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संसोधित, घाघरा का तांडव जारी सवा दो लाख क्सूसेक छोड़ा गया नेपाली पानी
Updated Fri, 14 Jul 2017 10:47 PM IST
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घाघरा का तांडव जारी, अब सवा दो लाख क्यूसेक छोड़ा नेपाली पानी
तराई के बाशिंदों की बढ़ीं धड़कनें, 160 किमी कह दूरी तय कर 36 घंटे में एल्गिन ब्रिज पहुंचेगा पानी
कटान के खतरे को लेकर बंधे पर बसाए गए कंचनापुर के ग्रामीण
अमर उजाला ब्यूरो
फोटो- 35, 36 पी
बाराबंकी। घाघरा नदी का जल तांडव जारी है। शुक्रवार को दो लाख 16 हजार क्यूसेक पानी नेपाल से छोड़े जाने से बाढ़ पीड़ित गांवों के हालात और बिगड़ने के आसार हैं। एक दिन पहले सात लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से घाघरा एल्गिन ब्रिज पर खतरे के निशान से 14 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जिला प्रशासन ने अब तक की 13 सौ 50 परिवारों को राहत सामग्री वितरित किए जाने का दावा किया है। जिले के करीब आधा दर्जन गांवों में पानी भर जाने से यहां के लोगों ने तटबंधों पर पन्नी और त्रिपाल डाल कर गुजर बसर कर रहे हैं।
करीब दस दिनों से घाघरा नदी नेेेपाली पानी छोड़े जाने से जिले की चार तहसीलों के सैकड़ों गांवों में बाढ़ का संकट मंडरा रहा है। करीब आधा दर्जन सिरौलीगौसपुर और रामसनेहीघाट तहसील के नदी के उस पार बसे परसावल,नैपुरा, कमियार, मांझा रायपुर, चरपुुरवा, नउवनपुरवा, पूरी तरीके से पानी में डूब गए हैं। यहां के लोगों ने बंधे पर अपना बसेरा बनाया है। यहां प्रशासन ने उन्हे राहत सामग्री उपलब्ध करा दी है। एडीएम ने बताया कि नेपाल से पानी छोड़े जाने के कारण बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
शुक्रवार को भी गिरिजा बैराज से 2,16499 क्यूसेक पानी घाघरा में छोड़े जाने की पुष्टि बाढ़ के नोडल अधिकारी ने की। यह पानी एल्गिन ब्रिज के पास 36 घंटे में पहुंच जाएगा। इसको लेकर शुक्रवार को रामनगर तहसील के कंचनापुर गांव पहुंचे एडीएम ने ग्रामीणों को गांव से सुरक्षित निकालकर बंधे पर ठहराया है। कई दिनों से घाघरा का जलस्तर घटने बढ़ने से गांव के किनारे तक कटान होने लगी थी।
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बाक्स
घाघरा के उस पार बसे 7 गांवों में संकट
सिरौलीगौसपुर व रामसनेहीघाट तहसील के वह सात गांव जो घाघरा के उस पार बसे है। उन गांव के बांसिंदों को तटबंध के कटे होने की वजह से वह संकट से जूझ रहे हैं। कटे हुए चरसड़ी बांध से घ़ुस रहा पानी रायपुर मांझा, नाउनपुरवा, चरपुरवा, बेहटा, पारा, नैपुरा व कमियार गांव पूरी तरह प्रभावित है। ग्रामीण बंधे पर छप्परनुमा मकान व तिरपाल तान कर रह रहे है। ग्रामीणों को प्रशासन की ओर से राहत सामग्री भी उपलब्ध कराई गई। एसडीएम रामसनेहीघाट ने ग्रामीणों को तिरपाल वितरित किए। इन गांव व आसपास के खेतों में पानी भरे होने के कारण ग्रामीणों को मवेशियों के लिए चारे का संकट है। वहीं आवगमन का रास्ता बंद होने के कारण ट्रैक्टर-ट्राली से लोग आ रहे है तो प्रशासन के ओर से राहत सामग्री भी ट्रैक्टर ट्रालियों से पहुंचाई जा रही है।
