{"_id":"593aea1b4f1c1b4c668b45d7","slug":"21497033243-barabanki-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीमैप के प्रधान वैज्ञानिक ने बताए तुलसी व मेंथा की खेती के गुण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीमैप के प्रधान वैज्ञानिक ने बताए तुलसी व मेंथा की खेती के गुण
Updated Sat, 10 Jun 2017 12:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीमैप के प्रधान वैज्ञानिक ने बताए तुलसी व मेंथा की खेती के गुण
- किसान मेला एवं संगोष्ठी में मौजूद रहे प्रधान वैज्ञानिक आरएस शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो
हैदरगढ़ (बाराबंकी)। गुणकारी तुलसी तथा मेंथ की लाभप्रद खेती किसानों की आय को कई गुना बढ़ा सकती है। उद्यान एंव खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा आयोजित किसान मेला एवं संगोष्ठी के दूसरे दिन सीमैप के प्रधान वैज्ञानिक आरएस शर्मा ने तुलसी व मेंथा की खेती पर जानकारी दी। चीनी मिल ने गन्ने के साथ सहफसली खेती कर मुनाफा कमाने के लिए किसानों को प्रेरित किया है।
शुक्रवार को केवीके पर दूसरे दिन किसान मेला व गोष्ठी की अध्यक्षता उद्यान निदेशालय के डॉ. सर्वेश कुमार ने की। मुख्य वैज्ञानिक राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान लखनऊ के डॉ. आरएस कटियार ने फूलों की खेती पर चर्चा के साथ ड्रिप स्प्रिकलर की टपक सिंचाई के बारे में बताया। टपक सिंचाई पर विस्तृत चर्चा करते हुए उद्यान अधिकारी जयकरन सिंह ने कहा इस प्रणाली में पचास से साठ प्रतिशत जल की बचत की जा सकती है। डॉ. रविंद्र कुमार वर्मा ने मछली एंव गन्ना की खेती पर जानकारी दी है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने फसलों में कीड़े लगने पर उससे बचाव के सुझाव दिए। प्रगतिशील किसान विश्वंभर कुमार वर्मा, नवनीत कुमार वर्मा, मंशाराम वर्मा, कौशलेंद्र सिंह ने भी खेती के अनुभव साझा किए। इस मौके पर हैदरगढ़ चीनी मिल के मुख्य गन्ना प्रबंधक शैलेंद्र कुमार मिश्र ने धान गेहूं तथा गन्ना पेड़ी के दो वर्षीय फसल चक्र को अपना कर भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के उपाय बताए। गन्ने की फसल एक वर्ष में दस टन प्रति हेक्टेयर पत्तियां छोड़ती है जो खेतों में सड़ कर खाद बन जाती है इससे उत्पादन काफी बढ़ जाता है। गन्ना फसल के साथ लाही आलू धनिया की खेती सहफसली के रूप में करने की सलाह दी, है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुरेंद्र सिंह ने किसानों को कंपोष्ट खाद बनाने के लिए विस्तार से जानकारी दी। गोष्ठी में ग्रामीण युवा लोक कलबा मंच द्वारा लोक गीतों के माध्यम से किसानों का भरपूर मनोरंजन किया गया। कार्यक्रम में अंत तक उद्यान निदेशक की प्रतीक्षा अंत तक बनी रही।
विज्ञापन
- किसान मेला एवं संगोष्ठी में मौजूद रहे प्रधान वैज्ञानिक आरएस शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो
हैदरगढ़ (बाराबंकी)। गुणकारी तुलसी तथा मेंथ की लाभप्रद खेती किसानों की आय को कई गुना बढ़ा सकती है। उद्यान एंव खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा आयोजित किसान मेला एवं संगोष्ठी के दूसरे दिन सीमैप के प्रधान वैज्ञानिक आरएस शर्मा ने तुलसी व मेंथा की खेती पर जानकारी दी। चीनी मिल ने गन्ने के साथ सहफसली खेती कर मुनाफा कमाने के लिए किसानों को प्रेरित किया है।
शुक्रवार को केवीके पर दूसरे दिन किसान मेला व गोष्ठी की अध्यक्षता उद्यान निदेशालय के डॉ. सर्वेश कुमार ने की। मुख्य वैज्ञानिक राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान लखनऊ के डॉ. आरएस कटियार ने फूलों की खेती पर चर्चा के साथ ड्रिप स्प्रिकलर की टपक सिंचाई के बारे में बताया। टपक सिंचाई पर विस्तृत चर्चा करते हुए उद्यान अधिकारी जयकरन सिंह ने कहा इस प्रणाली में पचास से साठ प्रतिशत जल की बचत की जा सकती है। डॉ. रविंद्र कुमार वर्मा ने मछली एंव गन्ना की खेती पर जानकारी दी है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने फसलों में कीड़े लगने पर उससे बचाव के सुझाव दिए। प्रगतिशील किसान विश्वंभर कुमार वर्मा, नवनीत कुमार वर्मा, मंशाराम वर्मा, कौशलेंद्र सिंह ने भी खेती के अनुभव साझा किए। इस मौके पर हैदरगढ़ चीनी मिल के मुख्य गन्ना प्रबंधक शैलेंद्र कुमार मिश्र ने धान गेहूं तथा गन्ना पेड़ी के दो वर्षीय फसल चक्र को अपना कर भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के उपाय बताए। गन्ने की फसल एक वर्ष में दस टन प्रति हेक्टेयर पत्तियां छोड़ती है जो खेतों में सड़ कर खाद बन जाती है इससे उत्पादन काफी बढ़ जाता है। गन्ना फसल के साथ लाही आलू धनिया की खेती सहफसली के रूप में करने की सलाह दी, है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुरेंद्र सिंह ने किसानों को कंपोष्ट खाद बनाने के लिए विस्तार से जानकारी दी। गोष्ठी में ग्रामीण युवा लोक कलबा मंच द्वारा लोक गीतों के माध्यम से किसानों का भरपूर मनोरंजन किया गया। कार्यक्रम में अंत तक उद्यान निदेशक की प्रतीक्षा अंत तक बनी रही।
विज्ञापन