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संशोंधित- ई-टेंडरिंग से संघर्ष की घटनाओं पर विराम के आसार
Updated Fri, 01 Sep 2017 11:20 PM IST
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ई-टेंडरिंग से संघर्ष की घटनाओं पर विराम के आसार
बाराबंकी। शासन ने ई-टेंडरिंग की व्यवस्था शुरू कर दी है। इससे जहां विभागों में निकलने वाले टेंड़रों मेें पारदर्शिता बनी रहेगी। वहीं टेंडर हथियाने को लेकर बिगड़ने वाली कानून व्यवस्था पर भी अंकुुश लगेगा। विभागों के साथ ही ठेकेदारों को भी टेंडर लेने के लिए आनलाइन आवेदन करना होगा।
पहले ऑफलाइन व्यवस्था से कई टेंडर प्रक्रिया में चहेतेेे को टेंडर दिए जाने को लेकर कई बार खूनी संघर्ष तक हो चुका है। ई-टेंडरिंग के लिए 45 विभागों को इसमें शामिल कर उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। ई-टेंडरिंग व्यवस्था लागू किए जाने के निर्देश के बाद प्रशासन ने इसकी शुरुआत कर दी है।
इस व्यवस्था को अमल में लाने के लिए 45 विभागों को इसमें शामिल किया गया है। इन विभागों में अब आज से कोई टेंडर ऑफलाइन तरीके से न होकर सीधे ई-टेंडर पोर्टल के माध्यम से करना होगा। इसके लिए हर विभाग ने तीन सदस्यी कमेटी भी बनाई है। जिसमें एक विभागीय अधिकारी समेत दो कर्मचारियों को रखा गया है।
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इन तीनों कर्मचारियों के संयुक्त डिजिटल हस्ताक्षर से ही पोर्टल पर टेंडर अपलोड करने के साथ आने वाले आवेदनों की जांच व आगे की कार्रवाई की जाएगी। ई-टेंडर प्रक्रिया को लेकर 45 विभागों के 153 कर्मचारियों को ई-डिस्ट्रिक मैनेजर धर्मेंद्र उपाध्याय द्वारा प्रशिक्षण भी कई दौर में दिया जा चुका है। पोर्टल में किस विभाग ने टेंडर डाला है।
और कितने ठेकेदारों ने अपने डिजिटल हस्ताक्षर से आवेदन किया है समेत विभिन्न कार्यवाहियों पर निगरानी के लिए ई-डिस्ट्रिक मैनेजर के कंप्यूटर रूम में ही एक लैब भी बनाया गया है।
ई-टेंडरिंग प्रक्रिया से सफेदपोश नेताओं व अधिकारियों की मिली भगत कर चहेतों को टेंडर दिलाने से निजात मिल जाएगी। यहीं नही बैक डेट पर कम प्रतियों में प्रकाशित होने वाले किस अखबार टेंडर प्रकाशित कराकर खानापूर्ति पर भी विराम लग जाएगा। टेंडर के दौरान कई बार हो चुुुके विवाद पर भी पूर्ण रुप से रोक लग सकेगी। पूरी टेंडर प्रक्रिया की मॉनीटरिंग प्रशासन से लेकर शासनस्तर तक के अधिकारियों की नजर में रहेगा।
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बाराबंकी। शासन ने ई-टेंडरिंग की व्यवस्था शुरू कर दी है। इससे जहां विभागों में निकलने वाले टेंड़रों मेें पारदर्शिता बनी रहेगी। वहीं टेंडर हथियाने को लेकर बिगड़ने वाली कानून व्यवस्था पर भी अंकुुश लगेगा। विभागों के साथ ही ठेकेदारों को भी टेंडर लेने के लिए आनलाइन आवेदन करना होगा।
पहले ऑफलाइन व्यवस्था से कई टेंडर प्रक्रिया में चहेतेेे को टेंडर दिए जाने को लेकर कई बार खूनी संघर्ष तक हो चुका है। ई-टेंडरिंग के लिए 45 विभागों को इसमें शामिल कर उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। ई-टेंडरिंग व्यवस्था लागू किए जाने के निर्देश के बाद प्रशासन ने इसकी शुरुआत कर दी है।
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इस व्यवस्था को अमल में लाने के लिए 45 विभागों को इसमें शामिल किया गया है। इन विभागों में अब आज से कोई टेंडर ऑफलाइन तरीके से न होकर सीधे ई-टेंडर पोर्टल के माध्यम से करना होगा। इसके लिए हर विभाग ने तीन सदस्यी कमेटी भी बनाई है। जिसमें एक विभागीय अधिकारी समेत दो कर्मचारियों को रखा गया है।
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इन तीनों कर्मचारियों के संयुक्त डिजिटल हस्ताक्षर से ही पोर्टल पर टेंडर अपलोड करने के साथ आने वाले आवेदनों की जांच व आगे की कार्रवाई की जाएगी। ई-टेंडर प्रक्रिया को लेकर 45 विभागों के 153 कर्मचारियों को ई-डिस्ट्रिक मैनेजर धर्मेंद्र उपाध्याय द्वारा प्रशिक्षण भी कई दौर में दिया जा चुका है। पोर्टल में किस विभाग ने टेंडर डाला है।
और कितने ठेकेदारों ने अपने डिजिटल हस्ताक्षर से आवेदन किया है समेत विभिन्न कार्यवाहियों पर निगरानी के लिए ई-डिस्ट्रिक मैनेजर के कंप्यूटर रूम में ही एक लैब भी बनाया गया है।
ई-टेंडरिंग प्रक्रिया से सफेदपोश नेताओं व अधिकारियों की मिली भगत कर चहेतों को टेंडर दिलाने से निजात मिल जाएगी। यहीं नही बैक डेट पर कम प्रतियों में प्रकाशित होने वाले किस अखबार टेंडर प्रकाशित कराकर खानापूर्ति पर भी विराम लग जाएगा। टेंडर के दौरान कई बार हो चुुुके विवाद पर भी पूर्ण रुप से रोक लग सकेगी। पूरी टेंडर प्रक्रिया की मॉनीटरिंग प्रशासन से लेकर शासनस्तर तक के अधिकारियों की नजर में रहेगा।