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Barabanki News: 15 हजार नौनिहालों को नहीं मिला यूनीफॉर्म का पैसा
Thu, 15 Jun 2023 01:18 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 15 Jun 2023 01:18 AM IST
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बाराबंकी। सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले नौनिहालों को यूनीफॉर्म, जूता-मोजा, बस्ता आदि का पैसा सीधे अभिभावकों के खाते में भेजा जाता है। लेकिन शिक्षा सत्र शुरु होने के करीब ढाई माह बाद भी 15 हजार नौनिहालों के 13 हजार अभिभावकों के खाते में पैसा नहीं पहुंचा पाया। आधार न होने व सीडिंग न होने से यह समस्या सामने आई है। ऐसे में यह बच्चे बिना यूनीफॉर्म के ही स्कूल आएंगे।
जिले में कुल 2636 परिषदीय विद्यालय हैं। इसमें 1792 प्राथमिक विद्यालय, 475 पूर्व माध्यमिक विद्यालय व 369 कंपोजिट विद्यालय हैं। इन स्कूलों में करीब चार लाख बच्चे हैं तो करीब आठ हजार से अधिक शिक्षक व शिक्षिकाएं तैनात हैं। बच्चों के यूनीफॉर्म का पैसा डीबीटी के माध्यम से अभिभावकों के खाते में आता है। इसके लिए अभिभावक के साथ बच्चों का आधार होना जरूरी है। सेवा प्रदाताओं के विभिन्न सेवा वितरण लाभार्थी डेटाबेस से आधार की सीडिंग भी होती है, तभी पैसा भेजा जाता है। एक अप्रैल से शुरु हुए शिक्षा सत्र के अब तक करीब ढाई महीने बीतने को है मगर 15 हजार से अधिक बच्चों के करीब 13 हजार अभिभावकों के खाते इस प्रक्रिया के तहत अधूरे हैं।
किसी का आधार ही नहीं बना है तो किसी की आधार सीडिंग नहीं हुई है। ऐसी हालत में बजट होते हुए भी नौनिहालों को यूनीफॉर्म का पैसा नहीं मिल सका। इसमें अभिभावकों की लापरवाही भी सामने आ रही है। क्योंकि ब्लॉक स्तर पर विभाग के संसाधन केंद्र पर आधार बनवाने की सुविधा दी गई है। बीएसए संतोष देव पांडेय ने बताया कि शिक्षकों को पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे अभिभावकों से संपर्क करें।
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इसलिए मिलता है पैसा
सरकार प्रति बच्चे को 12 सौ रुपये के हिसाब से धनराशि देती है। जिसमें दो यूनीफॉर्म के लिए 600 रूपये, बस्ते के लिए 175 रुपये, जूते-मोजा के लिए 125 रुपये, स्वेटर के लिए 200 रुपये होते हैं। इसके अलावा 100 रुपये चार कॉपियां, दो पेन, दो पेंसिल, दो रबर और दो शार्पनर खरीदने के लिए मिलते हैं। अभिभावक इसमें और धनराशि मिलाकर गुणवत्ता अच्छी कर सकते हैं।
1.76 लाख खातों में भेजे जा रहे 21.21 करोड़
परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के एक लाख 76 हजार 830 अभिभावकों के खाते में दूसरे चरण के तहत करीब 21 करोड़ 21 लाख रुपये 48 घंटे के अंदर भेज दिए जाएंगे। इनमें एक अभिभावक के दो या इससे अधिक बच्चे भी हैं। यू डॉयस के जिला समन्यवक पुनीत कुमार ने बताया कि पैसा भेजने के लिए 30 बैच तैयार हैं। अभिभावकों के खाते में पैसे कभी भी पहुंच सकते हैं। इससे करीब दो लाख बच्चों को लाभ मिलेगा।
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जिले में कुल 2636 परिषदीय विद्यालय हैं। इसमें 1792 प्राथमिक विद्यालय, 475 पूर्व माध्यमिक विद्यालय व 369 कंपोजिट विद्यालय हैं। इन स्कूलों में करीब चार लाख बच्चे हैं तो करीब आठ हजार से अधिक शिक्षक व शिक्षिकाएं तैनात हैं। बच्चों के यूनीफॉर्म का पैसा डीबीटी के माध्यम से अभिभावकों के खाते में आता है। इसके लिए अभिभावक के साथ बच्चों का आधार होना जरूरी है। सेवा प्रदाताओं के विभिन्न सेवा वितरण लाभार्थी डेटाबेस से आधार की सीडिंग भी होती है, तभी पैसा भेजा जाता है। एक अप्रैल से शुरु हुए शिक्षा सत्र के अब तक करीब ढाई महीने बीतने को है मगर 15 हजार से अधिक बच्चों के करीब 13 हजार अभिभावकों के खाते इस प्रक्रिया के तहत अधूरे हैं।
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किसी का आधार ही नहीं बना है तो किसी की आधार सीडिंग नहीं हुई है। ऐसी हालत में बजट होते हुए भी नौनिहालों को यूनीफॉर्म का पैसा नहीं मिल सका। इसमें अभिभावकों की लापरवाही भी सामने आ रही है। क्योंकि ब्लॉक स्तर पर विभाग के संसाधन केंद्र पर आधार बनवाने की सुविधा दी गई है। बीएसए संतोष देव पांडेय ने बताया कि शिक्षकों को पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे अभिभावकों से संपर्क करें।
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इसलिए मिलता है पैसा
सरकार प्रति बच्चे को 12 सौ रुपये के हिसाब से धनराशि देती है। जिसमें दो यूनीफॉर्म के लिए 600 रूपये, बस्ते के लिए 175 रुपये, जूते-मोजा के लिए 125 रुपये, स्वेटर के लिए 200 रुपये होते हैं। इसके अलावा 100 रुपये चार कॉपियां, दो पेन, दो पेंसिल, दो रबर और दो शार्पनर खरीदने के लिए मिलते हैं। अभिभावक इसमें और धनराशि मिलाकर गुणवत्ता अच्छी कर सकते हैं।
1.76 लाख खातों में भेजे जा रहे 21.21 करोड़
परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के एक लाख 76 हजार 830 अभिभावकों के खाते में दूसरे चरण के तहत करीब 21 करोड़ 21 लाख रुपये 48 घंटे के अंदर भेज दिए जाएंगे। इनमें एक अभिभावक के दो या इससे अधिक बच्चे भी हैं। यू डॉयस के जिला समन्यवक पुनीत कुमार ने बताया कि पैसा भेजने के लिए 30 बैच तैयार हैं। अभिभावकों के खाते में पैसे कभी भी पहुंच सकते हैं। इससे करीब दो लाख बच्चों को लाभ मिलेगा।