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तराई के बाशिंदों की बढ़ीं धड़कनें, 160 किमी कह दूरी तय कर 36 घंटे में एल्गिन ब्रिज पहुंचेगा पानी
कटान के खतरे को लेकर बंधे पर बसाए गए कंचनापुर के ग्रामीण
अमर उजाला ब्यूरो
फोटो- 35, 36 पी
बाराबंकी। घाघरा नदी का जल तांडव जारी है। शुक्रवार को दो लाख 16 हजार क्यूसेक पानी नेपाल से छोड़े जाने से बाढ़ पीड़ित गांवों के हालात और बिगड़ने के आसार हैं। एक दिन पहले सात लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से घाघरा एल्गिन ब्रिज पर खतरे के निशान से 14 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जिला प्रशासन ने अब तक की 13 सौ 50 परिवारों को राहत सामग्री वितरित किए जाने का दावा किया है। जिले के करीब आधा दर्जन गांवों में पानी भर जाने से यहां के लोगों ने तटबंधों पर पन्नी और त्रिपाल डाल कर गुजर बसर कर रहे हैं।
करीब दस दिनों से घाघरा नदी नेेेपाली पानी छोड़े जाने से जिले की चार तहसीलों के सैकड़ों गांवों में बाढ़ का संकट मंडरा रहा है। करीब आधा दर्जन सिरौलीगौसपुर और रामसनेहीघाट तहसील के नदी के उस पार बसे परसावल,नैपुरा, कमियार, मांझा रायपुर, चरपुुरवा, नउवनपुरवा, पूरी तरीके से पानी में डूब गए हैं। यहां के लोगों ने बंधे पर अपना बसेरा बनाया है। यहां प्रशासन ने उन्हे राहत सामग्री उपलब्ध करा दी है। एडीएम ने बताया कि नेपाल से पानी छोड़े जाने के कारण बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
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शुक्रवार को भी गिरिजा बैराज से 2,16499 क्यूसेक पानी घाघरा में छोड़े जाने की पुष्टि बाढ़ के नोडल अधिकारी ने की। यह पानी एल्गिन ब्रिज के पास 36 घंटे में पहुंच जाएगा। इसको लेकर शुक्रवार को रामनगर तहसील के कंचनापुर गांव पहुंचे एडीएम ने ग्रामीणों को गांव से सुरक्षित निकालकर बंधे पर ठहराया है। कई दिनों से घाघरा का जलस्तर घटने बढ़ने से गांव के किनारे तक कटान होने लगी थी।
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घाघरा के उस पार बसे 7 गांवों में संकट
सिरौलीगौसपुर व रामसनेहीघाट तहसील के वह सात गांव जो घाघरा के उस पार बसे है। उन गांव के बांसिंदों को तटबंध के कटे होने की वजह से वह संकट से जूझ रहे हैं। कटे हुए चरसड़ी बांध से घ़ुस रहा पानी रायपुर मांझा, नाउनपुरवा, चरपुरवा, बेहटा, पारा, नैपुरा व कमियार गांव पूरी तरह प्रभावित है। ग्रामीण बंधे पर छप्परनुमा मकान व तिरपाल तान कर रह रहे है। ग्रामीणों को प्रशासन की ओर से राहत सामग्री भी उपलब्ध कराई गई। एसडीएम रामसनेहीघाट ने ग्रामीणों को तिरपाल वितरित किए। इन गांव व आसपास के खेतों में पानी भरे होने के कारण ग्रामीणों को मवेशियों के लिए चारे का संकट है। वहीं आवगमन का रास्ता बंद होने के कारण ट्रैक्टर-ट्राली से लोग आ रहे है तो प्रशासन के ओर से राहत सामग्री भी ट्रैक्टर ट्रालियों से पहुंचाई जा रही है।