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कर्जमाफी वाले किसान चक्रवृद्वि ब्याज चुकाने को मजबूर
Updated Tue, 28 Nov 2017 01:19 AM IST
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कर्जमाफी वाले किसान चक्रवृद्धि ब्याज चुकाने को मजबूर
- एक लाख की कर्जमाफी पर अदा करना पड़ रहा करीब 17 हजार का अतिरिक्त ब्याज
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। कर्जमाफी का लाभ पाने वाले किसानों के एक लाख तक के कृषि ऋण भले ही माफ किए गए हों। मगर, दो वित्तीय वर्ष बीतने को लेकर किसानों से बैंक चक्रवृद्धि ब्याज की रकम वसूल रहे हैं। ऐसे में अन्नदाताओं को महंगे ब्याज की रकम चुकानी पड़ रही है।
चुनावी घोषणा में किसानों की कर्जमाफी की आस में किसानों ने बैंक का कर्ज अदा नहीं किया। आखिरकार प्रधानमंत्री मोदी ने लघु व सीमांत किसानों की कर्जमाफी की घोषणा कर दी। मगर, जब कर्जमाफी की पॉलिसी तैयार की तो पता चला कि मार्च 2016 से पूर्व कर्ज लेने वाले किसानों के एक लाख तक के कर्ज माफ किए जाएंगे। केसीसी खातों का रिन्यूअल कराने वाले किसानों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। मगर, 31 मार्च 2016 के बाद का ब्याज चुकाना अब किसानों के लिए नासूर बन गया है। केसीसी खातों पर किसानों से लिया जाने वाला 7 प्रतिशत प्रतिवर्ष ब्याज दो वित्तीय वर्ष बीतने के जहां ब्याज को मूलधन में जोड़कर चक्रवृद्धि ब्याज लिया जा रहा है। वहीं ब्याज भी 7 प्रतिशत से बढ़ाकर नॉर्मल व्यावसायिक दर (10-11 प्रतिशत) तक बैंक वसूल रहे हैं। एक लाख का कर्ज वर्तमान में माफ होने पर भी किसान को ब्याज की रकम करीब 17 हजार अपने पास से जमा करने पर ही कर्ज से निजात मिलेगी।
वर्जन-
24 जून को कर्जमाफी को लेकर सरकार ने जो पॉलिसी जारी कि उसमें कहा गया कि 31 मार्च 2016 तक कर्ज लेने वाले किसानों के एक लाख के कर्ज माफ किए जाएंगे। ऐसे में जिन किसानों ने एक लाख से कम कर्ज लिया था और 31 मार्च तक वह ब्याज सहित एक लाख हो गई तो उसे तो कर्जमाफी में जोड़ दिया गया। मगर, मार्च 2016 के बाद का कर्ज किसानों को अदा करना है।
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- संजीव कुमार, जिला कृषि अधिकारी
वर्जन-
किसानों को केसीसी पर प्रतिवर्ष 7 प्रतिशत ब्याज लिया जाता है। मगर, एक साल बाद ब्याज की रकम मूलधन में जोड़ने के बाद ब्याज की दर 7 प्रतिशत से बढ़ाकर नार्मल व्यावसायिक दर से लेने की बैंक की व्यवस्था है। जिसमें बैंक के अपनी अलग-अलग ब्याज दरें हैं। जो 9 से लेकर 11 प्रतिशत तक है।
- रवीन्द्र सिंह, वरिष्ठ शाखा प्रबंधक- बैंक ऑफ इंडिया शाखा पंचायत भवन
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- एक लाख की कर्जमाफी पर अदा करना पड़ रहा करीब 17 हजार का अतिरिक्त ब्याज
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। कर्जमाफी का लाभ पाने वाले किसानों के एक लाख तक के कृषि ऋण भले ही माफ किए गए हों। मगर, दो वित्तीय वर्ष बीतने को लेकर किसानों से बैंक चक्रवृद्धि ब्याज की रकम वसूल रहे हैं। ऐसे में अन्नदाताओं को महंगे ब्याज की रकम चुकानी पड़ रही है।
चुनावी घोषणा में किसानों की कर्जमाफी की आस में किसानों ने बैंक का कर्ज अदा नहीं किया। आखिरकार प्रधानमंत्री मोदी ने लघु व सीमांत किसानों की कर्जमाफी की घोषणा कर दी। मगर, जब कर्जमाफी की पॉलिसी तैयार की तो पता चला कि मार्च 2016 से पूर्व कर्ज लेने वाले किसानों के एक लाख तक के कर्ज माफ किए जाएंगे। केसीसी खातों का रिन्यूअल कराने वाले किसानों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। मगर, 31 मार्च 2016 के बाद का ब्याज चुकाना अब किसानों के लिए नासूर बन गया है। केसीसी खातों पर किसानों से लिया जाने वाला 7 प्रतिशत प्रतिवर्ष ब्याज दो वित्तीय वर्ष बीतने के जहां ब्याज को मूलधन में जोड़कर चक्रवृद्धि ब्याज लिया जा रहा है। वहीं ब्याज भी 7 प्रतिशत से बढ़ाकर नॉर्मल व्यावसायिक दर (10-11 प्रतिशत) तक बैंक वसूल रहे हैं। एक लाख का कर्ज वर्तमान में माफ होने पर भी किसान को ब्याज की रकम करीब 17 हजार अपने पास से जमा करने पर ही कर्ज से निजात मिलेगी।
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वर्जन-
24 जून को कर्जमाफी को लेकर सरकार ने जो पॉलिसी जारी कि उसमें कहा गया कि 31 मार्च 2016 तक कर्ज लेने वाले किसानों के एक लाख के कर्ज माफ किए जाएंगे। ऐसे में जिन किसानों ने एक लाख से कम कर्ज लिया था और 31 मार्च तक वह ब्याज सहित एक लाख हो गई तो उसे तो कर्जमाफी में जोड़ दिया गया। मगर, मार्च 2016 के बाद का कर्ज किसानों को अदा करना है।
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- संजीव कुमार, जिला कृषि अधिकारी
वर्जन-
किसानों को केसीसी पर प्रतिवर्ष 7 प्रतिशत ब्याज लिया जाता है। मगर, एक साल बाद ब्याज की रकम मूलधन में जोड़ने के बाद ब्याज की दर 7 प्रतिशत से बढ़ाकर नार्मल व्यावसायिक दर से लेने की बैंक की व्यवस्था है। जिसमें बैंक के अपनी अलग-अलग ब्याज दरें हैं। जो 9 से लेकर 11 प्रतिशत तक है।
- रवीन्द्र सिंह, वरिष्ठ शाखा प्रबंधक- बैंक ऑफ इंडिया शाखा पंचायत भवन