्या बढ़ने पर परिवारीजन उसे लेकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचे। यहां पर तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके सिंह ने बच्ची की हालत गंभीर देख उसका तत्काल इलाज शुरू कर दिया। बच्ची को ट्रॉमा सेंटर ले जाने को कहा। परिवारीजन जब तक ले जाने की तैयारी करते बच्ची की मौत हो गई। डॉ. सिंह ने बताया कि बच्ची को पूरी तरह से दिमागी बुखार था, इलाज के दौरान कई बार बेहोश हुई और झटके भी आ रहे थे। परिवारीजन बच्ची का इलाज इधर उधर करा रहे थे जिससे उसकी हालत और बिगड़ गई थी। समय रहते उसकी जांच होकर उपचार शुरू हो जाता तो उसकी जान बच सकती थी।
वर्जन-
दिमागी बुखार से मौत होने की जानकारी नहीं है। संबंधित सीएचसी अधीक्षक को गांव भेजकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण व टीकाकरण कराया जाएगा।
- डॉ. रमेश चंद्र, सीएमओ
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- बेहोशी, झटके व उल्टी आने पर जिला अस्पताल में हुई थी भर्ती
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। जिला अस्पताल में तेज बुखार, बेहोशी व उल्टी से पीड़ित एक बालिका को भर्ती कराया गया। जहां इलाज के दौरान बालिका की मौत हो गई। चिकित्सक ने दिमागी बुखार से बच्ची की मौत होने की बात कही है।
मसौली थाना क्षेत्र के ग्राम बहारुपुर निवासी ज्वाला प्रसाद की आठ वर्षीय पुत्री विमला बीते एक सप्ताह से तेज बुखार से पीड़ित थी। गुरुवार की सुबह बच्ची को बेहोशी, झटके व उल्टी की समस्या बढ़ने पर परिवारीजन उसे लेकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचे। यहां पर तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके सिंह ने बच्ची की हालत गंभीर देख उसका तत्काल इलाज शुरू कर दिया। बच्ची को ट्रॉमा सेंटर ले जाने को कहा। परिवारीजन जब तक ले जाने की तैयारी करते बच्ची की मौत हो गई। डॉ. सिंह ने बताया कि बच्ची को पूरी तरह से दिमागी बुखार था, इलाज के दौरान कई बार बेहोश हुई और झटके भी आ रहे थे। परिवारीजन बच्ची का इलाज इधर उधर करा रहे थे जिससे उसकी हालत और बिगड़ गई थी। समय रहते उसकी जांच होकर उपचार शुरू हो जाता तो उसकी जान बच सकती थी।
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वर्जन-
दिमागी बुखार से मौत होने की जानकारी नहीं है। संबंधित सीएचसी अधीक्षक को गांव भेजकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण व टीकाकरण कराया जाएगा।
- डॉ. रमेश चंद्र, सीएमओ